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नोटबंदी: जेलों को है काला धन कुबेरों का इंतजार

काला धन सफेद करने को किराये पर लिए जा रहे जन-धन अकाउंट

Updated On: Nov 24, 2016 10:25 AM IST

Yatish Yadav

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नोटबंदी: जेलों को है काला धन कुबेरों का इंतजार

नई दिल्ली: अगले एक महीने तक इन्कम टैक्स और इकॉनामिक इंटेलीजेंस के जासूस देश के भीतर 771 बैंक अकाउंट्स के असली लाभार्थियों की तलाश में लगे रहेंगे. उन्हें शक है कि इन अकांउट्स को मामूली जमाकर्ताओं से मासिक किराए पर लिया गया, ताकि बड़ी रकम की आवाजाही कराई जा सके. काले धन से निपटने के लिए 8 नवंबर, 2016 को 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने के सरकार के फैसले के बाद ऐसा किया गया.

उच्च सूत्रों ने कहा कि नकदी लेन-देन रिपोर्ट (Cash Transaction Reports) और संदिग्ध लेन-देन रिपोर्ट (Suspicious Transaction Reports) में कई अकाउंट्स में अचानक बढ़ी गतिविधि की पहचान हुई  है. इनमें उत्तर प्रदेश के 298, पश्चिम बंगाल के 137, बिहार के 121 बैंक अकाउंट्स के अलावा कम से कम 11 अन्य राज्यों में कुछ कथित किराए के अकांउट्स शामिल हैं. नोटबंदी की नीति से बचने के लिए तैयार किया गया यह स्कैंडल पूरी फसल में एक तिनका भर है.

बड़े पैमाने पर संगठित घोटाला 

इस जांच से जुड़े सीनियर अधिकारियों का कहना है कि यह एक बहुत फैला हुआ संगठित घोटाला है. उनका शक है कि एक फैले हुए नेटवर्क द्वारा बहुत गहरी साजिश के तहत जीरो बैंलेस खातों में काले धन को जमा किया जा रहा है, ताकि उन्हें नाजायज से जायज बनाया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि ये लेन-देन काफी आश्यर्यजनक है और बैंकों द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट्स को देखते हुए इसकी अलग से जांच होनी चाहिए.

8 नवंबर को नोटबंदी की नीति के फैसले के बाद सरकार ने सभी पब्लिक और प्राइवेट बैंकों को यह निर्देश दिया है कि गैर-कानूनी और संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया जाए और उसकी रिपोर्ट बनाई जाए, जो जीरो बैलेंस खातों और जन-धन अकाउंट्स के जरिये हो सकते हैं. अधिकारियों का भी कहना है कि काले धन के कुबेरों के लिए बड़ी रकम जमा कराने का यह सबसे पसंदीदा तरीका है.

एक सरकारी सूत्र ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि सरकार ने हाल में ही मैनुअल ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम लांच किया है. इसमें वे कुछ चुनिंदा किस्म के लेन-देन पर नजर रखेंगे, इस प्रक्रिया को 371 डिस्ट्रिक्ट सेन्ट्रल कोऑपरेटिव बैंकों में संचालित किया जाएगा. इस सिलसिले में 15 नवंबर को एक पत्र भेजा गया जब यह खबर मिली कि 8 नवंबर को कुछ कोऑपरेटिव बैंकों में बहुत बड़ी रकम जमा कराई गई है, उसी दिन जब प्रधानमंत्री ने 8 बजे रात को अपने इस फैसले की घोषणा की थी.

उन्होंने कहा, 'हमने दो रिपोर्ट्स मंगाई हैं. पहले में 8 नवंबर को आधी रात तक जमा हुए धन का ब्यौरा है और दूसरा 10 से 14 नवंबर के दौरान जमा हुए नकदी के बारे में है. सारे कोऑपरेटिव बैंकों को कहा गया है कि 15 नवंबर से जमा हो रही नकदी को लेकर दैनिक रिपोर्ट फाइल करें. यह साफ निर्देश है कि किसानों और ईमानदार ग्राहकों को परेशान न किया जाए. जांच के दायरे में वही मामले आएंगे, जिनमें काले धन के कुबेरों द्वारा किसी के खाते को किराए पर लेने और उसका गलत इस्तेमाल करने का अंदेशा हो.' साथ में उन्होंने जोड़ा कि इसी तरह के निर्देश क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और राज्य-कोऑपरेटिव बैंकों को जारी किये गए हैं. सरकार के निर्देश बिल्कुल साफ हैं. इस पूरी प्रक्रिया में रबी की फसल में लगे किसानों को परेशानी न हो.

भाड़े के खाते: पैसे पार लगाने के पाकिस्तानी तरीके

बाहरी खूफिया एजेंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) और घरेलू खूफिया एजेंसी इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के अनुभवी जासूसों के अनुसार नोटबंदी के फैसले के बाद बैंक अकाउंट को किराए पर लेने की गतिविधि ‘पैसे पार लगाने के पाकिस्तानी तरीके की याद दिलाता है. हालांकि उन्होंने हाल ही में इसका पर्दाफाश किया और कुछ मुख्य लोगों को गिरफ्तार कर इस गिरोह को नष्ट कर दिया.

एक गुप्त सूचना की फ़र्स्टपोस्ट ने जब जांच की तो पता चला कि अकरम नाम का एक पाकिस्तानी भारत में एक बड़े नेटवर्क को बनाने और चलाने में शामिल था. यह नेटवर्क गरीब खाताधारियों से उनके खाते किराए पर लेकर पैसे का गैर-कानूनी तरीके से लेन-देन करता था. सूत्रों का कहना है कि काले धन के कुबेर शायद टैक्स बचाने के लिए वही तरीके अपना रहे हैं. अब उन बैंक खातों के जरिये पैसे का लेन-देन कर रहे हैं, जिनमें शायद ही कभी कोई बड़ा लेन-देन हुआ हो और इसलिए केन्द्रीय एजेंसियों के रडार से बचे हुए हैं.

गुप्त इंटेलीजेंस नोट कम से कम ऐसे तीन मामलों को ब्यौरा देती है जिनका एंजेसियों ने पर्दाफाश किया. इसमें देवघर, झारखंड के रिखिया गांव के रंजीत कुमार का मामला भी शामिल है जिसे पैसे के लिए गरीब परिवारों के बैंक खातों को किराए पर लगाने के आरोप में जुलाई 2014 में गिरफ्तार किया था. इसी तरह जून 2014 में तीन लोगों ब्रजेश, धर्मेन्द्र कुमार प्रजापति और राजीव पटेल को भोपाल में हिरासत में लिया गया और उनसे कम से कम 37 बैंक खातों के ब्यौरे, एटीएम कार्ड हसिल किये गए.

बैंक खातों को किराए पर लेने के इस पाकिस्तानी मॉडल को पर्दाफाश करने में सबसे बड़ी सफलता फरवरी 2013 में रुड़की में मिली, जब मुजफ्फरनगर के शामली के निवासी जय प्रकाश को 132 बैंक खातों के पासबुक और अलग-अलग बैंकों के एटीएम के साथ गिरफ्तार किया गया. यह नेटवर्क ज्यादातर राजकीय बैंकों को इस्तेमाल करता था. अलग-अलग लोगों से उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड को किराए पर लेता था और फिर अपने पाकिस्तानी सहयोगियों को पैसे के गैर-कानूनी लेन-देन के लिए उनके ब्यौरे दे देता था.

होगी एक से सात साल की जेल 

500 और 1000 के नोट अब सिर्फ कागज के टुकड़े रह गए हैं, और जो पैसे काले धन के कुबेरों द्वारा बैंको में जमा किये जा रहे हैं, वे बैंक और टैक्स अधिकारियों की जांच से बच नहीं सकते.

सीनियर सरकारी अधिकारियों ने कहा, 'हमने कुछ लोगों से पूछताछ की है, जिन्होंने कथित रूप से अपने बैंक खातों को काले धन के मालिकों को इस्तेमाल करने दिया. कुछ और लोगों को भी नोटिस जारी किया गया है.'

काले धन को सफेद करने के लिए बैंक खातों को किराए पर लेने के संबंध में जारी इन्कम टैक्स का नोटिफिकेशन इस बात को साफ-साफ कहता है कि बैंक खाते के मालिक और किरायेदार दोनों को नए कानून के हिसाब से सजा मिलेगी. 'बेनामीदार, लाभार्थी और कोई भी व्यक्ति जो बेनामी लेन-देन करता या कराता है, वह सजा का हकदार होगा. इसमें 1 से 7 साल तक का सश्रम कारावास और जुर्माना हो सकता है.'

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