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जन आक्रोश रैली: रामलीला मैदान से राहुल को विपक्ष का नेता बनाने में जुटी कांग्रेस

दिल्ली में रैली के लिए इस बार कमान संगठन महासचिव अशोक गहलोत के पास है. अशोक गहलोत सभी राज्य के प्रभारियों और अध्यक्षों के साथ रैली की तैयारी का अपडेट ले रहे हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि दिल्ली हरियाणा, राजस्थान और यूपी से मिलाकर कम से कम दो लाख लोगों को जुटाने में कामयाब हो जाएगी

Updated On: Apr 28, 2018 05:47 PM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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जन आक्रोश रैली: रामलीला मैदान से राहुल को विपक्ष का नेता बनाने में जुटी कांग्रेस
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29 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गांधी की जन आक्रोश रैली होने जा रही है. जिसके जरिए राहुल गांधी मोदी सरकार पर हल्ला बोलेंगें. कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की दिल्ली में ये पहली रैली है. राहुल गांधी सरकार की नाकामियां गिनाएंगे. मोदी सरकार ने जनता के लिए अब तक क्या किया है ? क्या नहीं किया है ? खासकर जातीय हिंसा को लेकर मोदी सरकार निशाने पर रहेगी. दलित समाज को कांग्रेस अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है. इसलिए बीजेपी को इस मसले पर भी घेरा जाएगा.

वहीं पेट्रोल डीजल के दामों को लेकर भी सरकार निशाने पर रहने वाली है. मई में सरकार के चार साल पूरे हो रहे हैं. जिसके जश्न के लिए सरकार की तरफ से तैयारी हो रही है. दिल्ली में इस रैली के जरिए कांग्रेस बड़ा पैगाम देने की कोशिश करेगी. 2019 के चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करने और कार्यकर्ता को एक मैसेज देने के लिए ये प्रोग्राम किया जा रहा है, लेकिन इस रैली से राहुल गांधी को विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित करना कांग्रेस की रणनीति में शामिल हैं. क्योंकि अभी भी विपक्षी एकता के नाम पर कई लोग इसके नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं.

ममता बनर्जी और तेलंगाना के सीएम केसीआर एक मोर्चा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. के सी आर डीएमके के नेताओं से भी मिलने वाले हैं. ज़ाहिर है कि दिल्ली में ताकत दिखाकर कांग्रेस इस बहस को खत्म करना चाहती है.

विपक्ष का नेता बनना क्यों है अहम

दरअसल विपक्षी एकता के नाम पर अभी कोई खास पहल नहीं हो पाई है. सभी ये मान रहे हैं कि बीजेपी के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है, लेकिन किस नेता के कयादत में विपक्ष एक होगा इसका कोई खाका नहीं बन पा रहा है. राहुल गांधी को लेकर समय-समय पर कई नेताओं ने ऐतराज़ जताया है. बंगाल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री बिना कांग्रेस के मोर्चा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. इस गठजोड़ में डीएमके और अन्य दलों को जोड़ने की कोशिश चल रही है. जो कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं है.

कांग्रेस के नेता कई बार कह चुके हैं कि बिना कांग्रेस के कोई भी दल बीजेपी के साथ मुकाबला करने में सक्षम नहीं है. हालांकि यूपी में अखिलेश-मायावती ने बिना कांग्रेस के गठबंधन का ऐलान कर दिया है. एसपी के संरक्षक मुलायम सिंह ने एसपी-बीएसपी के गठबंधन को तो सही ठहरा दिया, लेकिन कांग्रेस को सिर्फ दो सीटों वाली पार्टी बता दिया है. हालांकि अखिलेश मुलायम सिंह की कितनी बात मानेंगें ये कहना मुश्किल है. कांग्रेस के साथ दिक्कत है कि बड़े राज्यों में कांग्रेस की ताकत ना के बराबर है.

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यूपी से लेकर बिहार, बंगाल जहां 162 लोकसभा की सीट है. कांग्रेस की हैसियत ज्यादा नहीं है. इसमें अगर ओडीशा, तेलंगाना और झारखंड को भी जोड़ ले तो कांग्रेस यहां भी कमजोर है. इन सभी राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा है. बंगाल, तेलंगना, ओडीशा में ही कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi addresses at the launch of the party's nationwide "Save the Constitution" campaign at Talkatora Stadium in New Delhi on Monday. PTI Photo by Vijay Verma (PTI4_23_2018_000061B)

कांग्रेस पूरे देश की पार्टी

राहुल गांधी सिर्फ इसलिए विपक्ष के नेता के तौर पर स्थापित हो सकते हैं. क्योंकि कांग्रेस का वजूद पूरे देश में है. कांग्रेस का संगठन कमज़ोर ही सही हर ब्लॉक पर मौजूद है. कश्मीर से लेकर केरल तक बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस ही खड़ी नज़र आ रही है. जहां तक क्षेत्रीय दलों का सवाल है कोई भी दल अपने राज्य से बाहर राजनीतिक ताकत नहीं बन पाया है. बीएसपी के पास यूपी को छोड़कर कुछ राज्यों में समर्थक हैं. लेकिन वो इतना नहीं है कि बीजेपी के मुकाबले खड़े हो सकते हैं.

कांग्रेस को उम्मीद है कि 2019 के चुनाव में जो नए समीकरण बनेंगें उससे कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ही विपक्ष के नेता के तौर पर उभरेंगें. सरकार बनने की सूरत में राहुल गांधी ही इसके अगुवा होंगें. हालांकि ये सब करना कांग्रेस के लिए इतना आसान नहीं है. लोकसभा में कांग्रेस की ताकत घटी है. जो मुकाम 2004 में कांग्रेस का था. वैसा स्थान अब नहीं है. बीजेपी की ताकत भी उस वक्त इतनी नहीं थी. जितनी अब है. कांग्रेस के लिए मुश्किल चुनाव से पूर्व गठबंधन बनाने में हो रही है. बिहार में आरजेडी और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़ कर अभी कांग्रेस के पास कोई बड़ा क्षेत्रीय साथी नहीं है. इसलिए दिल्ली की रैली से कांग्रेस ये साबित करना चाहती है कि लोगों का रुझान राहुल गांधी की तरफ बढ़ रहा है.

Dharmasthala: AICC President Rahul Gandhi offers prayers at Manjunatheshwara Temple during his state visit ahead of Karnataka Assembly elections in Dharmasthala on Friday. PTI Photo (PTI4_27_2018_000133B)

दिल्ली की रैली के लिए तैयारी

दिल्ली में रैली के लिए इस बार कमान संगठन महासचिव अशोक गहलोत के पास है. अशोक गहलोत सभी राज्य के प्रभारियों और अध्यक्षों के साथ रैली की तैयारी का अपडेट ले रहे हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि दिल्ली हरियाणा, राजस्थान और यूपी से मिलाकर कम से कम दो लाख लोगों को जुटाने में कामयाब हो जाएगी. दिल्ली कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक में भी अशोक गहलोत ने पहुंच कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने की हिदायत दी है.

दिल्ली में हर बलॉक के अध्यक्ष को सौ लोगों को लाने के लिए कहा गया है. इसके हिसाब से दिल्ली के संगठन को पच्चीस हज़ार लोगों को जुटाना है. दिल्ली के अध्यक्ष अजय माकन ने कहा है कि दिल्ली के लोग 9.30 बजे पहले आकर आगें बैठें जिससे ये पता चले कि दिल्ली के लोग रैली में है, हरियाणा के ऊपर इस रैली का दारमोदार है. हरियाणा को पचास हज़ार का टार्गेट मिला है. हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर टार्गेट मिलने के बाद से ही पूरे प्रदेश से लोगों को लाने के लिए दौड़ रहे हैं.

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अशोक तंवर का दावा है कि ‘फसल की कटाई का सीज़न होने के बाद भी टार्गेट से ज्यादा लोग हरियाणा से इस रैली में पहुंचेगें. क्योंकि राहुल गांधी को लेकर लोगों में उत्साह बढ़ रहा है. वहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में बैठक कर रहे हैं. कांग्रेस की पिछली रैली में अशोक तंवर समर्थकों और हुड्डा समर्थकों में झड़प हो गई थी. इसलिए इस बार अलग-अलग रंगों की पगड़ियां पहनने पर रोक लगा दी गई है.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi getures while exchanging greetings with party leaders at the launch of the party's nationwide "Save the Constitution" campaign at Talkatora Stadium in New Delhi on Monday. PTI Photo by Vijay Verma (PTI4_23_2018_000060B)

बार कोडिंग वाले पास

दिल्ली की इस रैली में बार कोडिंग वाले पास भी जारी किए गए है. हालांकि कहा जा रहा है कि सुरक्षा की वजह से ऐसा किया गया है, लेकिन बार कोडिंग के जरिए पार्टी ये पता लगाने की कोशिश करेगी कि किस नेता के जरिए कितने लोग रैली में पहुंचे हैं. दिल्ली में ब्लॉक अध्यक्षों की सूची इस रैली के बाद जारी की जाएगी. ये कहा जा रहा है कि रैली के बाद उन्हीं को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया जाएगा. जो अपने क्षेत्र से ज्यादा लोगों को लेकर रैली में पहुंचेगा. कांग्रेस कार्यसमिति की लिस्ट और जिन राज्यों के अध्यक्ष बदले जाने हैं वो भी रैली के बाद ही होगा. ज़ाहिर है कि कांग्रेस नहीं चाहती है कि ये रैली गुटबाजी का शिकार हो.

टीम राहुल की भी अग्नि परीक्षा

इस रैली में राहुल गांधी की टीम की भी परीक्षा होनी है. इतनी बड़ी रैली के लिए भीड़ लाना और मैनेजमेंट करना ये बड़ी चुनौती है. नए बने राज्य के प्रभारी भी राहुल गांधी के सामने अपना नंबर बढ़ाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं. इस रैली की कमान अशोक गहलोत के ऊपर है. जिनको राहुल गांधी ने संगठन की जिम्मेदारी सौंपी है. अशोक गहलोत को राजस्थान से भीड़ भी लाने की चुनौती है. क्योंकि सचिन पायलट को मात देने के लिए ये उनके लिए जरूरी है. जाहिर तौर पर टीम सोनिया के लोग ज्यादा सक्रिय नहीं दिखाई दे रहे हैं.

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