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जयराम ठाकुर की ताजपोशी के साथ हिमाचल में बदलाव के लिए तैयार बीजेपी

ऐसा लगता है कि जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाकर मोदी-शाह ने इस पहाड़ी राज्य में एक युग की समाप्ति का संकेत दिया है. यह सिर्फ मुख्यमंत्री की उम्र का सवाल नहीं है बल्कि सरकार गठन में पसंद का मसला भी है

Updated On: Dec 28, 2017 08:51 AM IST

Sanjay Singh

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जयराम ठाकुर की ताजपोशी के साथ हिमाचल में बदलाव के लिए तैयार बीजेपी

जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए हैं. इसके लिए किस्मत को जिम्मेदार माना जा सकता है. चुनाव के दौरान वो कहीं से भी नेतृत्व की दौड़ में नहीं थे. न ही उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की सार्वजनिक इच्छा व्यक्त की थी.

18 दिसंबर को जब आखिरी दौर के वोट गिने जा रहे थे तो यह तय हो गया था कि हिमाचल में बीजेपी बड़ी जीत के करीब है. लेकिन पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार रहे थे. हिमाचल के राजनीतिक हलकों में यह गुप्त सूचना लीक हो चुकी थी कि 52 साल के जयराम ठाकुर को पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली बुलाया है. जयराम मंडी क्षेत्र की सिराज सीट से पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं.

दिल्ली के बुलावे ने अटकलों को पक्का किया

हालांकि किसी को यह नहीं पता था कि ठाकुर को दिल्ली क्यों बुलाया गया है. धूमल और कई अन्य नामीचन नेताओं के चुनाव हारने के बाद बनी परिस्थितियों में इस फैसले को देखा जा रहा था. यह फैसला ठाकुर की किस्मत पलटने जैसा था. हिमाचल प्रदेश को 'देवभूमि' के नाम से जाना जाता है. यहां लोगों को नियति और भाग्य में पूरा भरोसा है. इससे पहले योगी आदित्यनाथ, मनोहर लाल खट्टर और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने के चौंकाने वाले फैसलों ने लोगों को इस निष्कर्ष पर पहुंचा दिया कि जयराम ठाकुर को सत्ता मिलने वाली है.

हालांकि पार्टी नेतृत्व को शीर्ष पद के लिए नाम की घोषणा करने में कुछ वक्त लगा. पार्टी ने तय प्रक्रियाओं का पालन किया और मुख्यमंत्री के चुनाव में छूटे हुए नेताओं को गुस्सा निकालने का समय दिया. इस दौरान यह आकलन किया जा सकता था कि गुस्से पर काबू पाने के लिए क्या दूसरे उपाय करने की जरूरत है. आखिर में पार्टी ने सबको यह जता दिया कि पहले दिन उसने जो फैसला किया था, वो अंतिम था.

शिमला के एतिहासिक रिज मैदान में शानदार शपथ ग्रहण समारोह हुआ. सभी बीजेपी शासित राज्यों में अब इसी तरह के समारोह का नियम बन चुका है.

जयराम ठाकुर 'मौका या किस्मत' के कारण 'मुख्यमंत्री' का पद ग्रहण कर चुके हैं. अब यह उन पर है कि वो अपने और पार्टी के लिए चुनौतियों को अवसरों में बदलें.

ठाकुर के शपथग्रहण समारोह में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री मौजूद रहे. (फोटो-पीटीआई)

ठाकुर के शपथग्रहण समारोह में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री मौजूद रहे. (फोटो-पीटीआई)

युवा मुख्यमंत्री के साथ बदलाव का दौर

शपथ समारोह में मौजूद हिमाचल सरकार का एक सेवानिवृत्त अधिकारी ठाकुर के नेतृत्व को लेकर आशावादी दिखा. वह पहले भी ऐसे मौकों पर मौजूद रह चुका है. उसने जो सबसे पहला बदलाव देखा, वह भारी तादाद में लोगों की मौजूदगी नहीं थी. यह पहला मौका था जब शपथ लेने के बाद मंत्रियों ने (बीजेपी सरकार में) मुख्यमंत्री या पार्टी के दूसरे नेताओं के पैर नहीं छुए.

उसने कहा, ‘ऐसा लगता है कि चरण स्पर्श की परिपाटी खत्म होना शुभ संकेत है.’ इसकी एक वजह जयराम ठाकुर का युवा होना हो सकता है. 52 साल के ठाकुर अपने कुछ मंत्रियों से उम्र में छोटे हैं, कुछ की उम्र उनके बराबर है और बाकियों से वो कुछ ही बड़े हैं. लेकिन नए मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के चरण स्पर्श भी नहीं किए.

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मुख्यमंत्री बनने के बाद ठाकुर ने कुछ घोषणाएं भी कीं. उन्होंने राज्य में 'वीआईपी कल्चर' खत्म करने की बात कही. उन्होंने 'सेवानिवृत्त और थके हुए' अधिकारियों को सेवा-विस्तार या फिर से नियुक्त नहीं करने घोषणा की. ऐसा इसलिए क्योंकि हिमाचल में सरकारी नौकरी को प्रीमियम की तरह देखा जाता है.

पहाड़ में एक युग का अंत

ऐसा लगता है कि जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाकर मोदी-शाह ने इस पहाड़ी राज्य में एक युग की समाप्ति का संकेत दिया है. यह सिर्फ मुख्यमंत्री की उम्र का सवाल नहीं है बल्कि सरकार गठन में पसंद का मसला भी है. जिन 11 मंत्रियों ने शपथ ली है, उनमें सात नए चेहरे हैं. इनमें से कोई भी पूर्व में मंत्री नहीं रहा है. शायद धूमल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा से सलाह-मशविरा किया गया हो. लेकिन स्थानीय बीजेपी नेताओं के मुताबिक ये दोनों नेता इसका दावा नहीं कर सकते कि सरकार गठन में उनकी बात मानी गई है. मोदी और शाह पार्टी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भ्रम पैदा नहीं करना चाहते कि अब शिमला में नियंत्रण किसका है.

मोदी और शाह हिमाचल में लंबे नेतृत्व की तैयारी कर रहे हैं. ठाकुर का शुरुआती प्रशिक्षण अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और आरएसएस में हुआ है. यह तय है कि वो लंबी पारी खेलने के लिए तैयार हैं. हालांकि इसके लिए उन्हें गलतियों से बचना होगा.

शपथग्रहण समारोह के बाद अपनी कैबिनेट की मीटिंग लेते हिमाचल के नए सीएम. (फोटो- पीटीआई)

शपथग्रहण समारोह के बाद अपनी कैबिनेट की मीटिंग लेते हिमाचल के नए सीएम. (फोटो- पीटीआई)

लंबी पारी के लिए तैयार जयराम

इस चुनाव में धूमल की हार पार्टी के लिए एक शुभ संकेत की तरह रही. धूमल फिलहाल 73 साल के हैं और अगले दो साल में वो 75 साल के हो जाएंगे. अगर वो जीतते और मुख्यमंत्री बनते तो अगले दो साल में वो सेवानिवृत्ति की आयु पर पहुंच जाते. पार्टी ने अलिखित रूप से रिटायरमेंट के लिए 75 साल की आयु तय की है. इसके बाद मुख्यंत्री बनने के इच्छुक नेताओं में सत्ता-संघर्ष शुरू हो जाता. ठाकुर के कुर्सी पर रहने से पार्टी लंबे वक्त के लिए योजनाएं बना सकती है.

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अब तक हिमाचल प्रदेश बीजेपी में शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल गुट का वर्चस्व था. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा तीसरे गुट की अगुवाई करते थे. शांता कुमार 83 साल के हैं, हालांकि कुछ क्षेत्रों में अब भी उनका प्रभाव है. वो सक्रिय राजनीति से लगभग रिटायर हो चुके हैं. परिस्थितियों ने धूमल को भी सेवानिवृत्ति के कगार पर ला खड़ा किया है. इन स्थितियों ने जे पी नड्डा और अनुराग ठाकुर को मजबूत कर दिया है लेकिन फिलहाल दोनों को राष्ट्रीय राजनीति पर फोकस करना होगा.

पौराणिक 'जय श्री राम' हमेशा बीजेपी-आरएसएस के हृदय के करीब रहा है. अब वास्तविक जयराम ने इस क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है.

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