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समय बदला, राय बदली: ये लालू ही थे जिन्हें बचाने वाले अध्यादेश को राहुल ने फाड़ा था

एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली के प्रेस क्लब में अचानक पहुंच कर उस अध्यादेश को ही फाड़ दिया था जो कि दागी सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को बचाने वाला था.

Updated On: Apr 30, 2018 04:57 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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समय बदला, राय बदली: ये लालू ही थे जिन्हें बचाने वाले अध्यादेश को राहुल ने फाड़ा था

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के रामलीला मैदान से कर्नाटक में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार वी एस येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार का प्रतीक बताकर बीजेपी पर हमला बोला. राहुल गांधी के निशाने पर प्रधानमंत्री मोदी थे जो येदियुरप्पा के साथ मंच साझा कर कांग्रेस की कर्नाटक सरकार पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर हमला करते हैं.

लेकिन, रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में बीजेपी को भ्रष्ट बताने वाले राहुल गांधी अगले ही दिन सुबह-सुबह दिल्ली के एम्स में आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव से मिलने पहुंच गए. लालू यादव भ्रष्टाचार के ही मामले में जेल की सजा काट रहे हैं. चारा घोटाले में दोषी ठहराने के बाद उन्हें रांची की बिरसा मुंडा जेल में रखा गया था. लेकिन, खराब सेहत को देखते हुए उन्हें पहले रांची के रिम्स और फिर दिल्ली के एम्स में शिफ्ट किया गया था.

लालू यादव के साथ सुबह-सुबह कांग्रेस अध्यक्ष की सामने आई तस्वीरों में एक गर्मजोशी दिख रही थी. भले ही लालू यादव बीमार होने के चलते बहुत उत्साहित नहीं दिख रहे हों. लेकिन, उनके साथ हाथ पकड़े राहुल गांधी की मुस्कुराहट उनके भीतर की खुशी को दिखा रही थी. लालू यादव से मिलने में कोई बुराई नहीं है. क्योंकि उनकी सेहत का हाल-चाल लेने राहुल पहुंचे थे.

लेकिन, इस मुलाकात को राजनीतिक लिहाज से ज्यादा अहम माना जा रहा है. सवाल भी उठ रहा है. यह सवाल राहुल गांधी के उस बयान पर भी है, जो एक दिन पहले ही उन्होंने दिल्ली के रामलीला मैदान से भ्रष्टाचार को लेकर दिया था.

इन तस्वीरों ने एक बार फिर से पांच साल पहले 27 सितंबर 2013 की उस तस्वीर की याद दिला दी, जब एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली के प्रेस क्लब में अचानक पहुंच कर उस अध्यादेश को ही फाड़ दिया जो कि दागी सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को बचाने वाला था.

इस अध्यादेश के फाड़े जाने के बाद ही लालू यादव को सबसे बड़ा नुकसान हुआ था और चारा घोटाले के मामले में लालू यादव सलाखों के पीछे भी गए थे. हालाकि बाद में जमानत पर वो बाहर  आ गए थे. लेकिन, सजायाफ्ता लालू 2014 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाए थे.

उस वक्त कांग्रेस में नंबर दो की हैसियत वाले राहुल गांधी की तऱफ से अध्यादेश को फाड़कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने सख्त तेवर वाली छवि को लाने की कोशिश की गई थी. अगर राहुल गांधी अध्यादेश नहीं फाड़े होते तो शायद लालू यादव जेल में रहते हुए भी चुनाव लड़ने के योग्य होते.

बाद में बिहार में बीजेपी के खिलाफ बने महागठबंधन के दौरान भी राहुल गांधी लालू यादव से दूरी और नीतीश कुमार के करीब ज्यादा दिखे थे. लेकिन, जब नीतीश कुमार ने वापस महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बना ली है, तो कांग्रेस के पास अब लालू से हाथ मिलाने के अलावा कोई चारा नहीं दिख रहा है.

पिछले साल नवंबर में राहुल गांधी ने लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी के साथ लंच किया था. उस वक्त दोनों की मुलाकात को सुधरते रिश्ते की एक झलक माना गया था. उस वक्त लगा था कि राहुल गांधी लालू की बजाए तेजस्वी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं. लेकिन, अब एम्स में हुई राहुल-लालू मुलाकात ने उस खाई को पाट दिया है.

इसे महज संयोग कहें या कुछ और, इस मुलाकात के दिन ही लालू यादव को वापस एम्स से रिम्स भेजा जा रहा है. लालू यादव ने अपनी खराब सेहत का हवाला देकर एम्स प्रशासन से बेहतर इलाज के लिए ऐसा नहीं करने की अपील भी की थी. लेकिन, उनकी अपील को ठुकराकर उन्हें वापस रांची के लिए रवाना कर दिया गया है.

हालांकि लालू यादव के एम्स में रहने के दौरान आरएलएसपी के अध्यक्ष और केंद्रीय  मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के अलावा बीजेपी नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे ने भी मुलाकात की थी.

लेकिन, अभी भी चर्चा के केंद्र में लालू यादव से राहुल गांधी की मुलाकात है. सवाल वही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बीजेपी पर हमला बोलने वाले राहुल गांधी भ्रष्टाचार के मामले में सजा काट रहे लालू यादव के साथ खड़े होकर क्या संदेश दे रहे हैं.

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