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खून पसीने से समाजवादी पार्टी बनाई लेकिन वहां मेरी उपेक्षा हुई: शिवपाल यादव

जो क़दम मैंने आगे बढ़ा लिया है, वो बढ़ गया है. आज तक मैंने जो भी काम किया है वो डंके की चोट पर किया है: शिवपाल

Updated On: Sep 03, 2018 04:38 PM IST

FP Staff

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खून पसीने से समाजवादी पार्टी बनाई लेकिन वहां मेरी उपेक्षा हुई: शिवपाल यादव
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2019 के लोकसभा चुनावों में अब बस कुछ ही महीने बाकी हैं और यूपी की जंग इन चुनावों के नजरिए से काफी अहम मानी जा रही है. अखिलेश की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ आने से यूपी में एक नई राजनीतिक ताकत सामने आई है. हालांकि सपा सरकार में मंत्री रहे और फिलहाल इटावा के जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव ने अपनी अलग पार्टी समाजवादी सेक्युलर मोर्चा की घोषणा कर महागठबंधन के लिए मुश्किलें बढ़ा दीं हैं.

शिवपाल ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी 2019 में यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही हैं. राजनीतिक हलकों में शिवपाल की बीजेपी से डील और आज़म खान की पहल पर सपा से डील की ख़बरें आ रही हैं. इन सभी मुद्दों पर शिवपाल ने न्यूज 18 से ख़ास बातचीत की...

सवाल: खबर है कि समझौते को लेकर आपकी मुलायम सिंह यादव से कोई बातचीत हुई है ? ये बातचीत आज़म खान और संजय सेठ की पहल पर हुई और नेताजी की तरफ से आपको नेता प्रतिपक्ष, संगठन में राष्ट्रीय महासचिव और आज़मगढ़ से 2019 में टिकट जैसे ऑफर दिए गए हैं ?

शिवपाल: जो क़दम मैंने आगे बढ़ा लिया है, वो बढ़ गया है. आज तक मैंने जो भी काम किया है वो डंके की चोट पर किया है. आज तक मेरी पक्षधरता या समर्पण असंदिग्ध और स्पष्ट रही है. मैंने 30 साल तक लगातार संघर्ष किया है. खून पसीने से समाजवादी पार्टी बनाई. लेकिन वहां मेरी, नेता जी और लाखों समाजवादी साथियों की उपेक्षा हो रही थी.

सवाल: आपके बीजेपी में भी जाने की ख़बरें आ रहीं हैं ? कहा जा रहा है कोई बड़ा पद ऑफ़र हुआ है ? अखिलेश ने भी आपके समाजवादी मोर्चे को बीजेपी की बी टीम बताया है ?

शिवपाल: आज के दिन तक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से कोई मीटिंग नहीं हुई है. दूसरी बात कि सभी जानते हैं कि राज्य में मेरे पास व्यापक जनाधार है, जाहिर है लोकतंत्र में ऐसे किसी भी व्यक्ति के पास राजनीतिक प्रस्ताव आते रहते हैं. हालांकि हम सेक्युलर ताकतों के साथ हैं, विकास के सही मायनों के साथ हैं. मैं भविष्य में भी कम्युनल ताकतों के साथ कोई समझौता नहीं करूंगा.

सवाल: आपकी नई पार्टी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है? इसका सीधा नुक़सान सपा-बसपा गठबंधन को होगा ? आपको नहीं लगता आप ऐसा करके बीजेपी को ही जिताने वाले हैं ?

शिवपाल: देखिए, हमारा लोकतंत्र बहुत खूबसूरत है और इसीलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने बहुदलीय व्यवस्था को अपनाया. ऐसा इसलिए भी हुआ कि विविधताओं वाले इस देश में हर रंग को सम्मान मिल सके. हाशिए पर पड़े समुदाय को भी राजनीतिक हिस्सेदारी मिल सकें. जाहिर है कि हम सभी के अपने राजनीतिक निहितार्थ होते हैं. हम सामाजिक न्याय को वर्तमान संदर्भ में नए आयाम देंगे और सभी छोटे दलों को साथ जोड़ेंगे. हमारी लड़ाई को किसी गठबंधन विशेष के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए. क्या आप चाहते हैं कि भारत में सिर्फ दो ही दल बचे रह जाएं.

सवाल: आपने ख़ुद कभी कोई संसदीय चुनाव नहीं लड़ा. 2019 में मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद या बदायूं कहां से चुनाव लड़ेंगे ?

शिवपाल: इंतजार कीजिए, आने वाले कुछ दिनों में सारी तस्वीर साफ हो जाएंगी.

सवाल: पिछले महीनों में कई बार आप अखिलेश और रामगोपाल जी साथ दिखाई दिए, अब फिर अचानक क्या हो गया ? अखिलेश से आपको शिकायत क्या है ?

शिवपाल: देखिए समाजवादी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है. बेईमानी और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा और राज्य में लगातार किसानों की उपेक्षा हो रही है. गरीबी बढ़ती जा रही है और देश में केवल 10-15 फ़ीसदी लोगों को ही लाभ मिल पाता है. सपा ने राज्य में स्थिति बिगड़ने के बावजूद भी इन मुद्दों पर कोई प्रदर्शन भी नहीं किया. इन वजहों से मुझे ये फ़ैसला लेना पड़ा. हम रहना चाहते थे पार्टी में लेकिन बहुत से लोगों को सम्मान नहीं मिल रहा था, उनकी उपेक्षा हो रही थी. बहुत इंतज़ार भी किया, प्रयास भी किया कि पार्टी में सब एक साथ रहें.

सवाल: क्या आपकी नई पार्टी नेताजी की मर्ज़ी से बनी है ? उनसे पार्टी की घोषणा से पहले कोई बात हुई थी ?

शिवपाल: नेता जी का आशीर्वाद मुझे प्राप्त है.

सवाल: अगर 2019 में नेताजी मैनपुरी से सपा के टिकट पर लड़ते हैं तो क्या आप उनके ख़िलाफ़ भी उम्मीदवार उतारेंगे ?

शिवपाल: इस पर बस मैं इतना कहूंगा कि नेता जी का आशीर्वाद मुझे प्राप्त है.

सवाल: ऐसा लग रहा है अखिलेश आपकी पार्टी की घोषणा को सीरियसली नहीं ले रहे हैं ? कल एक टीवी कार्यक्रम में भी इसी से जुड़े एक सवाल को उन्होंने हँसी में उड़ा दिया ?

शिवपाल: मैं राजनीतिक रूप से इतना परिपक्व हूं कि मुझे इसपर कुछ नहीं कहना चाहिए. इसका जवाब आने वाला वक़्त ही देगा.

सवाल: अखिलेश या नेताजी समझौते के लिए बुलाएंगे तो जाएंगे ? क्या अब समझौते की कोई संभावना बची है ?

शिवपाल: अब कदम पीछे खींचने का सवाल ही नहीं है. समाजवादी सेक्युलर मोर्चा 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

( साभार: न्यूज़ 18 के लिए अंकित फ्रांसिस )

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