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रामपुर में नवाब और शहजादे की दिलचस्प लड़ाई

लंबे समय से जीत रहे नावेद मियां को अब्दुल्ला आज़म की चुनौती

Amitesh Amitesh Updated On: Feb 10, 2017 12:35 PM IST

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रामपुर में नवाब और शहजादे की दिलचस्प लड़ाई

रुहेलखंड का रामपुर जिला पहले से ही सुर्खियों में रहा है. यहां के नवाब खानदान का दबदबा सियासत में लगातार रहा है. लेकिन, लगता है धीरे-धीरे अब नवाब खानदान की चमक फीकी होती चली जा रही है.

नवाब खानदान की बेगम नूरबानो रामपुर सीट से सांसद भी रही हैं. लेकिन, फिलहाल खानदान के पास रामपुर स्वार की ही सीट है. नूरबानो के बेटे नवाब काजिम अली खान उर्फ नावेद मियां का 1996 से यहां कब्जा है. भले ही उनका अलग-अलग पार्टियों को लेकर भरोसा बदलता रहा लेकिन जनता का भरोसा उन पर कायम रहा.

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लेकिन, इस बार नवाब के लिए अखिलेश और राहुल की दोस्ती भारी पड़ गई. कांग्रेस ने स्वार की परंपरागत सीट मंत्री आज़म ख़ान के बेटे के लिए छोड़ दी. जवाब में हाथ का दामन छोड़ अब नवाब ने भी हाथी की सवारी शुरू कर दी है.

स्वार में सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ से आज़म ख़ान के शहजादे अब्दुल्ला आज़म और बीएसपी के टिकट पर मैदान में ताल ठोक रहे नवाब काजिम अली खान के बीच मुकाबला है.

इतिहास कभी न कभी तो बदलेगा: अब्दुल्ला अाज़म

abdulla azam

स्वार में एक रैली को रवाना करते अब्दुल्ला आज़म. (फोटो: फर्स्टपोस्ट)

पहली बार चुनाव मैदान में उतरे आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म फर्स्टपोस्ट से बातचीत में कहते हैं कि ‘इतिहास कभी न कभी तो बदलेगा. इस बार जरूर बदलेगा. अगर बुराई बढ़ी है और उसके खिलाफ कोई आवाज उठाएगा तो जरूर अच्छाई जीतेगी.’

लगभग चार दशक पहले 1980 में आज़म ख़ान ने पहली बार रामपुर शहर से विधानसभा चुनाव जीता था. अब उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म का कहना है कि ‘इतिहास एक बार फिर से दोहरा रहा है, इतिहास ने 40 साल पहले करवट ली थी. नवाब पहले रामपुर से खत्म हुए थे. अब यहां से खत्म होंगे.’

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रामपुर की तरह स्वार में भी लोगों को विकास के सपने दिखाकर उनके साहबजादे इस बार नवाब को पटखनी देने की फिराक में हैं. अब्दुल्ला आज़म कहते हैं कि जनता को सब पता है, नीयत पर भरोसा है कि आज़म ख़ान साहब ने रामपुर में विकास करवाया है. आगे भी स्वार में मौका मिलेगा तो यहां भी वही करेंगे.

अब्दल्ला स्वार कस्बे में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाने के बाद जीत के दावे करते हुए टांडा के लिए रवाना हो गए.

दोनों को मिल रहा वोटरों का सपोर्ट

फल विक्रेता कौसर ख़ान

फल विक्रेता कौसर ख़ान

स्वार में ही फल का कारोबार करने वाले कौसर ख़ान का दावा है कि इस बार मुस्लिम समाज का वोट अब्दुल्ला आज़म को ही मिलेगा और ऐसे में यहां से उनकी जीत पक्की है.

हालांकि स्वार कस्बे से महज तीन किमी की दूरी पर शिवनगर गांव में लोगों की मिली जुली राय है. अभी भी यहां नवाब के पैरोकार मिल जाएंगे. गांव में ही छोटी सी दुकान चलाने वाली नसीम जहां कहते हैं कि अब तक तो नवाब को ही वोट देते आए हैं. इस बार भी उन्हीं को वोट देंगे.

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शिवनगर में मुसलमानों के अलावा जाटव समुदाय के लोग हैं. जाटव समुदाय की राजमती भी खुलकर अपनी बात कह रही हैं. राजमती के अलावा और भी दूसरे घरों की महिलाएं कहती हैं कि हम तो बहन जी के ही साथ रहेंगे मतलब वोट नवाब को ही मिलेगा.

सबके अपने-अपने दावे हैं, अपने-अपने वादे हैं. लेकिन, स्वार सीट पर रामपुर के नवाब और शहजादे की लड़ाई ने पूरे समीकरण को दिलचस्प बना दिया है.

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