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मोदी ने नोटबंदी को बनाया अच्छाई बनाम बुराई की जंग

पूरी प्रक्रिया ने न सिर्फ काले धन को उजागर किया है बल्कि काले मन वाले लोग भी सामने आ गए हैं.

Updated On: Dec 23, 2016 08:18 AM IST

Ajay Singh Ajay Singh

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मोदी ने नोटबंदी को बनाया अच्छाई बनाम बुराई की जंग

नोटबंदी पर विपक्ष के साझा हमलों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करारा जवाब दिया है. वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने विपक्ष को कोसने में किसी तरह का संकोच नहीं किया.

उन्होंने नोटबंदी के मुद्दे पर नैतिक और भावनात्मक रणनीति अपनाई. पीएम ने इसे अच्छाई और बुराई के बीच लड़ाई की तरह पेश किया.

वाराणसी एक धर्मनगरी है और मोदी को मालूम है कि वहां धार्मिक मुहावरे लोगों से संवाद स्थापित करने में कितने असरदार होते हैं. उन्होंने कहा कि नोटबंदी का विरोध करने वालों का 'काला मन' है.

पीएम का कहना था, पूरी प्रक्रिया ने न सिर्फ काले धन को उजागर किया है बल्कि काले मन वाले लोग भी सामने आ गए हैं.

'काला मन' का प्रयोग उन्होंने विपक्ष को बेनकाब करने की कोशिश के तहत किया जो उनके हिसाब से भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों से लड़ने की उनकी कोशिश में अडंगा डाल रहे हैं.

कांग्रेस को बनाया मुख्य निशाना 

आक्रामक अंदाज में मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर ताबड़तोड़ हमले किए.

राहुल का नाम तो उन्होंने नहीं लिया लेकिन प्रतीकों से ही सही ये साफ संकेत किया कि वो किसको निशाना बना रहे हैं.

पूर्वी उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली भोजपुरी का तड़का लगाकर उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक हमले किए.

अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी के बारे में मोदी को मालूम है कि भगवान का शिव का जिक्र करते ही लोग भावनात्मक तौर पर कितना जुड़ जाते हैं. इस वजह से भाषण के शुरू में ही उन्होंने शहर की महिमा का गुणगान किया.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दिए संबोधन में उन्होंने कई बार अपने कार्यों में सफलता के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद मांगा और उनका अंदाज वहां मौजूद लोगों को खूब भाया.

banaras-varanasi

वाक कला में निपुण मोदी ने आज मिले मौके का उपयोग सिर्फ हाल में बहस का मुद्दे बने राजनीतिक मसलों का जवाब देने के लिए किया.

इस मंच से उन्होंने विपक्षी दलों से मिल रही आलोचनाओं पर अपनी बात रखी और विपक्षी धार को प्रभावी तरीके से कुंद करने की कोशिश की.

बेहद सावधानी से उन्होंने कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह का नाम लिया और समझाया कि कैसे 1972 से ही वह भारत के वित्तीय नीति निर्माण में अहम भूमिका अदा करते आए हैं.

उनका कहना था, वो अपना रिपोर्ट कार्ड पढ़ रहे हैं या मेरा? मोदी ये सवाल पूछते हुए वहां मौजूद लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे थे.

मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारत में गरीबी ज्यादा होने के कारण नकदी कारोबार खत्म नहीं किया जा सकता. इस पर चुटकी लेते हुए मोदी ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है.

राहुल गांधी का उड़ाया मखौल 

पीएम ने चिदंबरम पर भी हमला बोला लेकिन लग रहा था जैसे सबसे धारदार हथियार राहुल गांधी के लिए बचा रखा हो. मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि राहुल गांधी ने बोलना शुरू कर दिया है.

अपने भाषण में उन्होंने राहुल के उस बयान का जिक्र किया जिसमें पीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत और इसके उजागर करने पर भूकंप आने की बात कही गई थी.

मोदी ने इसका मखौल उड़ाते हुए कहा कि अच्छा है लोगों को पता चल गया कि नेहरू-गांधी परिवार के उत्तराधिकारी के पैकेट में क्या था. वे नहीं बोलते तो भूकंप आ सकता था. अब बोल चुके हैं तो भूकंप का खतरा खत्म हो गया है.

rahul modi

मोदी अपने शब्दों को बेहद सावधानी से चुन रहे थे. उदाहरण के लिए उन्होंने नोटबंदी पर विपक्षी हमले को भारतीय सीमा में घुसपैठ कर रहे आतंकियों के समर्थन में पाकिस्तानी सेना की कवर फायरिंग से जोड़ दिया.

उन्होंने कहा, हमारी सेना पाकिस्तानी सेना से लड़ रही होती है और इस बीच आतंकी अंदर घुसने की ताक में होते हैं.

उन्होंने एक और कहानी बताई कि कैसे पॉकेटमारों का गैंग पुलिस को चकमा देता है और अपना काम तमाम करता है.

वैसे देखा जाए तो विपक्ष पर हमले के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग बेहद सख्त श्रेणी में आएगा लेकिन संचार या संवाद की कला में ये किसी घटना या परिस्थिति का स्पष्ट चित्रण करते हैं.

एक ही झटके में उन्होंने नोटंबदी के खिलाफ लामबंद विपक्ष को पाकिस्तानी सेना या पॉकेटमारों के गैंग से जोड़ कर पेश कर दिया. अब इसके बाद विपक्ष का हमला और तेज हो सकता है.

अगर आधे घंटे के भाषण पर गौर करें तो लगता है मोदी ने जानबूझ कर वाराणसी को चुना था. उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और वाराणसी पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम स्थान रखता है.

पीएम ने इस मौके पर कई सारी योजनाओं की भी घोषणा की जिसमें बनारस में कैंसर अस्पताल शामिल है.

इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि मोदी का तेजस्वी भाषण वहां मौजूद लोगों को अपील कर रहा था. ये असरदार राजनीतिक वक्ता के तौर पर मोदी की क्षमता का उदाहरण है.

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