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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में बीएसपी बना या बिगाड़ सकती है खेल

मैदान में कमल खिलता है या हाथ का निशान चमकता, बीएसपी का हाथी यह तय करेगा

FP Staff Updated On: Feb 09, 2017 10:12 PM IST

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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में बीएसपी बना या बिगाड़ सकती है खेल

हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के मैदान में बहुजन समाज पार्टी को हल्के में नहीं लिया जा सकता. पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने हरिद्वार में तीन सीटें जीती थी और चार पर पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी.

बीएसपी को हरिद्वार जिलें में 29 और ऊधमसिंहनगर में 21 फीसदी वोट मिले थे. पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को 12 प्रतिशत मत मिले थे. देवभूमि के मिशन 2017 के चुनाव में बीएसपी तय करेगी कांग्रेस बड़ी है या भारतीय जनता पार्टी.

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मैदानी इलाकों में कांग्रेस या बीजेपी के प्रदर्शन की चाबी बहुजन समाज पार्टी के हाथ में है. मैदान में कमल खिलता है या हाथ का निशान चमकता, बीएसपी का हाथी यह तय करेगा.

खासतौर से कांग्रेस की हार जीत बीएसपी पर बहुत हद तक निर्भर करेगी. मैदान में पिछली चुनावों की तरह यदि बहुजन समाज पार्टी अपने वोट बैंक को सेंध लगाने से बचाती है तो हरीश रावत के लिए बेहद मुश्किल होगा.

9 फरवरी को हरिद्वार के लक्सर में बीएसपी सुप्रीमो मायावती रैली हुई. उत्तराखण्ड के सियासी रण में यह बीएसपी की यह दूसरी रैली है. इससे पहले ऊधमसिंहनगर में मायावती पहले ही हुंकार भर चुकी है.

बीएसपी का सियासी समीकरण

2012 के विधानसभा चुनाव में हरिद्वार में 11 में से 3 सीटें बीएसपी ने जीती थी. अगर राज्य के पहले विधानसभा चुनाव की बात करें यानी 2002 में बीएसपी को कुल 7 सीटें मिली थीं. इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने 8 सीटें हासिल की थी.

बेशक 2012 के चुनाव में बीएसपी 3 सीटों पर ही सिमट गई लेकिन इसके बावजूद बीएसपी को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि 2012 में 20 सीटों में से 17 सीटों पर बीएसपी तीसरे स्थान पर थी.

हरिद्वार में बीएसपी को 29 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि ऊधमसिंहनगर में पार्टी को 21 फीसदी मत हासिल हुए थे. अगर इन 2 जिलों के अलावा पूरे उत्तराखण्ड की बात करें तो बसपा को 12 फीसदी से अधिक वोट मिले थे.

हरिद्वार की स्थिति

हरिद्वार जिले की बात करें तो 2012 के विधानसभा चुनाव में जिले की 11 सीटों में से बीएसपी को भगवानपुर, झबरेड़ा और मंगलौर में जीत हासिल हुई थी. ज्वालापुर, खानपुर, पिरान कलियर और लक्सर यानि 4 सीटों पर बसपा दूसरे नंबर पर रही थी.

यहां तक की मंगलौर विधानसभा पर तीनों विधानसभा चुनाव में बीएसपी का ही परचंम लहराया. हरिद्वार में पिछले चुनाव में बीएसपी को मिला 29 फीसदी वोट प्रतिशत, बढ़ता या घटता है तो परिणाम यहां चौकाने वाले होंगे.

हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के मैदान में इस बार भी बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन कांग्रेस और बीजेपी की किस्मत तय करेगा क्योंकि बीएसपी का प्रदर्शन हरीश रावत की कांग्रेस को सीधा प्रभावित करता है. बहुजन समाज पार्टी ने अगर यहां बेहतर किया तो इस का नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा.

बीएसपी का दलित मुस्लिम गठजोड़

हरिद्वार में दलित और मुस्लिम मतदाता हमेशा निर्णायक भूमिका में रहे हैं. हरीश रावत के सीएम बनने के बाद मुस्लिम और दलितों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ा है.

अब देखना होगा कि हरिद्वार में हुई मायावती की रैली अपने परंपरागत वोट बैंक को संभाल पाती है या नहीं. यदि बसपा का दलित मुस्लिम गठजोड़ चला तो कांग्रेस को भारी नुकसान होगा, वहीं बीजेपी के लिए यह थोड़ी राहत होगी.

साभार: न्यूज़ 18 हिंदी 

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