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CBI Vs CBI की लड़ाई में NSA अजित डोवाल की हुई फोन टैपिंग?

सरकार को आशंका है कि गैर-कानूनी ढंग से कई संवेदनशील नंबरों को सर्विलांस पर रखा गया था जिनमें अजित डोवाल और राकेश अस्थाना के नंबर भी शामिल हैं. यहां तक कि उनके कागजातों के आधार पर सिम कार्ड हासिल करने और मोबाइल नंबरों की क्लोनिंग की भी आशंका है

Updated On: Nov 21, 2018 11:54 AM IST

FP Staff

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CBI Vs CBI की लड़ाई में NSA अजित डोवाल की हुई फोन टैपिंग?

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो टॉप लेवल के अफसरों (आलोक वर्मा-राकेश अस्थाना) के बीच की लड़ाई में चौंका देने वाला खुलासा हुआ है. सरकार को आशंका है कि गैर-कानूनी ढंग से कई संवेदनशील नंबरों को सर्विलांस (फोन टैपिंग) पर रखा गया था. यहां तक कि उनके कागजातों के आधार पर सिम कार्ड हासिल करने और मोबाइल नंबरों की क्लोनिंग की भी आशंका है.

इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात है कि जिन नंबरों को सर्विलांस पर रखे जाने का अंदेशा है, उनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के नाम भी शामिल हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार इस तरह की आशंका तब जताई गई, जब सोमवार को कानून सचिव सुरेश चंद्र ने बताया कि वो 8 नवंबर को लंदन में नहीं थे. तबादला किए गए सीबीआई के डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया है कि चंद्रा ने कारोबारी सतीश सना (राकेश अस्थाना के खिलाफ आरोप लगाने वाले) से मुलाकात की. इस मीटिंग में आंध्र प्रदेश काडर की आईएएस अधिकारी रेखा रानी ने मदद की थी.

सिन्हा ने सना के हवाले से बताया, अस्थाना ने अपनी टीम से कहा कि रेखा रानी ने विवादास्पद कारोबारी से चंद्रा से उनके लंदन वाले नंबर पर बात करने को कहा है. इस बारे में अखबार ने कानून सचिव से बात की तो उन्होंने कहा कि इस साल जुलाई में वो केवल एक बार लंदन गए थे.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, 'किसी को शिकार बनाने (फंसाने) के लिए यह एक सुनियोजित साजिश है. आप किसी को भी फोन कॉल के आधार पर गिरफ्तार कर सकते हैं. जब तक ट्रायल शुरू नहीं होता, तब तक वो खुद को निर्दोष भी साबित नहीं कर सकता है.'

 

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