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यूपी उपचुनाव नतीजे : दूसरी पार्टियों के लिए सीख SP-BSP का गठबंधन

उत्तर प्रदेश के दो लोकसभा सीटों का उपचुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी में एक नई ऊर्जा और जोश का संचार हुआ है. उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस समेत कई पार्टियों के लिए एक मैसेज है.

Updated On: Mar 15, 2018 07:40 PM IST

FP Staff

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यूपी उपचुनाव नतीजे : दूसरी पार्टियों के लिए सीख SP-BSP का गठबंधन

उत्तर प्रदेश के दो लोकसभा सीटों का उपचुनाव जीतने के बाद समाजवादी पार्टी में एक नई ऊर्जा और जोश का संचार हुआ है. उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस समेत कई पार्टियों के लिए एक मैसेज है. बीते साल समाजवादी पार्टी और मुलायम परिवार की अंदरूनी कलह मीडिया में चर्चा का विषय बनी रही. सत्ता को लेकर चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश के बीच संघर्ष के बीच एक शख्स ऐसा भी था, जो लगभग 6 महीने से इस पूरे घटनाक्रम से बाहर था. वो शख्स कोई और नहीं, बल्कि सपा के कद्दावर नेता आज़म खान थे.

बुधवार को उपचुनाव के नतीजे घोषित हुए और बीएसपी समर्थित सपा उम्मीदवारों ने बीजेपी प्रत्याशियों को करारी शिकस्त दी. इसके तुरंत बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव विक्रमादित्य मार्ग स्थित पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे. इस दौरान यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के दाईं ओर आज़म खान बैठे दिखे.

राजनीति में कोई भी सफलता स्थायी नहीं होती और चुनावी राजनीति में इलेक्शन जीतकर ही राजनीतिक वैधता पाई जा सकती है. अगर आप चुनाव नहीं जीत सकते, तो वंशावली, प्रभावशाली भाषण देने का कौशल और यहां तक की मीडिया को मैनेज करने की कला भी आपको नेता से राजनेता नहीं बना सकती. चुनाव जीतना राजनेता बनने की कसौटी है. इस तरह से देखा जाए तो उपचुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का गठजोड़ राजनीतिक सूझबूझ की एक उम्दा मिसाल है.

यह एक ऐसी उपलब्धि है, जिससे भारत के कई नेताओं से सीख ली होगी, कांग्रेस के राहुल गांधी से लेकर डीएमके के एमके स्टालिन तक. यूपी उपचुनाव के नतीजों को देखकर वे अपनी पार्टी कैडर में और मेहनत करने के लिए प्रेरित होंगे.

यूपी उपचुनाव जीतकर अखिलेश यादव ने 2019 लोकसभा चुनाव का मिजाज भी तय कर दिया है. पिछले महीने से अखिलेश यादव अपनी पार्टी में प्रभावशाली नेतृत्व को प्रोत्साहित करने में लगे हुए थे. राम गोपाल यादव के करीबी नरेश अग्रवाल को अखिलेश ने राज्यसभा का टिकट देने से इनकार कर दिया. बाद में नरेश अग्रवाल ने बीजेपी का दामन थाम लिया. पार्टी और अंदरूनी कलह के बीच ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद शिवपाल यादव दिल्ली शिफ्ट कर सकते हैं.

अगर बात करें यूपी उपचुनाव की, तो बीएसपी और सपा के एक साथ होने ओबीसी उम्मीदवारों को मौका मिला है, जिसे आगे भी जारी रखा जाना चाहिए. गोरखपुर में निषाद पार्टी के अध्यक्ष के बेटे प्रवीण निषाद सपा के टिकट पर बीजेपी के खिलाफ चुनावी मैदान में थे. वहीं, फूलपुर में कुर्मी कैंडिडेट को उतारा गया था, जहां निर्दलीय बाहुबली और माफिया अतीक अहमद मैदान में थे. इस सीट पर भी सपा उम्मीदवार नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने 40 हजार वोटों से जीत दर्ज की.

यूपी उपचुनाव से यह साफ है कि लोकसभा चुनाव 2019 में भी गठबंधन को कैराना से जांचा-परखा जाएगा. मायावती ने अपना पहला चुनाव कैराना से ही लड़ा था. बीएसपी इस सीट से सपा के समर्थन से चुनाव लड़ सकती है.

(न्यूज़ 18 के लिए सुमित पांडे की रिपोर्ट)

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