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दीपक मिश्रा के महाभियोग प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह नहीं थे राजी

लगभग 60 सासंदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी कर दिया था. फिर एक फोन कॉल पर गांधी परिवार के एक खास करीबी से बात हुई और सबकुछ रद्द हो गया

Updated On: Apr 16, 2018 03:52 PM IST

FP Staff

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दीपक मिश्रा के महाभियोग प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह नहीं थे राजी

पहले सुप्रीम कोर्ट के चार जजों का प्रेस कॉन्फ्रेंस होता है. कई मुद्दे खड़े होते हैं. मसला होने होने के करीब पहुंचा ही था कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चा शुरू हो गई. सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे से निकली बात, संसद के गलियारों में गूंजने लगी थी. माहौल बना, लगा कि 30 सालों बाद एक बार फिर देश इस ऐतिहासिक घटना से रू-ब-रू होने जा रहा है.

यह इतना आसान नहीं था. इस अभियान को भले ही कुछ लेफ्ट के नेताओं ने लीड किया, बीच में गेंद कांग्रेस के पाले में आ गिरा. पार्टी के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल ने पार्टी के अंदर इसे पक्ष में माहौल भी बना दिया. लगभग 60 सासंदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी कर दिया था. फिर एक फोन कॉल पर गांधी परिवार के एक खास करीबी से बात हुई. सबकुछ रद्द हो गया.

ये शख्स थे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. वह कम बोलते हैं, लेकिन उनकी एक-एक बात में वजन होता है. यही वजह है कि उनके किसी भी बात को इग्नोर करना गांधी परिवार के लिए भी इतना आसान नहीं. खबरों के मुताबिक डॉ सिंह ने साफ कहा कि यह कांग्रेस पार्टी के सिद्धातों के खिलाफ है. वह हस्ताक्षर नहीं करेंगे.

कहा यह कांग्रेस की संस्कृति नहीं, विपक्षी इसका उठा ले जाएंगे फायदा 

जब पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील ने संपर्क किया तो मनमोहन सिंह ने व्यक्तिगत तौर पर उस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की संस्कृति नहीं रही है कि वह दूसरी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर प्रहार करे या उसकी गरिमा को ठोस पहुंचाए. हमें इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए कि कहीं महाभियोग प्रस्ताव का दूसरे दल राजनीतिक फायदा न उठा लें.

इसके बाद कांग्रेस ने तुरंत फैसला लिया कि इस मुहिम को यहीं रोक देना चाहिए क्योंकि अगर प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह के दस्तखत नहीं हुए तो दूसरे राजनीतिक दल खासकर बीजेपी इसका अलग मतलब निकालेगी और राजनीतिक प्रपंच करेगी.

खबर है कि मनमोहन सिंह के अलावा राज्यसभा के दो अन्य वकील सांसदों पूर्व केंद्रीय गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी व्यक्तिगत स्तर पर इस मुहिम का विरोध किया था और उस पर दस्तखत न करने का इच्छा जताई थी.

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