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यदि कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो सबसे पहले नोटबंदी घोटाले की जांच करेगी: सुरजेवाला

नोटबंदी से ठीक पहले बीजेपी और आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति पूरे देश में खरीदी

Updated On: Nov 09, 2018 07:20 PM IST

Bhasha

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यदि कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आई तो सबसे पहले नोटबंदी घोटाले की जांच करेगी: सुरजेवाला
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नोटबंदी को आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्मित 'तबाही' बताते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह सबसे पहले नोटबंदी के घोटाले की जांच कराएगी.

सुरजेवाला ने यहां संवाददाताओं से कहा, 'दो साल पहले 8 नवंबर 2016 को मोदी ने नोटबंदी को आर्थिक क्रांति का नया सूत्र बताते हुए कहा था कि इससे सारा काला धन पकड़ा जाएगा, फर्जी नोट पकड़े जाएंगे ,आतंकवाद और नक्सलवाद देश से खत्म हो जाएगा,लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. न कालाधान विदेशों से वापस आया, न फर्जी नोट पकड़े गए और न ही आतंकवाद और नक्सलवाद देश से खत्म हुआ, बल्कि और बढ़ गया.

नोटबंदी के बाद अकेले जम्मू-कश्मीर में 86 बड़े आतंकी हमले हुए, जिनमें 127 जवान शहीद हुए और 99 नागरिक मारे गए. नक्सलवाद ने तो और भी पैर पसारे. नोटबंदी के बाद फरवरी 2108 तक 1,030 नक्सली हमले हुए, जिनमें 114 जवान शहीद हुए. उन्होंने सवाल किया - तो क्या मोदी सरकार ने देश को जानबूझकर गुमराह किया?

सुरजेवाला ने कहा कि सच तो यह है कि जहां एक तरफ इस नोटबंदी ने देश के किसान, नौजवान, महिलाओं, छोटे व्यवसायी व दुकानदारों की कमर तोड़ डाली, वहीं दूसरी तरफ काले धन वालों की ऐश हो गई, इन्होंने रातों-रात अपना कालाधन सफेद बना लिया.

नोटबंदी से ठीक पहले बीजेपी और आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति पूरे देश में खरीदी

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में नोटबंदी से सीधे तौर पर 15 लाख नौकरियां गईं और देश की अर्थव्यवस्था को तीन लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. यही नहीं, बैंकों की लाइनों में 120 से अधिक लोगों की मौत हो गई. सूरत (गुजरात) से लेकर तिरुपुर (तमिलनाडु) और आसनसोल (पश्चिम बंगाल) तक सब धंधे चौपट हो गए, महिलाओं की सारी बचत लूट ली गई. क्या यह सीधे तौर पर आर्थिक आतंकवाद नहीं?

नोटबंदी को कालेधन को सफेद बनाने का एक बड़ा घोटाला बताते हुए सुरजेवाला ने दावा किया, 'नोटबंदी से ठीक पहले बीजेपी और आरएसएस ने सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति पूरे देश में खरीदी. कांग्रेस पार्टी ने बिहार में कम कीमतों पर खरीदी ऐसी आठ संपत्तियों की सूची और ओडिशा में खरीदी 18 संपत्तियों की सूची और कागजात सार्वजनिक किए थे.

क्या बीजेपी और आरएसएस को नोटबंदी के निर्णय की जानकारी पहले से थी? क्या कारण है कि बीजेपी और आरएसएस ने इतने सैकड़ों व हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति खरीदी और इसे सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया, क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए?

सुरजेवाला ने बताया कि नोटबंदी वाले दिन बीजेपी की कोलकाता इकाई के खाते में तीन करोड़ रुपए नकद जमा कराए गए. डिजिटल भुगतान की बात करने वालों ने नकद क्यों जमा किया? क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए?

नोटबंदी के इस कदम से देश में आर्थिक मंदी आ गई और बेरोजगारी बढ़ी

इसके अलावा, नोटबंदी के ठीक पहले सितंबर 2016 में बैंकों में यकायक 5,88,600 करोड़ रुपए अतिरिक्त जमा हुए. इसमें से तीन लाख करोड़ एफ डी में मात्र 15 दिन (एक सितंबर 2016 से 15 सितंबर 2016 के बीच) में जमा हुए. क्या इससे साबित नहीं होता कि नोटबंदी की पहले से जानकारी दे दी गई थी? क्या कारण है कि 5,88,600 करोड़ रुपए जमा कराने वाले किसी व्यक्ति की जांच नहीं हुई?

पूरे देश में बीजेपी शासित प्रदेशों में जिला को-आपरेटिव बैंकों में 14,293.71 करोड़ रुपए के पुराने नोट जमा हुए, जो देश में को-आपरेटिव बैंकों में जमा पुराने नोटों का 65 प्रतिशत है. क्या इसकी कभी जांच हुई?

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के इस कदम से देश में आर्थिक मंदी आ गई और बेरोजगारी बढ़ी.

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