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अमानतुल्लाह हटे तो 'आप' से छिटकेंगे मुस्लिम वोटर!

अमानतुल्लाह ने दिल्ली के मुसलमान वोटरों में पिछले दो सालों में अच्छी पैठ बनाई है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: May 03, 2017 10:53 PM IST

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अमानतुल्लाह हटे तो 'आप' से छिटकेंगे मुस्लिम वोटर!

आम आदमी पार्टी के अंदर पिछले चार-पांच दिनों से चल रहे ड्रामे का द-एंड होता दिख रहा है. आम आदमी पार्टी के ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. कुमार विश्वास के खिलाफ बयानबाजी करना उनके लिए पार्टी से निलंबन का कारण बन गया.

पिछले पांच दिनों से पार्टी में अमानतुल्लाह खान को लेकर कलह चरम पर पहुंच गया था. पार्टी में मचे घमासान के बीच सुलह के रास्ते भी निकाले जा रहे थे. नेताओं के मिलने-मिलाने के दौर के बीच शह और मात का खेल भी चल रहा था.

इस शह और मात में फिलहाल बाजी कुमार विश्वास ने मार ली है.

पिछले कुछ दिनों से अमानतुल्लाह खान को लेकर आम आदमी पार्टी दो गुटों में बंटी नजर आ रही थी. कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के बीच तल्खी भी काफी बढ़ गई थी. हालांकि, अरविंद केजरीवाल ने कभी भी खुलकर कुमार विश्वास पर तल्ख बयानबाजी नहीं की. पर, मनीष सिसोदिया पिछले दो दिनों से खुलकर कुमार विश्वास के खिलाफ बोलने लगे थे. पिछले दिनों हुए छह राज्यों के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी थी. जिसके बाद से पार्टी के अंदर बगावत के स्वर तेज होने लगे थे.

जानकार यह मान रहे हैं कि पार्टी की लगातार हो रही हार के बाद पार्टी पर अरविंद केजरीवाल की पकड़ कमजोर हो गई है. अमानतुल्लाह खान मामले में कुमार विश्वास के सामने अरविंद केजरीवाल का झुकना इस बात की तस्दीक भी कर रहा है.

मुस्लिमों में अमानतुल्लाह ने बनाई पैठ

AMANATULLAH

अमानतुल्लाह की फेसबुक वॉल से साभार

अमानतुल्लाह खान को आप से निकालना पार्टी के लिए भारी भी पड़ सकता है. दिल्ली में पिछले दो विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने मुसलमानों के बीच अच्छी पैठ बना ली थी.

ओखला विधानसभा सीट सालों से कांग्रेस का गढ़ रही है. कांग्रेस के इस गढ़ में आप ने अमानतुल्लाह खान के जरिए सेंध लगाई. लेकिन, ताजा प्रकरण में बाद अरविंद केजरीवाल ने इस मुस्लिम वोटबैंक के समीकरण को दरकिनार करते हुए कुमार विश्वास को अधिक तव्वजो दी है.

इसका खामियाजा आने वाले चुनाव में पार्टी को भुगतना पड़ सकता है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने राजनीतिक करियर में पहली बार बैकफुट पर बैटिंग करने को मजबूर हो गए हैं. पार्टी की डोर पर कहीं न कहीं अरविंद केजरीवाल की पकड़ कमजोर पड़ने लगी है.

एक तरफ अरविंद केजरीवाल ट्वीट कर कुमार विश्वास से सुलह की कोशिश में लगे हुए थे तो दूसरी तरफ पार्टी के अंदर जोर-आजमाइश का दौर भी चल रहा था. दोनों खेमों के नेताओं के द्वारा पर्दे के पीछे अपना दम दिखाने का काम चल रहा था.

दरअसल पूरा विवाद अमानतुल्लाह खान द्वारा कुमार विश्वास को बीजेपी और आरएसएस का एजेंट बताने के बाद शुरू हुआ. जिसके बाद से कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के बीच तल्खी कुछ ज्यादा बढ़ गई थी. कुमार विश्वास चाहते थे कि अमानतुल्लाह खान को पार्टी से निकाल दिया जाए जबकि, अरविंद केजरीवाल सहित कुछ नेता इसके खिलाफ थे.

कुमार विश्वास का गुस्सा कम करने के लिए अमानतुल्लाह को पार्टी की पीएसी से हटा दिया गया था. लेकिन, इस्तीफा देने के बाद अमानतुल्लाह खान ने फिर से कुमार विश्वास पर हमला बोल दिया. जिससे मामला सुलझने के बजाए और उलझ गया था.

आम आदमी पार्टी के लगभग 40 विधायक कुमार विश्वास के समर्थन में अरविंद केजरीवाल को खत लिख चुके थे. इन विधायकों ने खत में अमानतुल्लाह खान पर कार्रवाई की मांग की थी.

आम आदमी पार्टी के सूत्र कहते हैं कि कुमार विश्वास को इस बात के लिए मनाया जा रहा था कि अमानतुल्लाह खान अगर सार्वजनिक मंच से कुमार विश्वास से माफी मांग लें तो मामला रफा-दफा किया जाए. पर, कुमार विश्वास निकालने से कम पर राजी नहीं थे.

अमानतुल्लाह खान को पार्टी से बाहर निकालने को लेकर पार्टी दो गुटों में बंट गई थी. एक गुट जिसकी अगुवाई मनीष सिसोदिया कर रहे थे, उनका मानना था कि अमानतुल्लाह खान को पार्टी से निकालना फायदे का सौदा साबित नहीं होगा. पार्टी अगर अमानतुल्लाह खान पर कोई कार्रवाई करती है तो मुस्लिम वोटबैंक आप के हाथों से खिसक सकता है.

ऐसा माना जा रहा है कि अमानतुल्लाह खान के साथ खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अलावा उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, दिलिप पांडे और आशुतोष खड़े थे.

अमानतुल्लाह खान को लेकर पार्टी में दूसरा तबका भी सामने आ गया. जो खुलकर अमानतुल्लाह खान को बाहर का रास्ता दिखाने की बात पर अड़ा हुआ था. पार्टी के आधे से अधिक विधायकों और कुछ मंत्रियों ने अमानतुल्लाह खान को गद्दार बता रहे थे.

दिल्ली सरकार के जल मंत्री कपिल मिश्रा का कहा कि अमानतुल्लाह खान को हर हालत में पार्टी से निकाल कर ही दम लेंगे. हमलोगों ने अरविंद केजरीवाल को 40 विधायकों का खत लेकर अमानतुल्लाह खान को पार्टी से निकालने के लिए कहा है.

कांग्रेस को हो सकता है फायदा?

Rahul Gandhi

पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि अमानतुल्लाह खान को पार्टी से निकालने का बड़ा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है. कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने के लिए मुस्लिम समुदाय में मुहिम छेड़ सकती है. दिल्ली में मुस्लिम समुदाय की अच्छी खासी आबादी है.

आप से पहले दिल्ली के मुसलमान कांग्रेस के परंपरागत वोटबैंक रह चुके हैं. जो हाल के कुछ चुनावों में आप के तरफ चले गए. अरविंद केजरीवाल और आप के नेताओं को लग रहा है कि अमानतुल्लाह खान पर हुई कार्रवाई से मुस्लिम वोटबैंक अपने हाथ से छिटक सकता है.

अमानतुल्लाह खान पिछले साल भी मीडिया में छाए हुए थे. पिछले साल अमानतुल्लाह खान तब चर्चा में आए थे जब उन्हीं की साले की पत्नी ने उनके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी.

उस समय अमानतुल्लाह खान ने कहा था कि वक्फ बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की सजा हमे दी जा रही है. वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार के मामले की बात को लेकर अमानतुल्लाह खान ने दिल्ली सरकार से वक्फ बोर्ड के सभी पदों से मुक्त किए जाने की अपील की थी.

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