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'कलामवाद' के जरिए राजनीति में उतर रहे कमल हासन कितना कामयाब होंगे?

कई लोगों का मानना है कि कमल हासन डॉ. अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास इसके अलावा कोई और यूथ आइकन नहीं है

T S Sudhir Updated On: Feb 21, 2018 12:20 PM IST

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'कलामवाद' के जरिए राजनीति में उतर रहे कमल हासन कितना कामयाब होंगे?

दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपर स्टार कमल हासन तमिलनाडु की राजनीति में एंट्री के लिए तैयार हैं. कमल हासन की सियासी पारी के श्रीगणेश के लिए रामेश्वरम और मदुरै में सेट सज चुके हैं. सब कुछ फिल्मी स्टाइल में हो रहा है. यह अवसर कमल हासन के लिए लाइट्स, कैमरा, एक्शन का पल है.

बतौर अभिनेता और फिल्मकार कमल हासन का स्टाइल बाकी लोगों से अलग माना जाता है. उनकी अभिनय शैली, फिल्मों में स्टोरी ट्रीटमेंट और संगीत का चुनाव सबसे जुदा होता है. उम्मीद है कि तमिलनाडु के राजनीतिक थिएटर के लिए भी कमल हासन अलग अंदाज की स्क्रिप्ट पेश करेंगे.

अरसे तक तमिलनाडु के शहरों, कस्बों और गांवों की दीवारें जयललिता, करुणानिधि और स्टालिन के दमकते चेहरों वाले पोस्टरों से अटी रही हैं. वहीं हाल के महीनों में पनीरसेल्वम, पलानीस्वामी और दिनाकरन के पोस्टर दीवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं. लेकिन फरवरी महीने से राज्य में यह नजारा बदल सकता है. दीवारों पर लगे पुराने पोस्टरों की जगह नए सियासी स्टार के पोस्टर ले सकते हैं. क्योंकि तमिलनाडु के सियासी बॉक्स ऑफिस पर कमल हासन स्टारर जो शाहकार रिलीज को तैयार है उसका नाम 'कलाम' हो सकता है.

कमल हासन अपनी राजनीतिक पार्टी के नाम और विचारधारा का ऐलान मदुरै में करेंगे. लेकिन उससे पहले वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जन्मस्थली रामेश्वरम का दौरा करेंगे. रामेश्वरम न सिर्फ दिवंगत कलाम साहब का जन्मस्थान है बल्कि उनकी अंतिम आरामगाह भी है.

ए पी जे अब्दुल कलाम भारत के राष्ट्रपति थे

डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम जुलाई 2002 से जुलाई 2007 तक भारत के राष्ट्रपति थे

देश और तमिलनाडु के प्रति उनकी विचारधारा कलाम साहब जैसी ही

कमल हासन अपने सियासी सफर का आगाज रामेश्वरम से कर के यह जताना चाहते हैं कि वह कलाम साहब से प्रभावित हैं. वह यह संदेश देना चाहते हैं कि देश और तमिलनाडु के प्रति उनकी विचारधारा वही है जो कलाम साहब की हुआ करती थी. यानी कमल हासन यह बताना चाहते हैं कि उनके और कलाम साहब के सिर्फ नाम ही समान ध्वनि वाले नहीं हैं बल्कि वह व्यवहार से भी कलामवादी हैं. वैसे कमल हासन और कलाम साहब के बीच एक संबंध भी रहा है. कमल हासन की पैदाइश और परवरिश रामनाथपुरम जिले के परमकुडी कस्बे में हुई थी, वहीं अब्दुल कलाम ने रामनाथपुरम में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी.

मदुरै और रामेश्वरम में हर ओर कमल हासन के पोस्टर नजर आ रहे हैं. सभी पोस्टरों में ऐसा दर्शाया गया है कि कलाम साहब के सपनों और आकांक्षाओं को कमल हासन पूरा करेंगे. वहीं समर्थकों को उम्मीद है कि मदुरै में जब कमल हासन जनसभा को संबोधित करेंगे तब वह कलाम साहब की विचारधारा को नए कलेवर के साथ पेश करेंगे.

कलाम साहब को युवाओं के साथ बातचीत और मेल-मिलाप करना बेहद पसंद था. वास्तव में, वर्ष 2015 में उनका निधन भी उस वक्त हुआ जब वह आईआईएम शिलांग में छात्रों को संबोधित कर रहे थे. लिहाजा कलाम साहब से प्रेरणा लेकर कमल की उस सरकारी स्कूल में जाने की योजना है जहां महान वैज्ञानिक ने पढ़ाई की थी. हालांकि तमिलनाडु के दक्षिणपंथी धार्मिक और सांस्कृतिक संगठन हिंदू मुन्नानी ने कमल की इस पर ऐतराज जताया है. हिंदू मुन्नानी का कहना है कि नेताओं और अभिनेताओं को अपने विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए किसी स्कूल के उपयोग की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए.

अभिनेता कमल हासन रामेश्वरम और मदुरै से अपनी राजनीति शुरू कर रहे हैं

अभिनेता कमल हासन रामेश्वरम और मदुरै से अपनी राजनीति शुरू कर रहे हैं

रामेश्वरम में एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन का संचालन शेख़ सलीम करते हैं. वह कलाम साहब के सगे भाई के पोते हैं. शेख़ सलीम बीजेपी नेशनल काउंसिल के सदस्य भी हैं. उन्हें शहर में लगे कलाम साहब के पोस्टरों पर कोई ऐतराज नहीं है. कमल हासन ने जनवरी में कलाम साहब के परिवार से संपर्क किया था और उन्हें सूचित किया था कि वह रामेश्वरम में पूर्व राष्ट्रपति के निवास से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करना चाहते हैं.

तमिलनाडु को लेकर कमल हासन के सपने अब्दुल कलाम के सपने जैसे 

शेख़ सलीम ने कहा कि 'मैंने भी चेन्नई में कमल हासन से मुलाकात की थी. उस वक्त उन्होंने बताया था कि तमिलनाडु को लेकर उनके सपने बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे डॉ. अब्दुल कलाम के सपने भारत के लिए थे. कमल ने यह भी बताया था कि एक बार उन्होंने डॉ. कलाम के साथ हवाई यात्रा की थी, तब उनके बीच लंबी बातचीत हुई थी. इसलिए जैसे डॉ. कलाम ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया, अगर कमल हासन भी उनसे प्रेरणा लेना चाहते हैं तो हमें कोई समस्या नहीं है.'

कलाम साहब के परिवार को भले ही कोई समस्या न हो लेकिन कमल हासन ने अपने सियासी सफर के आगाज के लिए रामेश्वरम जिले का चुनाव कर के कई लोगों को खफा कर दिया है. बड़ी तादाद में स्थानीय लोगों का मानना है कि कलाम साहब का मुखौटा पहनकर कमल हासन अपने राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रहे हैं. रिटायर्ड नौकरशाह एमजी देवासहायम को लगता है कि यह कलाम साहब के व्यक्तित्व को भुनाने की कोशिश है, क्योंकि कमल हासन के पास उनके अलावा कोई और यूथ आइकन नहीं है.

देवासहायम के मुताबिक, 'कलाम साहब के प्रति यह आकर्षण तात्कालिक और अस्थायी तौर पर प्रचार पाने के लिए है. जबकि कलाम साहब को जनप्रिय राष्ट्रपति के रूप में जाना जाता था. अब देखना यह होगा कि कमल हासन लोगों को कितना आकर्षित कर पाते हैं. वैसे अल्पसंख्यकों के बीच भी कमल का कलाम कार्ड खास चलने वाला नहीं है क्योंकि वह धर्मपरायण मुस्लिम नहीं थे.'

APJ abdul kalam

दिवंगत ए पी जे अब्दुल कलाम को उनके जन्मस्थान रामेश्वरम में ही दफनाया गया है

पोस्टरों में कमल हासन को मसीहा की तरह पेश किया गया है. यानी बतौर नेता कमल का आगमन एक ऐसे शख्स के रूप में हो रहा है जिसके विचार तमिलनाडु का कायाकल्प कर देंगे. हालांकि फिल्म समीक्षक एल रविचंदर का मानना है कि राजनीति में हवाई एंट्री करने से भविष्य डावांडोल रहता है.

रविचंदर के मुताबिक, 'कमल और कलाम की तुलना लोगों की राजनीतिक सूझ-बूझ में कमी को दर्शाती है, क्योंकि सार्वजनिक जीवन में कलाम साहब नेता नहीं थे. उन्होंने हमेशा अपने पद की गरिमा बनाए रखी.'

कमल हासन के 'कलामवाद' से एक फिल्म निर्माता काफी प्रभावित

तमिलनाडु में डॉ. अब्दुल कलाम की विरासत को हथियाने का प्रयास कर रहे कमल हासन से एक फिल्म निर्माता काफी प्रेरित नजर आ रहे हैं. एलनगोवन नाम के यह फिल्म निर्माता मार्च में अपनी पहली फिल्म पर काम शुरू करेंगे.

फिल्म की कहानी एक ऐसे युवा शख्स पर आधारित होगी जो फिल्म निर्देशक बनना चाहता है. फिल्म में निर्देशक का यह चरित्र चाहता है कि अब्दुल कलाम का रोल रजनीकांत अदा करें. इसलिए दक्षिण तमिलनाडु में कमल हासन जहां कलाम के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं चेन्नई कलाम के रूप में रजनीकांत के पोस्टरों से अटा पड़ा है.

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