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हिमाचल चुनाव 2017: क्या शिमला ग्रामीण में विक्रमादित्य सिंह दोहरा पाएंगे पिता वीरभद्र का इतिहास

कांग्रेस के विक्रमादित्य सिंह के सामने बीजेपी ने प्रोफेसर प्रमोद शर्मा को मैदान में उतारा है

Updated On: Oct 30, 2017 10:01 PM IST

FP Staff

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हिमाचल चुनाव 2017: क्या शिमला ग्रामीण में विक्रमादित्य सिंह दोहरा पाएंगे पिता वीरभद्र का इतिहास

शिमला ग्रामीण सीट पिछली बार की तरह इस तरह बार भी काफी प्रतिष्ठित सीट मानी जा रही है. पिछली बार वीरभद्र सिंह खुद यहां से चुनाव लड़ रहे थे, इस वजह से यह सीट चर्चा में थी. इस बार वीरभद्र सिंह भले ही यहां से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन फिर भी उनकी साख इस बार फिर शिमला ग्रामीण सीट पर दांव पर लगी है. इसकी मुख्य वजह है कि उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं.

वीरभद्र सिंह ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने से पहले ही ऐलान कर दिया था कि इस बार शिमला ग्रामीण से उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. इस ऐलान की वजह से कांग्रेस को ‘एक परिवार को एक सीट’ की नीति बदलनी भी पड़ी.

शिमला ग्रामीण सीट 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई है. 2012 में वीरभद्र सिंह ने भारी जीत हासिल की थी. उन्हें कुल पड़े वोटों में से लगभग 71 फीसदी वोट मिले थे और उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार ईश्वर रोहल को 20 हजार वोटों से करारी मात दी.

युवा बनाम प्रोफेसर 

वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह पर जीत के साथ-साथ पिता के इतिहास को दोहराने का भी दबाव होगा. विक्रमादित्य सिंह पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. विक्रमादित्य सिंह वैसे मुख्य राजनीति के लिहाज से काफी नए हैं लेकिन वे हिमाचल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष थे. चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने अब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. विक्रमादित्य सिंह इस बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों में सबसे अमीर भी हैं. चुनाव आयोग में की गई घोषणा के अनुसार उनके पास करीब 84 करोड़ की संपत्ति है.

विक्रमादित्य सिंह के सामने बीजेपी ने प्रोफेसर प्रमोद शर्मा को मैदान में उतारा है. प्रमोद शर्मा इस इलाके के जाने-माने शिक्षाविद् हैं. प्रमोद शर्मा एक वक्त वीरभद्र सिंह के करीबी थे. शर्मा हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में प्रोफेसर हैं.

राजनीति में प्रमोद शर्मा नए नहीं हैं. वे एक वक्त कांग्रेस के काफी करीब रह चुके हैं. वे राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के प्रवक्ता भी रह चुके हैं. यही नहीं वे 2003, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव भी ठियोग और कुमारसेन सुन्नी क्षेत्र से लड़ चुके हैं. 2012 में वे तृणमूल कांग्रेस के हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

शिक्षा-क्षेत्र में प्रमोद शर्मा का देश-विदेश में काफी नाम है. शिक्षा के क्षेत्र में आने से पहले वे हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा में अधिकारी थे.

प्रमोद शर्मा और विक्रमादित्य सिंह दोनों ने कभी विधानसभा का मुंह नहीं देखा है लेकिन प्रमोद शर्मा का अनुभव जरूर विक्रमादित्य सिंह के लिए खतरा पैदा कर सकता है. दूसरी तरफ विक्रमादित्य सिंह के ऊपर पिता वीरभद्र सिंह की विरासत को संभालने के दम को दिखाने का भी दबाव है.

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