S M L

हिमाचल चुनाव 2017: अगर भारी जीत नहीं मिली तो बीजेपी की साख पर उठेंगे सवाल

पार्टी ने पहली बार केंद्रीय नेताओं की भारी भरकम फौज हिमाचल में प्रचार के लिए झोंक दी है

Updated On: Nov 07, 2017 03:55 PM IST

Matul Saxena

0
हिमाचल चुनाव 2017: अगर भारी जीत नहीं मिली तो बीजेपी की साख पर उठेंगे सवाल

हिमाचल प्रदेश की तेरहवीं विधानसभा के चुनाव प्रचार में भारतीय जनता पार्टी की मेहनत यदि पूरी तरह सफल नहीं हुई तो पार्टी की साख को नि:संदेह गहरा धक्का पहुंचेगा जिसका दूरगामी परिणाम पार्टी की कारगुजारी पर पड़ सकता है.

पार्टी ने पहली बार केंद्रीय नेताओं की भारी भरकम फौज हिमाचल में प्रचार के लिए झोंक दी है. प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी स्वयं इन चुनावों की देख-रेख के लिए प्रदेश में कई दिनों तक प्रवास पर रही. इसके इलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथसिंह, स्मृति ईरानी, थावरचंद गहलोत, उतराखंड और उतरप्रदेश के मुख्य मंत्री बीजेपी के चुनाव प्रचार में आकर्षण का केंद्र रहे.

ये भी पढ़ें: हिमाचल चुनाव 2017: सी वोटर के सर्वे में बीजेपी की जबरदस्त जीत की भविष्यवाणी

मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार समाप्त हो जाने के बाद बाहर से आए सभी नेताओं को हिमाचल छोड़ना पड़ेगा यहां तक कि हिमाचल छोड़ने की सूचना पुलिस को भी देनी पड़ेगी. भारतीय जनता पार्टी ने इन विधानसभा चुनावों में अपनी जितनी शक्ति झोंकी है उसे देखते काफी हद तक पार्टी मजबूत स्थिति में लग रही है.

Amit Shah and Narendra Modi in Ahmedabad

प्रतीकात्मक तस्वीर

इस शक्ति को देख कर ही कांग्रेस के कद्दावर नेता आनंद शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी से इस भारी भरकम प्रचार के लिए खर्च होने वाले धन के स्रोत की जानकारी मांगी है. सोशल मीडिया सहित जितने भी सूचना प्रसार के साधन हैं, उनमे प्रदेश में बीजेपी के बहुमत की घोषणा की जा रही है. प्रदेश के पिछले चुनावों के परिणाम यदि देखे जाएं तो प्रदेश में हर बार सत्ता परिवर्तन होता रहा है. एक चुनाव में यदि कांग्रेस पार्टी बहुमत में आती है तो दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी.

इस क्रम में वैसे भी अब बीजेपी की बारी है. एक ही संशय बीजेपी को हताश कर रहा है यदि कहीं सारे ओपिनियन सर्वे और आकलन बीजेपी के आशानुरूप नहीं निकले तो क्या होगा? हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है भारतीय जनता पार्टी के प्रचार की कमान सीधे प्रधानमंत्री और केंद्रीय पार्टी अध्यक्ष ने संभाली हो.

वास्तव में हिमाचल में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर बीजेपी ने जोखिम भी उठाया है. पार्टी की इस घोषणा को हिमाचल प्रदेश के मतदाता कैसे लेंगे यह रहस्य चुनाव परिणाम तक बना रहेगा .

हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए आरएसएस वर्कर और भारतीय जनता पार्टी की अन्य सहयोगी संस्थाएं प्रदेश में पूरे जोरों पर कार्य करती रहीं.

ये भी पढ़ें: हिमाचल प्रदेश से क्यों दूरी बनाए हैं कांग्रेस के स्टार प्रचारक

प्रदेश के 7,521 मतदान केंद्रों के प्रबंधन का जिम्मा बीजेपी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को सौंपा गया है. इन मतदान केंद्रों में से 598 शहरी और 6,923 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. स्थिति का सही आकलन तो 18 दिसंबर को परिणाम घोषित होने पर ही किया जा सकेगा इतना तय है भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी कांगड़ा और चम्बा में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आशावान हैं जबकि शिमला, सोलन, सिरमौर में कांग्रेस के प्रत्याशियों की बांछें खिली हुई हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi