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क्या हिमाचल प्रदेश की तस्वीर बदल देगा भारी मतदान?

हिमाचल प्रदेश चुनाव में 74 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान काउंटिंग के बाद तस्वीर बदलने के लिए काफी है

Updated On: Nov 10, 2017 09:37 PM IST

Matul Saxena

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क्या हिमाचल प्रदेश की तस्वीर बदल देगा भारी मतदान?

हिमाचल प्रदेश में गुरुवार को समाप्त हुए विधानसभा चुनावों में भारी मतदान ने प्रमुख राजनीतिक दलों की नींद गायब कर दी है. भारतीय जनता पार्टी इसे सत्ता-विरोधी जनमत मान कर अपनी पीठ थपथपा रही है वहीं कांग्रेस के स्टार-प्रचारक वीरभद्र सिंह विपक्ष के इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं.

प्रदेश के बहुत से मतदान केंद्रों में शाम सात बजे तक मतदान चलता रहा. प्रदेश के 12 जिलों में भिन्न मतदान प्रतिशत रहा. सिरमौर जिले में सर्वाधिक मतदान 82 प्रतिशत हुआ और सबसे कम मतदान (69.5 प्रतिशत) हमीरपुर में हुआ. हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2003 के बाद यह सर्वाधिक मतदान है.

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा में जहां 15 विधान सभा सीटें कुल मतदान 72.47 प्रतिशत हुआ, महिलाओं ने पुरुषों की अपेक्षा मतदान में अधिक संख्या में भाग लिया.

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बीजेपी और कांग्रेस की जहां जिले में कांटे की टक्कर है वहां 70-76 प्रतिशत तक मतदान हुआ. पालमपुर जैसी सीट पर जहां बीजेपी के बागी उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं, मतदान 71.92 प्रतिशत हुआ. इसी प्रकार फतेहपुर में जहां राजन सुशांत जैसे बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं मतदान 72 प्रतिशत हुआ.

dhumal virbhadra

प्रेम कुमार धूमल-वीरभद्र सिंह

इन सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस में कड़ा मुकाबला है. कांगड़ा जिले की इन सीटों के मतदान प्रतिशत को देखते हुए कुछ भी कह पाना मुश्किल है. सिरमौर जिले जहां सर्वाधिक मतदान 80.43 प्रतिशत हुआ, रेणुका जी को छोड़ कर अन्य सभी चार सीटों पर 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ. शिमला शहरी सीट पर जहां कांग्रेस का बागी उम्मीदवार मैदान में है, 65 प्रतिशत मतदान हुआ. प्रदेश की हॉट सीटों अर्की, सुजानपुर, जोगिंद्र नगर, पालमपुर, शिमला(ग्रामीण), दरंग, नगरोटा बगवां, हरोली, धर्मशाला, मंडी सदर के चुनाव परिणाम अप्रत्याशित होंगे.

अब जब पारंपरिक रूप से भारी मतदान का अर्थ सत्ता-परिवर्तन से लिया जाता है या फिर सत्ताधारी पार्टी को पुनः स्थापित करने के लिए दिए जाने वाले संकेत के रूप में लिया जाता है तो हिमाचल जैसे राजनीतिक रूप से शांत प्रदेश में यह दोनों ही मापदंड इस बार मतदाताओं के गले नहीँ उतर रहे. दरसअल प्रदेश के जिन जिलों में बीजेपी का वर्चस्व है उन जिलों में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ.

वास्तव में प्रदेश की कुछ एक ऐसी विधान सभा सीटें हैं जहां कांग्रेस लगभग हर चुनावों में विजय हासिल करती है. इन सीटों पर यदि बीजेपी का उम्मीदवार सशक्त है तो मतदान का प्रतिशत बढ़ जाता है और यदि कांग्रेस का उम्मीदवार सशक्त है तो जीत-हार का अंतर और बढ़ जाता है.

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इस बार भी कांग्रेस की झोली इन सीटों से आबाद होगी. उधर दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने टिकट वितरण में उम्मीद से अधिक फेर बदल कर पार्टी की भारी जीत को संदेहास्पद बना दिया. प्रदेश की बहुत सी ऐसी सीटें हैं जहां मतदाताओ की संख्या अन्य विधानसभा सीटों की तुलना में कम है लेकिन निर्दलीय सशक्त प्रत्याशी चुनावी समीकरण बिगाड़ रहे हैं.

A POLICEWOMAN SHOWS A VOTER HOW TO USE AN ELECTRONIC VOTING MACHINE INSHIMLA.

प्रदेश के बड़े जिले कांगड़ा और मंडी में दोनों राजनीतिक दलों की स्थिति भिन्न है. कांगड़ा में यदि बीजेपी का वर्चस्व है तो मंडी जिले में कांग्रेस की बढ़त है. अब इस स्थिति में मतदान के प्रतिशत के मद्देनजर चुनाव परिणाम का अंदाज़ा लगाना बेमानी है. सच तो यह है जिस भी पार्टी को कांगड़ा जिला अधिक सीटें देगा, सत्ता की अधिक दावेदार वही पार्टी बनेगी चाहे प्रदेश का मतदान प्रतिशत कितना भी अधिक क्यों न हो.

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