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हिमाचल प्रदेश से क्यों दूरी बनाए हैं कांग्रेस के स्टार प्रचारक

वीरभद्र को अकेला पाकर बीजेपी ने घेर तो लिया है मगर क्या ये जीत में बदल पाएगा

vipin pubby Updated On: Nov 06, 2017 01:32 PM IST

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हिमाचल प्रदेश से क्यों दूरी बनाए हैं कांग्रेस के स्टार प्रचारक

हिमाचल प्रदेश में अपने पूर्व अवतार से लेकर अब तक की बीजेपी और कांग्रेस के बीच नियमित रूप से सत्ता की अदला-बदली होती रही है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री वीरभद्र को अकेला तलवार भांजता देख कर ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस यह लड़ाई पहले ही हार चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के बड़े नेता पार्टी का चुनाव प्रचार अभियान चला रहे हैं और उन्हें जनता की गर्मजोशी भरी प्रतिक्रिया मिल रही है.

उनके सामने छह बार मुख्यमंत्री रह चुके 83 साल के वीरभद्र सिंह अपनी पार्टी के अकेले स्टार प्रचारक हैं. यहां तक कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी, जिन्होंने गुजरात पर ध्यान केंद्रित कर रखा है, इस पहाड़ी प्रदेश से दूरी बना रखी है. चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिनों में उनका यहां चंद रैलियां करने का कार्यक्रम है.

इसकी तुलना में मोदी को देखें तो वह करीब आधा दर्जन चुनावी रैलियां कर चुके हैं  और वह अपने लिए निर्धारित रैलियों से ज्यादा रैलियां करने का फैसला ले चुके हैं. चुनाव की घोषणा होने से पहले भी उन्होंने राज्य का दौरा किया था और शिमला के ऐतिहासिक रिज पर एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था. राज्य में बीजेपी के अन्य स्टार प्रचारकों में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और क्षेत्र के कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं.

मजेदार बात है कि हिमाचल में चुनाव ड्यूटी पर लगाए गए कुछ कांग्रेस नेता, शिमला में अपने होटलों के कमरों से बाहर ही नहीं निकले. एक वरिष्ठ पूर्व मंत्री ने निजी बातचीत में कहा, “चुनाव रैली में जाने का फायदा ही क्या अगर वहां सुनने वाले चंद लोग ही हों?”

वीरभद्र अकेले ही कर रहे हैं प्रचार

तारीफ के हकदार कांग्रेस के पुराने सेनापति वीरभद्र हैं, जिन्हें लोग प्यार से ‘राजा जी’ (आजादी से पहले की रामपुर बुशहर की रियासत के राजा), प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर रोजाना चार-पांच रैलियां कर रहे हैं. कई बार वह हेलीकॉप्टर से भी चलते हैं, लेकिन ज्यादातर वह सड़क से ही यात्रा करते हैं. वह बड़े प्रभावी अंदाज में श्रोताओं से कहते हैं कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने आयकर के खातों में भ्रष्टाचार और अनियमितता का ‘झूठा आरोप’  लगाकर उनका सारा फंड सील कर दिया है.

himachal pradesh haroli

वह लोगों को बताते हैं कि केंद्र ने सिर्फ एक मामले की जांच के वास्ते आयकर विभाग, प्रवर्तन विभाग के साथ-साथ सीबीआई को उनके पीछे लगा दिया है. हिमाचल में यह बात उनके समर्थकों के गले उतर भी उतरती है और वह सोचते हैं कि विवादित 4-5 करोड़ रुपये की राशि राजा जी के बेईमान होने के लिए बहुत मामूली है. वह चारों तरह से घिर जाने के बाद भी लड़ाई लड़ रहे हैं. उनका मौजूदा कार्यकाल बहुत अच्छा नहीं रहा है, और कानून-व्यवस्था नीचे गई है, फिर भी वह चाहते हैं कि उन्हें “आधुनिक हिमाचल का निर्माता” कह कर पुकारा जाए.

कुछ महीने पहले कोटखाई में एक स्कूली छात्रा से गैंगरेप के मामले में सरकार को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. आरोप लगा कि प्रभावशाली लोगों के बेटे गैंगरेप में शामिल थे, लेकिन पुलिस ने राज्य से बाहर के कुछ निर्दोष मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया. इसके नतीजे में सीबीआई जांच बिठाई गई और इसने आईजी पुलिस की अगुवाई वाले जांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया. इन पुलिस वालों पर निरपराध लोगों को गिरफ्तार करने और उनमें से एक को हिरासत में मार डालने का आरोप लगा.

जीएसटी और नोटबंदी का असर यहां कम है

बीजेपी को यहां इसलिए भी अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है, क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी का असर यहां गुजरात और अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम रहा. वजह साफ है- हिमाचल कारोबारी गतिविधियों के लिए नहीं जाना जाता. कॉमर्शियल गतिविधियां और माल का उत्पादन भी सीमित है. इस तरह यह जीएसटी के असर से सुरक्षित रहा. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कुछ महीने पहले हिमाचल के लिए कर रियायतों में भी इजाफा किया है. हिमाचल प्रदेश चुनाव में सबसे प्रभावी समुदाय, और नतीजन सबसे बड़ा फैक्टर सरकारी कर्मचारी हैं. हिमाचल में हर परिवार का एक या एक से अधिक सदस्य प्रदेश सरकार में नौकरी करता है. यहां युवाओं की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा एक अदद सरकारी नौकरी पाना होती है.

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यह एक हमेशा असंतुष्ट रहने वाला समुदाय है, जो हर बार कुछ और रियायतें हासिल करने के लिए सरकार को बदल देना चाहते हैं. यही कारण है कि 1971 में पूर्ण राज्य का दर्जा पाने के बाद से यहां हमेशा दो पार्टियों को बारी-बारी से सत्ता की बागडोर सौंपते रहे हैं. और केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार, हिमाचल के मतदाताओं, खासकर सरकारी कर्मचारियों, के लिए ज्यादा आकर्षक विकल्प है. वैसे भी बीजेपी ने अगली सरकार उनकी बनने की दशा में ज्यादा भत्तों का वायदा तो कर ही रखा है.

कोई आश्चर्य नहीं कि बीजेपी और इसके नेता उत्साह से भरे हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी हमले की अगुवाई कर रहे हैं और कांग्रेस को ‘दीमक’ बता रहे हैं, जिसका खात्मा जरूरी है. ‘मैं यहां यह कहने नहीं आया हूं कि आप बीजेपी को जिता दें. मैं यह कहने आया हूं कि बीजेपी को तीन चौथाई बहुमत दीजिए.’ वह मतदाताओं से कहते हैं कि बीजेपी को वोट देने के लिए बड़ी संख्या में मतदान के लिए निकलें. ‘एक भी पोलिंग बूथ ऐसा नहीं होना चाहिए, जहां कांग्रेस रूपी दीमक बचा हो.’

हिमाचलियों को गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ घोषित होने वाले नतीजे जानने के लिए एक महीने का इंतजार करना होगा, लेकिन आसमान पर लिखी इबारत तो किसी से छिपी नहीं है.

Himachal Pradesh Election Results 2017

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