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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017: राष्ट्रीय मुद्दों को किनारे रख हो रहा है चुनाव-प्रचार

कांग्रेस और बीजेपी अपनी-अपनी जीत के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, फिर भी सार्वजनिक मंचों पर सिवाए जुमलेबाजी के और कुछ भी मतदाताओं को परोसा नहीं जा रहा.

Updated On: Oct 27, 2017 12:09 PM IST

Matul Saxena

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017: राष्ट्रीय मुद्दों को किनारे रख हो रहा है चुनाव-प्रचार

हिमाचल प्रदेश में 13वीं विधानसभा के लिए आगामी 9 नवंबर को होने वाला चुनाव-प्रचार राष्ट्रीय मुद्दों को दरकिनार कर स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशियों के व्यक्तित्व पर आरोप-प्रत्यारोप और छींटाकशी के साथ जोर पकड़ रहा है. वैसे, तो दोनों ही राष्ट्रीय राजनैतिक दल कांग्रेस और बीजेपी अपनी-अपनी जीत के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, फिर भी सार्वजनिक मंचों पर सिवाए जुमलेबाजी के और कुछ भी मतदाताओं को परोसा नहीं जा रहा.

आरोप-प्रत्यारोपों से ही चल रहा प्रचार

ऐसी ही जुमलेबाजी पिछले दिनों हमीरपुर के गांधी-चौक में हुए एक कार्यक्रम में देखी गई जहां बंदरों के आतंक से पीड़ित एक महिला ने सांसद से सवाल किया और सांसद ने बंदरों के आतंक के लिए भी वीरभद्र को दोषी ठहराया. बीजेपी का प्रचार वीरभद्र सिंह और उनकी सरकार के भ्रष्टाचार पर केंद्रित है तो कांग्रेस का प्रचार बीजेपी के स्थानीय नेताओं की कारगुजारी और केंद्र सरकार की प्रदेश के प्रति अनदेखी है.

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बीजेपी अगर वीरभद्र के बेटे की 84 करोड़ संपति की बात करती है तो कांग्रेस के समर्थक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की संपत्ति का हवाला देते हैं. हैरानी इस बात की है कि कांग्रेस पर परिवारवाद के पोषण का आरोप लगाने वालों को धूमल और उनके सांसद-पुत्र अनुराग ठाकुर की याद दिलवाई जा रही है.

बदले गए चुनाव क्षेत्र भी है मुद्दा

बीजेपी बार-बार बिगड़ती कानून व्यवस्था का हवाला देकर कोटखाई का गुड़िया-प्रकरण याद करवा रही है. वीरभद्र पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि इसके चलते उन्होंने विद्या स्टोक्स की ठियोग से चुनाव लड़ने की पेशकश ठुकरा दी और ठियोग और अपना निर्वाचन-क्षेत्र शिमला सदर बेटे के लिए छोड़कर सोलन जिला के अर्की विधानसभा क्षेत्र में पहुंच गए.

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वीरभद्र के समर्थक इस दलील को धूमल के निर्वाचन-क्षेत्र बदलने की बात से काटते हैं. बिलासपुर और हमीरपुर में बीजेपी के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं. कांग्रेस के प्रचार में कहीं-कहीं नोटबंदी और जीएसटी का मामला भी विरोध में उठाया जा रहा है. बीजेपी इसके बदले पीएम मोदी के पिछले हिमाचल दौरे के दौरान राज्य के लिए केंद्र द्वारा घोषित 1000 करोड़ रुपए की विकासात्मक योजनाओं की बात करते हैं. विकास के बड़े-बड़े दावों का प्रदेश के मतदाताओं पर क्या असर होगा यह तो 18 दिसंबर को मतगणना के बाद ही पता चलेगा .

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