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हिमाचल चुनाव 2017: चौपाल में क्या फिर बाजी मारेगा कोई निर्दलीय?

चौपाल सीट के बारे में मशहूर है कि पिछले 5 बार से यहां से जीतने वाला विधायक कभी भी सत्ताधारी पार्टी के साथ नहीं रहा है

Updated On: Nov 06, 2017 06:54 PM IST

FP Staff

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हिमाचल चुनाव 2017: चौपाल में क्या फिर बाजी मारेगा कोई निर्दलीय?

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अंतिम चरण में पहुंच गया है. प्रत्याशियों के साथ-साथ उनकी पार्टी के नेता भी उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.

शिमला जिले के अंतर्गत आने वाला चौपाल निर्वाचन क्षेत्र विधानसभा की 60वीं सीट है. अनारक्षित चौपाल निर्वाचन क्षेत्र के लिए बीजेपी ने बलबीर सिंह वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है. बलबीर सिंह वर्मा ने 2012 का चुनाव निर्दलीय जीता था. बाद में वो राज्य के वीरभद्र सिंह सरकार को समर्थन देकर ऐसोशियट सदस्य बने, लेकिन विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया.

बलबीर वर्मा को टिकट देने का बीजेपी के भीतर काफी विरोध हुआ. हालांकि कोई खुलकर बगावत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.

बलबीर सिंह वर्मा को टक्कर देंगे कांग्रेस के सुभाष चंद मंगलेट

कांग्रेस ने सुभाष चंद मंगलेट को यहां से टिकट दिया है. मंगलेट पूर्व में दो बार यहां से विधायक रह चुके हैं. अपने प्रचार में वो बीजेपी के उम्मीदवार बलबीर सिंह वर्मा को धोखेबाज करार दे रहे हैं. अपने भाषणों में मंगलेट कहते हैं कि बलबीर ने साढ़े चार साल तक कांग्रेस का मंच साझा कर जनता को गुमराह किया. उन्होंने चौपाल की जनता से बीजेपी के दुष्प्रचार से सावधान रहने की अपील की.

कांग्रेस के ही बागी कुछ नेताओं ने चुनाव मैदान में कूदकर सुभाष चंद मंगलेट की मुश्किलें बढ़ा दी है.

चौपाल सीट के बारे में मशहूर है कि पिछले 5 बार से यहां से जीतने वाला विधायक कभी भी सत्ताधारी पार्टी के साथ नहीं रहा है.

यह भी पढ़ें: हिमाचल चुनाव 2017: क्या जुब्बल-कोटखाई में इस बार वापसी कर पाएगी बीजेपी!

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) इलेक्शन वॉच संस्था ने चौपाल से बीजेपी के प्रत्याशी और वर्तमान विधायक बलबीर सिंह वर्मा की संपत्ति पिछले 5 साल में 120 फीसदी बढ़ने की बात कही है. बलवीर वर्मा की संपत्ति 41 करोड़ से 90 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है.

2017 में चौपाल निर्वाचन क्षेत्र में कुल 71 हजार से अधिक मतदाता हैं. चौपाल में जातिगत या दलगत राजनीति के बजाए व्यक्तिव खास मायने रखता है.

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