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हिमाचल चुनाव 2017: क्या फिर यंग हंसराज से मात खाएंगे कांग्रेस के सुरेंद्र भारद्वाज?

2012 से पहले 10 साल तक इलाके में कांग्रेस का परचम फहराता था, अब इस पर बीजेपी का कब्जा है

Updated On: Oct 29, 2017 10:12 PM IST

FP Staff

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हिमाचल चुनाव 2017: क्या फिर यंग हंसराज से मात खाएंगे कांग्रेस के सुरेंद्र भारद्वाज?

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का चुनाव 9 नवंबर को होने वाला है. इसके नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे. चुराह (अनुसूचित जाति) हिमाचल के आखिरी छोर पर है. यह इलाका जम्मू-कश्मीर से सटा हुआ है. चुराह विधानसभा सीट नंबर एक है. यह इलाका चुराह अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है. 2008 में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बाद अस्तित्व में में आया था. चुराह ग्रामीण इलाका है और यहां शहरी आबादी ना के बराबर है. 2012 की जनगणना के मुताबिक, यहां 61,120 मतदाता थे.

चुराह विधानसभा से बीजेपी ने इस बार भी हंसराज को ही टिकट दिया है. 2012 के विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी ने हंसराज को ही टिकट दिया था और उन्हें जीत भी मिली थी. हंसराज बीजेपी के युवा चेहरा हैं. इससे पहले 10 साल तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था. 2012 में भी इस आरक्षित सीट से कांग्रेस ने सुरेंद्र भारद्वाज को ही खड़ा किया था. लेकिन उन्हें हंसराज की वजह से मुंह की खानी पड़ी थी. हंसराज ने 2211 वोटों से जीत हासिल की थी. कांग्रेस ने इस बार भी यहां से सुरेंद्र भारद्वाज को ही टिकट दिया है. इस बार भी टक्कर 2012 की तरह ही होगी लेकिन कांग्रेस उम्मीद कर रही होगी कि नतीजा इस बार पहले की तरह ना हो. 2012 के विधानसभा चुनाव में चुराह की सीट हासिल करना बीजेपी के लिए बड़ी कामयाबी थी.

2008 से पहले यह निर्वाचन क्षेत्र राजनगर के तौर पर जाता है. परिसीमन के दौरान चंबा की चुराह तहसील और चंबा तहसील का राजनगर कानूनगो सर्कल मिलाकर चुराह विधानसभा क्षेत्र बना था. कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र भारद्वाज 15 साल ने राजनगर विधानसभा क्षेत्र में राजनीति कर रहे थे. 2012 से पहले 10 साल तक इस इलाके पर कांग्रेस का कब्जा रहा. 2007 और 2002 में सुरेंद्र भारद्वाज ने यहां कांग्रेस का पताका फहराया था. 2012 में बीजेपी के युवा चेहरे हंसराज ने बीजेपी को जीत दिलाई थी. अब देखना है कि इस बार नतीजा किसके पक्ष में होता है.

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