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गुजरात तिकड़ी को मध्य प्रदेश में क्यों मिल रहा है भाजपाइयों का साथ?

हार्दिक पटेल,अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी 8 अप्रैल को एक साथ सागर जिले के गढाकोटा में आयोजित किसान सम्मेलन एवं प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे, इसमें बीजेपी नेताओं की सक्रियता दिख रही है

Updated On: Apr 06, 2018 09:51 AM IST

Dinesh Gupta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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गुजरात तिकड़ी को मध्य प्रदेश में क्यों मिल रहा है भाजपाइयों का साथ?

हार्दिक पटेल,अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी 8 अप्रैल को एक साथ सागर जिले के गढाकोटा में आयोजित किसान सम्मेलन एवं प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे. गुजरात के इन तीन युवा नेताओं के कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं की सक्रियता चौंकाने वाली है.

प्रदर्शन शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता गोपाल भार्गव के निर्वाचन क्षेत्र में हो रहा है. यह निर्वाचन क्षेत्र पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद प्रहलाद पटेल के निर्वाचन क्षेत्र का भी हिस्सा है. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपील के जो पर्चे सागर जिले में बंट रहे हैं, उनमें प्रह्लाद पटेल समर्थक नेताओं का नाम भी है. बीजेपी नेताओं के नाम गुजराती तिकड़ी से जुड़ने की खबर के बाद कांग्रेस भी हैरान हैं.

तनाव के माहौल में रैली की मंजूरी पर भी सवाल

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के भारत बंद के दौरान सागर जिले में भी तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं थीं. पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश भर के पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि वे 14 अप्रैल तक सतर्क रहे. सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को भारत बंद की सूचनाएं लगातार चल रहीं हैं. 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती है. इस दौरान कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए प्रदेश के सभी 51 जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. सागर जिले में फिलहाल धारा 144 हटा ली गई है. लेकिन, स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं मानी जा रही है.

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इस तनावपूर्ण माहौल में सागर के जिला प्रशासन द्वारा हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी को प्रदर्शन की अनुमति दिए जाना भी हैरान करने वाला है. राज्य के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह का गृह जिला भी सागर ही है. जिला प्रशासन द्वारा प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने पर उन्होंने आला अधिकारियों से जानकारी भी ली है. सागर, मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड के इलाके का संभागीय मुख्यालय है. इस इलाके में जातिवादी राजनीति हमेशा ही हावी रहती है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती का गृह जिला टीकमगढ़ भी सागर संभाग के अंर्तगत ही आता है. यहां पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति वर्ग को प्रभावशाली तबके द्वारा प्रताड़ित किए जाने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं. यह इलाका पिछड़ा वर्ग बाहुल्य है. लोधियों के दबदबे वाला क्षेत्र भी है. कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा के बैनर पर किया गया है. अल्पेश ठाकुर के लोधी समुदाय से होने का प्रचार विशेष तौर पर किया जा रहा है.

बीजेपी की गुट की राजनीति का मिल रहा है लाभ

समूचे बुंदेलखंड में भारतीय जनता पार्टी के नेता कई गुटों में बंटे हुए हैं. गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह और वित्त मंत्री जयंत मलैया को जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का समर्थक माना जाता है वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव की पहचान मुख्यमंत्री विरोधी नेताओं में है. प्रहलाद पटेल भी इस क्षेत्र में एक ताकतवर नेता हैं. वे लोधी है. प्रहलाद पटेल ने पहली बार दमोह लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2014 में चुनाव लड़ा था. इससे पहले वे सिवनी, बालाघाट और छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ चुके हैं. जबकि वे नरसिंहपुर जिले के निवासी हैं.

कुछ माह पहले तक प्रह्लाद पटेल भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के घोर विरोधी माने जाते थे. तीन माह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रिमंडल के विस्तार में पटेल के विधायक भाई जालम सिंह पटेल को राज्य मंत्री बनाया था. उसके बाद से ही मुख्यमंत्री चौहान को लेकर प्रहलाद पटेल के स्वर कुछ नरम पड़े हैं. गुजराती युवा नेताओं की तिकड़ी के कार्यक्रम में प्रहलाद पटेल के सांसद प्रतिनिधि कमलेश साहू का नाम प्रमुखता से सामने आया है. नाम सामने आने के बाद  कमलेश साहू को भारतीय जनता पार्टी ने निष्कासित कर दिया है.

Bhopal : Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chauhan addressing a gathering during his indefinite fast to placate angry farmers at BHEL Dussehra Ground in Bhopal on Saturday. PTI Photo (PTI6_10_2017_000087B)

निष्कासन के बाद कमलेश साहू ने कहा कि मेरा मोर्चा के कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है. साहू ने कहा कि कार्यक्रम में बहादुर सिंह लोधी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. बहादुर सिंह लोधी पिछले चालीस साल से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े हैं. पदाधिकारी भी रहे हैं. एक अन्य नाम राजाराम बड्डा का भी है. ये बीजेपी नेता हैं. जिस रहली विधानसभा क्षेत्र में हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश की रैली हो रही है वह पिछड़ा वर्ग बाहुल्य क्षेत्र है. गोपाल भार्गव 1985 से इस क्षेत्र से लगातार चुनाव जीत रहे हैं. यह भारतीय जनता पार्टी की सर्वाधिक सुरक्षित सीट मानी जाती है.

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इस क्षेत्र में ब्राहण मतदाताओं की संख्या मात्र दस प्रतिशत है. क्षेत्र में भार्गव की लोकप्रियता के कारण कांग्रेस का पिछड़ा कार्ड हमेशा ही नाकाम रहा है. भार्गव की घेराबंदी के लिए इस बार गुजराती तिकड़ी का सहारा लिया जा रहा है. फिलहाल पिछड़ा वर्ग का दलीय सीमा तोड़ता दिखाई दे रहा है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रीी गोपाल भार्गव कहते हैं कि मेरे क्षेत्र के लोग समझदार है जातिवाद के हथकंडे में नहीं आएंगे.

सौ किलोमीटर का रोड शो भी होगा

हार्दिक पटेल तीन दिन मध्यप्रदेश में रहेंगे. संयुक्त पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा का कार्यक्रम जिस बुंदेलखंड क्षेत्र में हो रहा है, वहां पाटीदार निर्णायक भूमिका में नहीं हैं. इनकी संख्या भी काफी कम है. हार्दिक पटेल बुंदेलखंड से पहले नीमच और मंदसौर में भी कई कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं. यह क्षेत्र पाटीदार बाहुल्य है. पिछले साल किसानों पर हुई फायरिंग की जांच के लिए गठित आयोग इन दिनों मंदसौर में सुनवाई भी कर रहा है.

हार्दिक दो दिन नीमच और मंदसौर में रहेंगे. 8 तारीख को वे रायसेन जिले के बेगमगंज से रोड शो करते हुए पहले सागर और फिर गढाकोटा जाएंगे. उनका यह रोड शो लगभग सौ किलोमीटर का होगा. रायसेन जिला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुराना संसदीय क्षेत्र है. वर्तमान में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करतीं हैं.

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