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योगी आदित्यनाथ का हजभवन से मानसरोवर भवन तक का सियासी सफर

कुछ दिन पहले ही हजहाउस के बाहर चल रहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन काफी हिंसक भी हो गया था

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 31, 2017 07:39 PM IST

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योगी आदित्यनाथ का हजभवन से मानसरोवर भवन तक का सियासी सफर

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुविधा के लिए भवन का शिलान्यास हो गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में नए मानसरोवर भवन की आधार शिला रखी.

हालांकि मानसरोवर भवन की आधारशिला के इस मौके पर योगी ने पिछली समाजवादी सरकार को निशाने पर ले लिया. मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि इस भवन के निर्माण को रोकने का प्रयास पिछली सरकार के वक्त किया गया था.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'कैलाश मानसरोवर भवन को बनने से रोकने का प्रयास हुआ. भवन न मिलने पर कितनी आपको दिक्कत हुई होगी. लेकिन जिस भूमि पर भवन बनना था उसे ही विवादित किया गया. हमने 50 करोड़ कीमत की जमीन खरीदकर इसे गाजियाबाद में ही बनाने का निश्चय किया था. उन्होंने कहा कि इस भवन से कैलाश मानसरोवर यात्रियों और कावड़ियों को सुविधाएं मिलेंगी.

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मानसरोवर के बहाने योगी आदित्यनाथ की रणनीति

गाजियाबाद में मानसरोवर भवन बनाने का फैसला अपने-आप में बीजेपी और योगी आदित्यनाथ की रणनीति को दिखाता है. योगी यह दिखाना चाह रहे हैं कि यूपी में उनकी सरकार आने का ही नतीजा है कि इस वक्त मानसरोवर भवन की आधारशिला रखी जा रही है. वरना ऐसा नहीं हो पाता. योगी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी सरकार अपने कोर वोटर की आस्था का ख्याल रखती है, जबकि पिछली सरकार तो महज एक खास वर्ग का ही ख्याल रखती थी.

योगी इस बात को समझते हैं कि मानसरोवर भवन महज एक भवन भर नहीं है, यह लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा है जिसे भुनाने की कोशिश योगी की तरफ से हो रही है.

अगर ऐसा नहीं होता तो मानसरोवर भवन की आधारशिला रखते वक्त योगी अखिलेश सरकार के कार्यकाल और इस पर हुई राजनीति का जिक्र नहीं करते. लेकिन, ऐसा करना ही था क्योंकि योगी इस बात को समझते हैं कि मानसरोवर भवन बनाने मात्र से नहीं बल्कि उसका श्रेय लेने से अपना मकसद सफल होगा. मुद्दा आस्था से जुड़ा है, मुद्दा श्रद्धा से जुड़ा है, मुद्दा अपने कोर वोटबैंक से जुड़ा है तो फिर इस पर सियासी चर्चा तो होगी ही.

अखिलेश यादव ने किया था हजभवन का उद्घाटन

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दरअसल, गाजियाबाद में अखिलेश सरकार के कार्यकाल में हजभवन का उद्घाटन किया गया था. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उस वक्त अखिलेश सरकार में कद्दावर मंत्री आजम खान ने इस भवन का उद्घाटन किया था. हजभवन को लेकर खूब सियासत भी हुई थी. सबने उस वक्त अपने-अपने फायदे के तौर पर इसके समर्थन और विरोध में आवाज भी उठाई थी. लेकिन, एक बार फिर से उन्हीं दिनों की याद ताजा हो गई है.

मानसरोवर भवन के बनने में रोड़े अटकाने का आरोप एसपी नेताओं और पिछली सरकार पर लगाकर अपने कोर वोटर और अपने समर्थकों को साधने की कोशिश योगी की तरफ से हो रही है.

हजहाउस हटाने के विरोध में हिंसक प्रदर्शन

एक तरफ मानसरोवर भवन के निर्माण की तैयारी शुरू हो रही है तो दूसरी तरफ, पहले से मौजूद हजभवन पर तलवार लटक रही है. गाजियाबाद में हिंडन नदी के किनारे हज हाउस को हटाने का आदेश एनजीटी ने दिया है. इसके बाद कुछ लोगों ने इसके विरोध में अनशन शुरू किया है और मामला अब कोर्ट के अंदर चला गया है. पहले शांतिपूर्वक प्रदर्शन होता रहा फिर, कुछ दिन पहले ही हजहाउस के बाहर चल रहा शांतिपूर्ण प्रदर्शन काफी हिंसक भी हो गया था.

हजहाउस बनने के बाद से ही इस पर सियासत चल रही थी. अब एनजीटी के फैसले आने और यूपी की सरकार बदल जाने के बाद इस पर सियासत और तेज हो गई है. पहले की सरकार हजभवन को लेकर नरम थी, अब की सरकार मानसरोवर भवन बनाने को लेकर प्रतिबद्ध दिख रही है.

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