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रामजस विवाद: 'गुरमेहर सिर्फ शहीद की बेटी नहीं, आजादख्याल छात्रा भी है'

सरकार के नुमाइंदों को फिक्र करनी चाहिए कि गुरमेहर को बलात्कार की धमकी मिल रही है और घटिया बयानबाजी का शिकार होना पड़ रहा है

Updated On: Feb 28, 2017 05:11 PM IST

Maya Palit

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रामजस विवाद: 'गुरमेहर सिर्फ शहीद की बेटी नहीं, आजादख्याल छात्रा भी है'

क्या आपको दो साल पहले छपी वह तस्वीर याद है जिसमें एक नौजवान लड़की अपने पिता के दाह-संस्कार के वक्त रो रही है? उस तस्वीर को देख हर किसी की आंख भर आई थी. वह कर्नल एमएन राय के दाह-संस्कार की तस्वीर थी.

एमएन राय कश्मीर में हुए एक आतंकवादी हमले में शहीद हुए थे. फिर पिछले साल एक और तस्वीर छपी. यह शहीद कर्नल एमएन राय की बेटी अलका की तस्वीर थी.

इसमें अलका फौजी वर्दी में है और कश्मीरी उग्रवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भारतीय सैनिकों को सलामी दे रही है. इंटरनेट खंगालने पर पता चलता है कि बुरहान वानी एक न एक तरीके से अलका के पिता की मौत का जिम्मेदार था.

एक बार फिर सोशल मीडिया के यूजर्स और 'प्राउड इंडियन' जैसे फेसबुक ग्रुप झुंड के झुंड सक्रिय हुए. अलका की तस्वीर को अपनी पोस्ट पर लगाकर वे कश्मीर में चलते संघर्ष से लेकर ‘कोई आतंकवादी क्यों बनता है’, जैसे तमाम सवालातों के बारे में अपने ख्याल का इजहार करते हुए उसे जायज बताने लगे.

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अलका की तस्वीर ऐसे लोगों के लिए एक ढाल बन गई जिसको आगे कर वे हर उस व्यक्ति के सामने अपने-अपने लफ्जों की तलवार भांजने लगे जो उनकी नजर में ‘राष्ट्र-विरोधी’ बातें कह रहा था.

लेकिन किसी पूर्व सैनिक की बेटी कोई ऐसी बात कह दे जो देशभक्ति की अपनी बातों को परवान चढ़ाने पर तुले समूहों को न जंचे तो क्या होगा? वही होगा जो इस समय गुरमेहर कौर के मामले में हो रहा है.

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गुरमेहर अपने पिता कैप्टन मनदीप सिंह के साथ (तस्वीर-एफबी)

शहीद की बेटी

ऐसा जान पड़ता है कि अगर कोई पूर्व सैनिक की संतान है तो उसे राजनीति की एक खास चौहद्दी के भीतर रहते हुए ही अपनी राय रखने की आजादी है. अगर उसने कोई अलग राय रखी तो फिर मामला उस पर भारी पड़ सकता है.

लेडी श्रीराम कॉलेज में पढ़ रही बीस साल की गुरमेहर कौर कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी है. कैप्टन मनदीप सिंह 1999 के करगिल युद्ध में शहीद हुए थे.

पिता की मौत की वजह से गुरमेहर ने मन ही मन मुसलमानों के प्रति नफरत पाल थी. पिछले साल अपनी जिन्दगी के इसी अनुभव को आगे रख गुरमेहर ने राष्ट्रवादी तेवर वाली असहिष्णु हिंसा पर कुछ सोच-विचार किया

भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की पैरोकारी करता उसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया गुरमेहर को उसकी इस कोशिश के लिए खूब वाह-वाही मिली.

इस साल 22 फरवरी के दिन एबीवीपी के सदस्यों ने रामजस कॉलेज में छात्रों और शिक्षकों पर बड़ी बेरहमी से हमला किया. इस घटना के एक हफ्ते बाद गुरमेहर कौर ने फेसबुक पर एक नया प्रोफाइल पिक्चर लगाया.

इसमें एबीवीपी के हरकत की निन्दा की गई. प्रोफाईल पिक्चर में गुरमेहर के हाथ में एक प्लेकार्ड है जिसपर हैशटैग 'स्टूडेंट अगेंस्ट एबीवीपी', लिखा है और देश भर के छात्रों का आह्वान किया गया है कि वे एबीवीपी से नहीं डरें.

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गुरमेहर ने सोशल मीडिया पर एबीवीपी का विरोध किया है (तस्वीर-एफबी)

एबीवीपी का विरोध

प्रोफाइल पिक्चर के साथ गुरमेहर ने जो संदेश लिखा है वह कुछ यूं है- 'एबीवीपी का मासूम छात्रों पर बेरहम हमला बहुत परेशान करने वाला है और इस पर रोक लगनी चाहिए. यह प्रदर्शनकारियों पर नहीं बल्कि लोकतंत्र के हमारे हरदिल-अजीज मान-मूल्यों पर हमला है.'

गुरमेहर ने आगे लिखा, 'इस देश में जन्म लेने वाले हर आदमी के आदर्श, नैतिक-भावना, आजादी और अधिकार पर हमला है. जो पत्थर तुमलोग हमारी ओर फेंकते हो उससे हमारी देह को चोट लगती है लेकिन वे पत्थर हमारे विचार को चोट पहुंचाने में नाकाम हैं.'

फेसबुक पर गुरमेहर ने जैसे ही यह संदेश डाला ट्रोल के झुंड उसके पीछे लग गए. उसे राष्ट्र-विरोधी और प्रचार का भूखा करार दिया जाने लगा. यह फटकार भी मिली कि ‘बेबी तुम गलत रास्ते पर जा रही है’

लेकिन इन टिप्पणियों के अलावा उसे कुछ धमकी भी मिली है और इन धमकियों की तुलना में ऐसे तानों और उलाहनों का मिजाज कुछ नरम ही जान पड़ता है. गुरमेहर पर कुछ लोग एक तरह से नफरत के गोले बरसा रहे हैं, उसे कत्ल और बलात्कार करने की धमकी मिल रही है.

गुरमेहर ने सोमवार के दिन दिल्ली महिला आयोग को इन बातों की जानकारी दी. उसकी शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एक एफआईआर भी दर्ज कर लिया है.

इस बीच मुख्यधारा की कुछ जानी-मानी शख्सियतों ने अपनी तरफ से गुरमेहर कौर पर छींटाकशी करना जरुरी समझा है. केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू ने अपने ट्वीट में अचरज जताया है कि, 'आखिर इस नौजवान लड़की का दिमाग कौन खराब कर रहा है'.

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सोशल मीडिया ट्रॉल्स ने गुरमेहर की तुलना दाऊद से की (तस्वीर-एफबी)

दाऊद से तुलना

बीजेपी के ही एक सांसद प्रताप सिम्हा ने गुरमेहर कौर तथा दाऊद इब्राहिम के बीच एक बेसिर-पैर की तुलना पेश की है. वीरेन्द्र सहवाग ने गुरमेहर के एक पुराने वीडियो की एक तस्वीर पर निशाना साधा और उसके कहने का मजाक उड़ाया है कि करगिल युद्ध के कारण उसके पिता की जान गई है.

सबसे ज्यादा चिढ़ पैदा करने वाला बयान फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा की ओर से आया. सहवाग को उनकी उपहास उड़ाती टिप्पणी के लिए बधाई देते हुए रणदीप हुड्डा ने गुरमेहर के प्रति नकारात्मक स्वर में लिखा है कि: 'तुम्हारा शांति वाला वीडियो अच्छा था लेकिन अब यह मानवतावादी नहीं बल्कि सियासी बन गया है.'

यह बताना मुश्किल है कि इस टिप्पणी के जरिए रणदीप हुड्डा कहना क्या चाह रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि वे गुरमेहर को एक ऐसा 'शांति-समर्थक' मानकर चल रहे हैं जिसे कोई भी राय दे दो तो वह झट से मान ले.

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शायद रणदीप हुड्डा को लगता है कि गुरमेहर 'शांति-समर्थक' वाली भूमिका में रहती तो ही अच्छा कहलातीं और एक संगीन सियासी पक्ष लेकर गुरमेहर ने अपनी छवि को धक्का पहुंचाने का काम किया है.

ट्वीटर पर रणदीप हुड्डा की टिप्पणी पर लोगों ने पलटवार किया तो हुड्डा ने कदम पीछे खींचते हुए दोष का ठीकरा कहीं और फोड़ने की कोशिश की और लिखा: 'कितनी उदास करने वाली बात है कि इस बेचारी लड़की का इस्तेमाल एक सियासी मोहरे की तरह हो रहा है.'

तकरीबन ऐसे ही ख्याल का इजहार सोशल मीडिया पर कुछ वैसे लोग कर रहे हैं जो अपने को हमेशा बड़े भाई की भूमिका मे देखना चाहते हैं. वे अफसोस के स्वर में लिख रहे हैं कि, 'चतुर-चालाक वामपंथी इस बिन पिता की बच्ची के कंधे पर रखकर बंदूक चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं.'

वे सोच ही नहीं सकते कि गुरमेहर कौर अपने सोच-विचार के दम पर भी कोई सियासी राय बना सकती है या किसी विचारधारा को पसंद कर सकती है.

जो गुरमेहर के पक्ष में हैं और एक संजीदा राजनीतिक मसले पर राय रखने के लिए उसे बधाई दे रहे हैं उन्हें भी कहीं ना कहीं लगता है कि गुरमेहर के पिता का ना होना अपने आप में एक समस्या की तरह है.

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गुरमेहर का कहना है कि वो एक आजादख्याल लड़की है (तस्वीर-एफबी)

आजादख्याल लड़की

ऐसे लोग सोच ही नहीं पा रहे कि गुरमेहर आजाद सोच-विचार के काबिल है और ठीक इसी कारण गुरमेहर के बारे में लिखते हुए वे उसे ‘एक महान पिता की वीर बेटी’ कहकर याद कर रहे हैं.

या फिर अपनी बातों से कुछ ऐसा जता रहे हैं मानो गुरमेहर को अच्छे-बुरे का कोई अता-पता ना हो और अपनी नासमझी में उसने राष्ट्र-विरोधी भीड़ के साथ अपनी आवाज मिला दी हो. यह सब गुरमेहर को लगातार ‘बच्चा’ यानी नादान साबित करने की कोशिश है

परेशानी की बात यह भी है सोच की इसी लकीर पर चलते हुए कुछ लोग अपने ट्वीट में गुरमेहर के लिए नये पापा-मम्मी का प्रस्ताव लेकर रहे हैं. एक ट्वीटर यूजर ने तो ये तक लिखा दिया है कि बरखा दत्त और अरविन्द केजरीवाल गुरमेहर के मम्मी-पापा बन सकते हैं.

गुरमेहर कौर से सोशल मीडिया पर लगातार सवाल पूछा जा रहा है कि अगर तुम्हारे पिता होते तो तुम्हारी इस कारस्तानी पर क्या सोचते.

कुछ लोग अपने सोच के सहारे पैमाइश करके यह कह रहे हैं गुरमेहर ने एबीवीपी के खिलाफ मोर्चा खोलकर अपने पिता के सियासी जज्बातों के खिलाफ काम किया है तो कुछ लोगों की समझ का पैमाना यह कहता प्रतीत हो रहा है कि गुरमेहर ने एबीवीपी के खिलाफ टिप्पणी करके अपने पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है.

पिता का सिर गर्व से ऊंचा करने वाली बात खुद गुरमेहर की लिखावट में भी दर्ज है. यह दरअसल और कुछ नहीं गुरमेहर को एक आजाद और खुदमुख्तार शख्सियत के रुप में नकारने की कोशिश ही है.

Gurmeher Kaur

गुरमेहर कौर का कैंपेन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है (फोटो: फेसबुक से साभार)

अलका राय प्रसंग

दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गुरमेहर के पिता के करियर के आधार पर उसकी तरफदारी कर रहे हैं और यह कहते प्रतीत होते हैं कि गुरमेहर ने अपने पिता का नाम लिया है तो उसे एक न एक तरह की देशभक्ति और राष्ट्रवाद के मूल्यों को स्वीकार करना ही चाहिए.ऐसे लोग भी अपने सोच-विचार में कुछ खास खुले नहीं कहे जा सकते.

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मामला ठीक वैसा ही बन पड़ा है जैसा अलका राय वाले प्रसंग में नजर आया था. पहले लोगों को अलका राय के आंसू दिखे और उसके बाद यह दिखा कि अलका तो देश के फौजियों को सलाम कर रही है.

ठीक इसी तरह गुरमेहर कौर की टिप्पणी को लेकर सारी बहस उसे एक 'शहीद की बेटी' करार देकर चल रही है. कोई यह स्वीकार करता नहीं दिखता कि गुरमेहर कौर एक विद्यार्थी है और इस नाते यूनिवर्सिटी में एबीवीपी के हाथों हुई हिंसा के बारे में अपने जज्बात के इजहार का हक उसे भी बाकियों की तरह ही हासिल है.

खैर, इन सबके बीच अच्छा होता अगर लोग गुरमेहर को बिन मांगी यह सलाह देने से बाज आते कि उसे राजनीतिक हुए बिना मानवतावादी बनकर दिखाना चाहिए

क्या ही अच्छा हो अगर सरकार के नुमाइन्दे इस कयासबाजी से बाज आयें कि गुरमेहर के मन में क्या चल रहा है और कौन उसके दिमाग को खराब कर रहा है.

इसकी जगह सरकार के नुमाइन्दों को फिक्र करनी चाहिए कि गुरमेहर को बलात्कार की धमकी मिल रही है और उसे घटिया किस्म की बयानबाजी का शिकार होना पड़ रहा है.

कोई देखना चाहे तो उसे यह भी नजर आ सकता है कि गुरमेहर एक बहादुर लड़की है. गुरमेहर..तुम्हें एक ऐसी दुनिया नसीब हो जहां कुछ बोलने के लिए बहुत ज्यादा बहादुरी दिखाने की जरुरत ना हो.

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