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'गुलाबी गैंग' की संपत पाल को इस बार चुनाव में जीत की पूरी उम्मीद

संपत पाल 2012 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थीं लेकिन उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Feb 23, 2017 05:20 PM IST

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'गुलाबी गैंग' की संपत पाल को इस बार चुनाव में जीत की पूरी उम्मीद

संपत पाल 52 साल की हैं. वह महिला कार्यकर्ता से राजनेता बनी हैं. हालांकि ‘गुलाबी गैंग’ से उन्हें शोहरत तो बहुत पहले ही मिल चुकी है. ‘गुलाबी गैंग’ यानी गुलाबी साड़ी पहने और हाथ में लाठी रखने वाली महिलाओं का गैंग, जो बुंदेलखंड के इस इलाके में महिलाओं को अपने हिसाब से इंसाफ दिलाता है. संपत पाल 2012 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थीं लेकिन उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था. अब वह फिर मैदान में उतरी हैं. मनिकपुर सीट से ही, कांग्रेस के टिकट पर.

दुनिया भर में शोहरत

'गुलाबी गैंग' के कारनामों की वजह से संपत पाल दुनिया भर में मशहूर हुईं. उन पर 2014 में ‘गुलाबी गैंग’ के नाम से एक बॉलीवुड फिल्म भी बनी, जिसमें माधुरी दीक्षित ने मुख्य भूमिका निभाई थी. संपत पाल टीवी रिएलिटी शो ‘बिग बॉस 6’ में भी हिस्सा ले चुकी हैं जिसकी वजह से वह घर-घर में जानी पहचानी गईं. ब्रसेल्स में रहने वाली लेखिका अमाना फोनतानेल-खान ने ‘पिंक साड़ी रेवोल्यूशन’ किताब में उनकी कहानी भी लिखी.

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संपत पाल मानती हैं कि एसपी-कांग्रेस गठबंधन की साझा उम्मीदवार होने से उनकी जीत पक्की है

संपत पाल तब सुर्खियों में आईं थीं, जब वह राशन वितरण को लेकर एक थाना प्रभारी से भिड़ गई थीं. उन्होंने गुलाबी साड़ी पहने और हाथों में लाठी उठाए महिलाओं के एक समूह के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर हमला कर दिया था. इस घटना ने फतहपुर में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश शिवहरे का ध्यान खींचा. उन्होंने ही इस समूह को बाद में ‘गुलाबी गैंग’ का नाम दिया और संपत पाल के मेंटर बन गए.

अचानक मिली शोहरत ने संपत पाल के लिए राजनीति के दरवाजे खोल दिए. हालांकि वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल पर चुनावी राजनीति में आई थीं, लेकिन उन्होंने अपने ‘गुलाबी गैंग’ का समर्थन खो दिया था. चुनावी राजनीति में उतरने के उनके फैसले पर गैंग में दो फाड़ हो गया. कड़वी यादों के साथ, शिवहरे और संपत पाल ने अपने रास्ते अलग-अलग कर लिए.

सोनिया गांधी की मां से मुलाकात

‘गुलाबी गैंग’ की एक सह-संस्थापक भगवती द्विवेदी का कहना है, ‘मीडिया में लोकप्रिय होने के बाद फ्रांस और इटली की सरकार ने उनको आमंत्रित किया. जब संपत जी इटली में थीं तो वहां वह सोनिया गांधी की मां से मिली थीं. उनकी मां ने संपत पाल को एक अंगूठी दी और उन्हें अपनी ‘बेटी’ कहा था. इस तरह संपत कांग्रेस अध्यक्ष से जुड़ीं और उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ’.

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संपत पाल को चुनावी राजनीति में लाने का श्रेय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जाता है

अपने चुनाव क्षेत्र में संपत पाल ट्यूबवेल लगवाने, जल आपूर्ति, बिजली, सड़क और बच्चों के लिए शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर प्रचार में जुटी हैं. इस बार उन्हें जीत की पूरी उम्मीद है क्योंकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के मतदाताओं से उन्हें वोट देने को कहा है.

चुनाव में अगर संपत पाल जीत जाती हैं तो वो मनिकपुर में एक फिल्मसिटी बनाना चाहती हैं. संयोग से वह इन दिनों एक फिल्म में भी काम कर रही हैं. चित्रकूट में अपनी एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने फ़र्स्टपोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘अगर मैं इस बार जीतती हूं तो मैं गांव के बच्चों और खास कर लड़कियों को इंग्लिश मीडियम वाली शिक्षा दिलाऊंगी. अगला मुद्दा रोजगार और किसानों की आमदनी को बढ़ाना है. हमें सब्सिडी की जरूरत नहीं है’.

फर्जी’ फिल्म थी गुलाबी गैंग

वह माधुरी दीक्षित की ‘गुलाबी गैंग’ को एक ‘फर्जी’ फिल्म बताती हैं. संपत का दावा है कि फिल्म में उनके किरदार को गलत तरीके से दिखाया गया है.

बांदा की रहने वाली संपत पाल कहती हैं, ‘यह एक बकवास और ‘फर्जी’ फिल्म थी क्योंकि मेरे किरदार को गलत तरीके से पेश किया गया था. मैंने कभी हंसिया का इस्तेमाल नहीं किया. हम लाठी इस्तेमाल करते हैं. मैं अपने जीवन और सफर पर बनने वाली एक फिल्म में भी काम कर रही हूं. इसमें मैं अभिनेता राजपाल यादव की मां का किरदार निभा रही हूं. उम्मीद है कि इस बार जीत जाऊंगी. मेरा सपना है कि मनिकपुर में एक फिल्मसिटी बनवाऊं जिसे मैं जरूर बनवाऊंगी’.

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संपत पाल जरुरतमंद महिलाओं को इंसाफ दिलाने की मुहिम चलाती हैं (फोटो: रॉयटर्स)

‘गुलाबी गैंग’ का कहना है कि पूरे राज्य में चार लाख महिलाएं उसकी सदस्य हैं और अकेले मनिकपुर में उसकी सदस्यों की संख्या 25 हजार है.

‘गुलाबी गैंग’ के एक अन्य सह-संस्थापक अजय सिंह कहते हैं, ‘हम 2008 में उनके साथ हुए ताकि बुंदेलखंड में सूखे से लड़ सकें. आज ‘गुलाबी गैंग’ महिलाओं के लिए सुरक्षा नहीं बल्कि उनकी सशक्तिकरण की मांग करता है. जब भी हमें परेशानी में घिरी किसी महिला का फोन आता है तो हम अपने जिला स्तर के कमांडरों से संपर्क करते हैं. साथ ही वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भी संपर्क करते हैं. आंदोलन मजबूती से आगे बढ़ रहा है और एक बार संपतजी विधायक बन जाएंगी, तो इससे बहुत बल मिलेगा’.

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