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गुजरात चुनाव नतीजे 2017: NOTA ने कांग्रेस का कैसे बिगाड़ा खेल?

चुनाव में पड़े कुल 1,50,19,245 वोटों में से 5, 51,414 वोट नोटा को मिले. इसकी वजह से कई सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार काफी कम अंतर से हार गए

Updated On: Dec 19, 2017 02:23 PM IST

FP Staff

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गुजरात चुनाव नतीजे 2017: NOTA ने कांग्रेस का कैसे बिगाड़ा खेल?

गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कुछ अंतर से बीजेपी से पिछड़ गई. नोटा (None Of The Above) ने नतीजों में कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया. गुजरात के अंतिम परिणाम क्या होंगे इसमें नोटा ने अहम रोल निभाया.

चुनाव में पड़े कुल 1,50,19,245 वोटों में से तकरीबन 1.8 फीसदी 5, 51,414 वोट नोटा को मिले. कई सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार काफी कम अंतर से हार गए. हार-जीत का अंतर नतीजों में तीसरे स्थान पर रहे नोटा को मिले वोटों से भी कम रहा.

कई सीटों पर मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर अपने उम्मीदवारों को खारिज कर दिया. मुख्यमंत्री विजय रुपानी की राजकोट पश्चिम सीट में 3300 से अधिक नोटा वोट पड़े जो यह दिखाता है कि मतदाता उनसे कितने नाखुश हैं. वडगाम में 4,200 से अधिक वोट नोटा के खाते में आए.

अहमदाबाद के ढोलका विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के मंत्री भूपेंद्र सिंह चुडासमा ने कांग्रेस के अश्विन राठौड़ पर केवल 327 मतों से जीत दर्ज की. नतीजों में 4,222 वोट लेकर निर्दलीय शक्तिसिंह सिसोदिया तीसरे स्थान पर रहे. यहां नोटा को 2,347 वोट मिले.

खंभात विधानसभा क्षेत्र में, बीजेपी के महेश रावल को 71,459 वोट मिले जबकि कांग्रेस के खुश्मानभाई पटेल को 69,141 मत पड़े. हार-जीत का अंतर केवल 2,318 वोट रहा. परिणामों में 2,731 वोटों के साथ नोटा को तीसरा स्थान मिला.

कई सीटों पर नोटा नतीजों में तीसरे स्थान पर रहा

इसी तरह विसनगर में बीजेपी के ऋषिकेश पटेल ने कांग्रेस के महेश पटेल पर 2,869 मतों के अंतर से जीत हासिल की. यहां नोटा को 2,992 वोट था.

फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के रमेशभाई कटारा ने कांग्रेस के रघुभाई मच्चर को 2,711 वोटों से हराया. यहां भी नोटा नतीजों में तीसरे नंबर पर रहा. नोटा को मिले 4,573 वोट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के उम्मीदवार के 2,747 मतों से अधिक थे.

मातर में बीजेपी के केशरीसिंह सोलंकी कांग्रेस के संजयभाई पटेल को 2,406 वोटों के अंतर से हरा पाने में कामयाब रहे. तीसरे नंबर पर रहे नोटा को यहां 4,090 वोट मिले जो कि अगले स्थान पर रहे निर्दलीय उम्मीदवार से कहीं ज्यादा था.

चुनाव में नोटा विकल्प मतदाताओं को इस बात का अधिकार देता है कि अगर उसे कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं आए तो वह चुनाव मैदान में खड़े सभी उम्मीदवारों को नकार दे.

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