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गुजरात चुनाव 2017: पोरबंदर में ‘बोट-वाले’ बिगाड़ सकते हैं बीजेपी के ‘वोट का खेल’

राहुल गांधी का जादू मछुआरों के ऊपर चढ़ता दिख रहा है. अब नरेंद्र मोदी राहुल के जादू से मछुआरों को बाहर निकाल पाएंगे कि नहीं सबकुछ इस पर निर्भर करेगा

Updated On: Nov 28, 2017 11:50 AM IST

Amitesh Amitesh

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गुजरात चुनाव 2017: पोरबंदर में ‘बोट-वाले’ बिगाड़ सकते हैं बीजेपी के ‘वोट का खेल’

पोरबंदर के समुद्री तट पर मछुआरों को संबोधित करने जब राहुल गांधी मंच पर पहुंचे तो वहां मौजूद मछुआरों ने उनका जोरदार स्वागत किया. थोड़ी ही देर बाद उनके सामने मछुआरा समाज की तरफ से मांगों की झड़ी लगा दी गई.

राहुल ने गौर से सबकी बातों को सुना और दावा किया कि गुजरात में कांग्रेस की सरकार बनते ही मछुआरों की सभी मांग पूरी कर दी जाएगी. लेकिन, राहुल की रैली के दौरान पोरबंदर में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही थी कि मछुआरा समाज की तरफ से राहुल गांधी के साथ मंच साझा करने वाला तो बीजेपी का कार्यकर्ता है.

यहां तक कि खुद राहुल गांधी ने भी मंच से इस मुद्दे को हवा दे दी. राहुल ने कह दिया कि ‘बीजेपी का कार्यकर्ता भी कांग्रेस से डिमांड कर रहा है. हम इसे मानेंगे क्योंकि गुजरात में कांग्रेस की सरकार आ रही है.’

बीजेपी से क्यों नाराज हैं मछुआरे?

दरअसल मछुआरा समाज के कार्यक्रम के आयोजन में समाज की तरफ से पोरबंदर माछीमार बोट एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत भाई मोदी ने ही राहुल गांधी के सामने अपना पक्ष रखा. भरत भाई मोदी लंबे वक्त से बीजेपी से जुड़े रहे हैं. इससे पहले वो बीजेपी के पोरबंदर जिले के महामंत्री भी रह चुके हैं. ऐसे में चुनावी माहौल में राहुल गांधी के मंच पर उनके जाने से हवा के रुख का अंदाजा लग सकता है.

Bharat Bhai Modi

भरत भाई मोदी लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं लेकिन इस बार वो राहुल गांधी से प्रभावित दिख रहे हैं

चर्चा शुरु हो गई कि क्या माछीमार बोट एसोसिएशन के अध्यक्ष पाला बदलने की तैयारी में हैं. लेकिन, रैली के बाद बातचीत के दौरान भरत मोदी का कहना था कि ‘हम बीजेपी के साथ हैं लेकिन, जब बात समाज की आती है तो हम समाज के साथ रहेंगे. इसके लिए राहुल गांधी तो क्या हमें पाकिस्तान भी जाकर बात करनी पड़े तो करेंगे.’

जितनी आसानी से वो यह बात कर के निकल जा रहे हैं बात बस इतनी भर नहीं है. क्योंकि इस बार पोरबंरदर के तट पर बसे मछुआरों में रोष का माहौल देखने को मिल रहा है. भरत मोदी का राहुल के मंच पर  जाना उसी रोष का प्रतीक बन गया है.

राहुल की रैली के दौरान उनके भाषण को गौर से सुन रहे गोविंद भाई खारवा का कहना था कि ‘मेरी मां है, बीवी है और चार बच्चे हैं लेकिन, हमारा सहारा तो बस नाव ही है. लेकिन पिछली बार जो वादा बीजेपी ने किया था वो पूरा ही नहीं किया.’

मनसुख भाई परमार का कहना था कि ‘हमारे पास तो बस यही एक कारोबार है. लेकिन, हमारी बातों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा.’

Boats

पोरबंदर के समुद्र में छोटे और बड़े नावों की पार्किंग की समस्या बड़ी है

डीजल और केरोसिन पर सब्सिडी में कटौती से मछुआरे नाराज 

दरअसल, पोरबंदर में मछुआरा समाज इस बात से खफा है कि डीजल और केरोसिन ऑयल पर मिलने वाली सब्सिडी में कटौती कर दी गई है. पहले छोटे मछुआरों को 250 लीटर केरोसिन सब्सिडी के तौर पर मिलता था. मगर अब यह घटकर 32 लीटर तक हो गया है. इसलिए बाकी के तेल खुले मार्केट से लेना पड़ता है जो महंगा पड़ता है.

इसी तरह डीजल पर भी सब्सिडी घटाए जाने से बड़े मछुआरे बीजेपी से नाराज हो गए हैं.

पाकिस्तान की जेलों में भी इस वक्त लगभग 500 भारतीय मछुआरे कैद हैं. मछुआरा समाज को लग रहा है कि सरकार उनकी रिहाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है.

बोट एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत मोदी का कहना है, ‘पहले यह समस्या नहीं थी. लेकिन, इसकी शुरुआत 90 के दशक में शुरु हो गई जब प्रदूषण के चलते मछली किनारे नहीं आती. मजबूरन हमें फिशिंग के लिए समुद्र में दूर जाना पड़ता है’. भरत मोदी कहते हैं कि ‘पाकिस्तान की सीमा नजदीक होने के चलते मछुआरे भटक जाते हैं और गलती से अगर उधर चले जाते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है.’

Gujrat Sea

पहले की तुलना में मछुआरों को अब फिशिंग के लिए समुद्र में दूर तक जाना पड़ता है

दरअसल, छोटे और बड़े बोट की पार्किंग को लेकर इस इलाके में बड़ी समस्या है और ड्रेगिंग नहीं होने से भी मछुआरे नाराज हैं. ड्रेगिंग यानी समुद्र के किनारे वाले इलाके में पानी की सफाई कराने के लिए मछुआरों ने खुद अपनी जेब से बीस लाख रुपए खर्च किए हैं.

मछुआरों को राहुल पर कितना भरोसा?

राहुल गांधी की सभा के दौरान भी कई मछुआरों से फ़र्स्टपोस्ट ने बात की लेकिन, सबने इस बार बीजेपी के बजाए कांग्रेस को ही वोट देने की बात कही. बीजेपी को लेकर इनके भीतर की नाराजगी राहुल पर भरोसे के तौर पर सामने आ रही है.

इन मछुआरों के भीतर राहुल गांधी की एक झलक पाने की होड़ लगी थी. युवा, बुजुर्ग और महिला सभी राहुल गांधी को लेकर काफी उत्साहित दिखे. राहुल ने भी इनका भरोसा नहीं तोड़ा. अभी तो बस वादा करना था तो फिर क्या था, सत्ता में आने पर सभी मांगों को पूरा करने का वादा कर दिया.

लेकिन, राहुल गांधी का भाषण पूरी तरह से इन मछुआरों पर ही केंद्रित रहा. उनकी दुखती रग पर हाथ रखकर राहुल ने सब्सिडी के मुद्दे को गरमा दिया. उनकी कोशिश है कि पिछली बार की तरह इस बार मछुआरे फिर से मोदी के नाम पर न खिसक जाएं.

यह भी पढ़ें: गुजरात चुनाव 2017: पटेलों के गढ़ में फंसी बीजेपी को मोदी का ही आसरा

हालांकि रैली खत्म होने के बाद हमने पोरबंदर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कुछ और मछुआरों से बात करने की कोशिश की. इस दौरान मछुआरा समाज के कुछ युवक एक साथ मिल गए. पान की दूकान पर खड़े राजू भाई खारवा, किरीट भाई खारवा और राजेश भाई खारवा राहुल गांधी की रैली में नहीं गए थे. लेकिन, इनका भी यही कहना था कि इस बार कांग्रेस का वोट ज्यादा है, समाज जहां तय करेगा वहां वोट करेंगे.

Gujrat Voters

पोरबंदर में राहुल गांधी को देखने और सुनने के लिए मछुआरा समाज में काफी उत्सुकता थी

दांव पर अर्जुन मोढ़वाडिया की साख

पोरबंदर विधानसभा क्षेत्र में 30 हजार से ज्यादा मछुआरा वोटर हैं जो निर्णायक भूमिका में माने जाते हैं. लेकिन, गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके अर्जुन मोढ़वाडिया ने इस बार मछुआरों को अपने पाले में लाने के लिए पूरा जोर लगा रखा है.

मोढ़वाडिया पिछली बार यहां से चुनाव हार गए थे. मेहर जाति से आने वाले अर्जुन मोढ़वाडिया के सामने बीजेपी ने मेहर जाति के ही बाबू भाई बोखरिया को उतार दिया था. पोरबंदर सीट से अर्जुन मोढ़वाडिया 2002 से 2012 तक लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं. इस दौरान वो गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं. लेकिन, 2012 में बीजेपी के दांव ने कांग्रेस के इस दिग्गज नेता को चित कर दिया था.

पोरबंदर इलाके में मेहर समाज के मतों की तादाद लगभग 67 हजार है. जबकि 30 हजार लोहाना और लगभग 30 हजार ही मछुआरों का वोट है. इलाके में मुस्लिम वोटों की संख्या लगभग 15 हजार तक है.

अर्जुन मोढ़वाडिया को उम्मीद है कि इस बार मेहर समुदाय के वोटों के साथ-साथ मछुआरा समाज अगर उनकी तरफ हो जाए तो समीकरण उनके पक्ष में आ सकता है.

Arjun Modhwadia

राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के दिग्गज उम्मीदवार अर्जुन मोढ़वाडिया (फोटो: फेसबुक से साभार)

मछुआरों ने पिछली बार खुलकर बीजेपी का साथ दिया था. लेकिन, इस बार राहुल का जादू मछुआरों के ऊपर चढ़ता दिख रहा है. अब नरेंद्र मोदी राहुल के जादू से मछुआरों को बाहर निकाल पाएंगे कि नहीं इस पर सबकुछ निर्भर करेगा.

लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बापू की धरती पोरबंदर आने से पहले ही बीजेपी के भरत भाई मोदी ने राहुल गांधी के मंच पर जाकर बीजेपी खेमे में खलबली मचा दी है.

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