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गुजरात राज्यसभा चुनाव: बड़ी मुश्किल है डगर अहमद पटेल की?

अगर वाघेला अपने मकसद में कामयाब हो गए तो आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव से पहले अपने विधायकों की भगदड़ को रोक पाना मुश्किल होगा

Updated On: Aug 08, 2017 10:45 AM IST

Amitesh Amitesh

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गुजरात राज्यसभा चुनाव: बड़ी मुश्किल है डगर अहमद पटेल की?

राज्यसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले गुजरात कांग्रेस के 44 विधायक वापस अपने गृह-राज्य पहुंच गए हैं. लेकिन, अपनी घर वापसी के बावजूद ये विधायक अपने घर नहीं जा पा रहे हैं.

रक्षा बंधन के त्योहार के बावजूद घर जाने के बजाए इन्हें निगरानी में ही रखा गया है. डर है कहीं विरोधियों की तरफ से दिए जा रहे लॉलीपॉप को देखकर इन सबका हृदय परिवर्तन ना हो जाए. डर है ये विधायक विरोधी खेमे के संपर्क में आ गए तो फिर बेंगलुरु-प्रवास का पूरा का पूरा प्लान एक झटके में टांय-टांय फिस्स हो जाएगा. अब इसी डर ने इन विधायकों को एक रात और रिसार्ट में गुजारने पर मजबूर कर दिया है. फर्क सिर्फ इतना है कि वोटिंग के पहले की आखिरी रात बेंगलुरु के रिसार्ट में नहीं बल्कि गुजरात के आणंद जिले की रिसार्ट में कटेगी.

कांग्रेस को क्या है डर

कांग्रेस को डर है कि आठ अगस्त को होने वाली वोटिंग से पहले कभी भी खेल खराब ना हो जाए. लिहाजा वोटिंग के दिन सुबह-सुबह कांग्रेसी विधायक गांधीनगर के लिए प्रस्थान करेंगे. कांग्रेस के मुख्य सचेतक शैलेश परमार ने आणंद में संवाददाताओं से कहा, हमारे सभी विधायक वापस लौट आये हैं और आणंद के एक रिसॉर्ट में रूके हुए हैं. हवाईअड्डे से सभी विधायकों को सीधा निजाणंद नामक रिसॉर्ट में ले जाया गया है.

अहमद पटेल के लिए चुनाव बना प्रतिष्ठा का सवाल

इस बार गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए वोटिंग हो रही है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का राज्यसभा पहुंचना तय है. लेकिन, असली लड़ाई तीसरी सीट को लेकर है. इस सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और सोनिया गांधी के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल मैदान में हैं.

लेकिन, कांग्रेस के बागी नेता शंकर सिंह वाघेला ने उनके लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के गुजरात में क्लीन स्वीप की रणनीति के तहत राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए बलवंत सिंह राजपूत को मैदान में उतारा गया है. बलवंत सिंह शंकर सिंह वाघेला के समधी हैं. अब अपने समधी को जिताने की वाघेला की कोशिश अहमद पटेल को परेशान कर रही है.

बलवंत सिंह के उम्मीदवार बनने के बाद से ही गुजरात कांग्रेस के 6 विधायकों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. इनमें से तीन ने तो सीधे बीजेपी का दामन भी थाम लिया है. कांग्रेस के 57 में से 6 विधायकों के इस्तीफे के बाद अब उसके पास 51 विधायक बचे हैं.

इ़न 51 विधायकों में से महज 44 ही इस वक्त कांग्रेस की निगरानी में हैं जिन्हें आणंद जिले के रिसार्ट में लाया गया है. कांग्रेस को डर है कि कहीं इन 44 में से भी कुछ विधायक खिसक गए या पाला बदल कर वोट कर दिया तो फिर अमहद पटेल का फिर से राज्यसभा जाना मुश्किल हो जाएगा.

अहमद पटेल को राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 45 मतों की जरुरत है. कांग्रेस का दावा है कि 44 विधायकों के अलावा एनसीपी के दो विधायक उसका साथ देंगे और वो आसानी से जीत का आंकड़ा छू लेगी. कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा है कि हमें अपनी जीत को लेकर विश्वास है. सभी विधायक हमारे साथ हैं.

पता चल जाएगा वाघेला में कितना है दम ?

अहमद पटेल के दावों में कितना दम है, इसका जल्द ही पता चल जाएगा. लेकिन, राज्यसभा चुनाव के जरिए असली परीक्षा वाघेला की शक्ति की भी होगी. कांग्रेस आलाकमान से नाराज शंकर सिंह वाघेला ने राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के सबसे बड़े रणनीतिकार अहमद पटेल को हराने के लिए जो दांव चला, अगर वो दांव कारगर हो गया तो फिर गुजरात की सियासत में वाघेला का कद एक बार फिर काफी बड़ा हो जाएगा.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बुने सियासी तानेबाने का ही नतीजा है कि शंकर सिंह वाघेला इस वक्त बीजेपी के करीब होते दिख रहे हैं. भले ही खुलकर बीजेपी के साथ ना खड़े हों, लेकिन, उनकी नीयत कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की है.

अगर वाघेला अपने मकसद में कामयाब हो गए तो आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव से पहले अपने विधायकों की भगदड़ को रोक पाना मुश्किल होगा. लेकिन, वाघेला अगर अहमद पटेल को पटखनी देने की कोशिश में विफल हो गए तो फिर उनकी ताकत के उपर भी सवाल खड़े होंगे. तब शायद बीजेपी भी उनको उतनी अहमियत ना दे.

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