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गुजरात चुनाव 2017: एक गांव ऐसा भी, जहां मतदान नहीं किया तो भरना पड़ेगा जुर्माना

गांव के लोगों ने यह नियम बनाया है जिसमें मतदान से गैर-हाजिर रहने वालों पर 51 रुपए का जुर्माना लगता है. इससे पिछले चार चुनावों में गांव में मतदान का प्रतिशत 90 से 95 फीसदी तक रहा है

Amitesh Amitesh Updated On: Nov 22, 2017 11:47 AM IST

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गुजरात चुनाव 2017: एक गांव ऐसा भी, जहां मतदान नहीं किया तो भरना पड़ेगा जुर्माना

राजकोट से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर एक अनोखा गांव है, जहां मतदान अनिवार्य है. मतदान से अगर दूर हुए तो फिर जुर्माना भरने के लिए तैयार रहना होगा. अनिवार्य मतदान को लेकर इस गांव के अपने ही लोगों की तरफ से यह नियम बनाया गया है जिसमें मतदान से गैर-हाजिर रहने पर 51 रुपए का जुर्माना भरना होगा.

राजकोट-भावनगर हाईवे से सटा यह गांव चुनावी सरगर्मी के बीच पूरे इलाके में चर्चा के केंद्र में हैं. इस गांव का नाम राजसमडियाला है.

राजसमडियाला राजकोट ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है. इस गांव में अनिवार्य मतदान की शुरुआत 1983 में उस वक्त हुई जब हरदेव सिंह जाडेजा गांव के सरपंच बने थे. इसके 34 वर्ष बाद भी आज राजसमडियाला गांव में मतदान अनिवार्य है.

हरदेव सिंह जाडेजा कहते हैं, ‘शुरुआती दौर में लोगों पर जुर्माना लगाया भी गया लेकिन, यह अब बीते दिनों की बात हो गई है. अब लोग जागरूक हो गए हैं. पिछले 10-15 वर्षों से तो किसी पर जुर्माने की नौबत नहीं आई है. अगर किसी को जरूरी काम से या इमरजेंसी में मतदान से दूर रहना है तो उस बाबत वो गांव के लोक-अदालत के सामने दरख्वास्त के बाद अनुमति लेकर चला जाता है.’

Gujrat Village

हरदेव सिंह जाडेजा-अशोक वाघेरा

गांव में मतदान का प्रतिशत 90 से 95 फीसदी तक रहा 

इसका असर भी दिखता है. पिछले चार चुनावों में गांव में मतदान का प्रतिशत 90 से 95 फीसदी तक रहा है. लेकिन, 100 फीसदी मतदान नहीं होने पर सवाल पूछे जाने पर गांव के मौजूदा सरपंच अशोक भाई वाघेरा कहते हैं ‘मतदाता सूची में उन लोगों का भी नाम होता है जिनकी मृत्यु हो गई है. इसके अलावा गांव की बेटियों की शादी के बाद उनके दूसरे गांव में चले जाने से भी उनका नाम मतदाता सूची में रह जाता है’. यानी मतदाता सूची के अपडेट नहीं होने के कारण भी शत-प्रतिशत मतदान नहीं हो पाता है. फिर भी, 90 फीसदी या इससे ज्यादा मतदान होना खुद में बड़ी बात है.

गांव के कायदे-कानून सख्त हैं 

अनिवार्य मतदान के अलावा भी इस गांव में कई और अपने कानून हैं जो काफी सख्त हैं. इसको नहीं मानने वालों पर गांव की लोक अदालत दंड लगाकर जुर्माने की राशि वसूल करती है.

गांव में अंदर घुसते ही चौराहे पर गुजराती में लिखे दो बोर्ड दिख जाते हैं जिनमें गांव के कायदे-कानून और गांव में उपलब्ध सुविधाओं का जिक्र किया गया है. गांव में प्रवेश करते ही स्थानीय हरित भाई इन नियमों से वाकिफ कराने लगते हैं. राजसमडियाला गांव की लोक अदालत के नियम के मुताबिक, गांव में कचरा फेंकने, गुटखा सेवन करने और बेचने पर 51 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है.

Gujrat Village

गांव के अंदर चौराहे पर लगा बोर्ड जिसमें कायदा-कानून विस्तार से लिखा हुआ है

बड़ी गलतियों के लिए दंड भी बड़ा होता है. मसलन, शराब का सेवन करने और उसे बेचने पर जुर्माना परिस्थिति के हिसाब से लगाया जाता है. गांव की अपनी लोक अदालत में ही सारे विवादों के निपटारे करने की व्यवस्था की गई है. लेकिन, अगर कोई लोक अदालत की बात ना मानकर आगे मुकदमा के लिए जाता है तो उसको भी 501 रुपए का जुर्माना भरना होगा.

पर्यावरण की दृष्टि से भी गांव में सख्त नियम है. मसलन, बिना अनुमति पेड़ की डाली काटने पर 551 रुपए जुर्माने का प्रावधान है जबकि गांव में प्लास्टिक का उपयोग करने या प्लास्टिक का कचरा बाहर फेंकने पर 51 रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा.

हालांकि गांव की दुकान को बच्चों के खाने के लिए चिप्स, कुरकुरे जैसी उन चीजों के लिए प्लास्टिक का इस्तेमान करने की इजाजत है जिसका कोई और विकल्प नहीं है.

गांव में ही जनरल स्टोर की दुकान चला रहे गोपाल गिरि गोसाईं को पिछले महीने ही 51 रुपए का जुर्माना भरना पड़ा था. दरअसल, चिप्स के पैकेट पर दुकानदार को स्केच पेन से खरीदार का नाम लिखना पड़ता है. ऐसा करने से चिप्स खाकर प्लास्टिक फेंकने वाले की पहचान हो जाएगी. लेकिन, गोपाल गिरि ने बिना लिखे ही चिप्स का पैकेट बेच दिया था.

गांव की सड़क पर चिप्स का पैकेट दिखने के बाद लोक अदालत ने दुकानदार गोपाल गिरि पर जुर्माना लगा दिया. फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में गोपाल गिरि स्वीकार करते हैं कि उनसे गलती हुई थी. फिर भी वो इस कदम को सही बता रहे हैं.

Gujrat Village

गांव के दुकानदार गोपाल गिरि

जितनी बड़ी गलती उतना बड़ा चुकाना पड़ता है जुर्माना

हालांकि गांव में अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना शराब सेवन को लेकर लिया गया था. वर्ष 2007 में एक शादी समारोह में बाबा भाई कानपरिया को मेहमानों को दारू पिलाना काफी महंगा पड़ गया. लोक अदालत ने बाबा भाई पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया जिसे उन्हें चुकाना पड़ा था.

यह जानकर मेरी भी उत्सुकता बाबा भाई से मिलने की हुई. लेकिन, घर पर जाने पर उनके यहां ताला लगा था. वो इलाज के लिए राजकोट गए थे. लेकिन, पड़ोसियों ने बातचीत के दौरान पूरी कहानी बयां कर दी.

बाबा भाई के पड़ोसी दिनेश भाई कनपरिया का कहना था ‘वाड़ी में दारू पीतो तो बीचे राते, दिन में तपास करता दारू ने खाली बोतल ने चबानू’. इसका मतलब ‘खेत के अंदर में रात में मेहमानों का दारू पिलाया गया था, लेकिन, दिन में चेकिंग के दौरान एक खाली बोतल मिल गया था.’

एक दूसरे पड़ोसी जगदीश काकरिया ने भी जुर्माने की बात को स्वीकार करते हुए कहा ‘8 बजे लग्न नू प्रसंग हतो, 10 बजे मेहमान नू दारू पीर सो, सबरे कमेटी ने माहि दी मलता तपास करता, एक खाली बोतल उने चबानू’. यानी ‘8 बजे शादी समारोह हुआ, फिर 10 बजे मेहमान को दारू पिलाया गया. सुबह जब लोक अदालत के सदस्यों ने चेकिंग की तो फिर एक खाली बोतल मिल गया.’

इसके बाद लोक अदालत ने 10 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया. आखिरकार बाबा भाई को जुर्माना भरना पड़ा.

हरदेव सिंह जाडेजा कहते हैं, ‘हम गांधी नहीं गीता का अनुसरण करने वाले हैं. कोई शराब पीता है तो उसके साथ सत्याग्रह नहीं करना है, बल्कि उसे दंड देना है.’

Gujrat Village

सख्ती है तो सुविधाएं भी कम नहीं

गांव में सख्त नियम-कानून हैं मगर इसका विकास भी खूब हुआ है. आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदर्श ग्राम योजना की बात करते हैं तो उनके ही गृह राज्य गुजरात में स्थित यह एक ऐसा गांव है जो अपने दम पर विकास की नई कहानी लिख रहा है.

गांव के लोगों से लिए जा रहे सालाना शुल्क और सरकारी योजनाओं के ठीक से क्रियान्वयन के तहत गांव में विकास साफ-साफ दिख रहा है. पूरे गांव की सड़क पीसीसी होने के साथ-साथ, गांव में हर घर में शौचालय, हर घर को बिजली, हर घर को पानी, गांव की गलियों के लिए सोलर सिस्टम से चलने वाली स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरे, गांव में अपनी अलग से पानी टंकी और हेल्थ सेंटर होने के साथ-साथ अब तो फ्री वाई-फाई की भी सुविधा हो गई है.

ग्राम-पंचायत की तरफ से खुद की चलाई जा रही दुकान में सस्ते अनाज की भी सुविधा है. राजसमडियाला गांव में स्कूल भी है, मंदिर भी है, लोगों में एकता भी है, विवाद भी दूर-दूर तक नहीं होता. लेकिन, गांव का क्रिकेट स्टेडियम यहां आने वालों को एक बार सोचने पर मजबूर कर देता है.

गांव में लोगों से बातचीत करने के बाद जब हमने गांव के क्रिकेट स्टेडियम का दौरा किया तो देखकर लगा कि कहीं राजकोट शहर के किसी ग्राउंड तो नहीं पहुंच गए.

शाम के वक्त दूधिया रोशनी में नहाया क्रिकेट ग्राउंड उसमें चल रहे मैच का नजारा देखते ही बनता था. राजकोट शहर से खेलने के लिए आए महबूब ने कहा कि ‘यहां तो स्टेट लेवेल के भी लोग खेलने के लिए आते हैं. यहां का ग्राउंड बहुत अच्छा है.’

पाटीदार बहुल गांव में चुनाव पर नहीं कोई चर्चा

राजसमडियाला गांव की कुल आबादी 1700 से ज्यादा है जिसमें 1000 से ज्यादा मतदाता हैं. गांव में 65 फीसदी से ज्यादा घर पाटीदारों के हैं. लोक-अदालत के अध्यक्ष हरदेव सिंह जाडेजा का कहना है कि लोक-अदालत के 11 सदस्यों हर जाति के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया गया है जिससे कायदे-कानून को सख्ती से लागू किया जा सके.

दरअसल, यह लोक-अदालत गांव की अपनी गवर्निंग बॉडी है. लोक-अदालत ग्राम-पंचायत के कामों पर नजर रखने के साथ-साथ उसकी योजनाओं को ठीक से लागू भी करवाती है.

लेकिन, चुनावी सरगर्मी के बीच इस गांव में चुनाव पर कोई चर्चा नहीं हो रही है. न ही कोई बोलने को तैयार है और न ही कहीं किसी पार्टी का झंडा या पोस्टर दिख रहा है, क्योंकि गांव के नियम के मुताबिक यहां राजनीतिक दलों के नुमाइंदों को भी वोट मांगने आने से मना कर दिया गया है.

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