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जिस अहमदाबाद में पाटीदारों पर हुआ था लाठीचार्ज वहीं आंदोलन का असर नहीं

हार्दिक पटेल की सभाओं में जुटने वाली भीड़ वोटों में तब्दील होगी या नहीं यह बड़ा सवाल है. लेकिन, जीएमडीसी ग्राउंड और अहमदाबाद के इलाके में हार्दिक पटेल को समर्थन नहीं दिख रहा है

Updated On: Dec 04, 2017 11:16 AM IST

Amitesh Amitesh

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जिस अहमदाबाद में पाटीदारों पर हुआ था लाठीचार्ज वहीं आंदोलन का असर नहीं

अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में रविवार सुबह अलग-अलग टोलियों में जमा लड़के क्रिकेट खेलते दिख गए. छुट्टी का दिन होने की वजह से सुबह-सुबह लोगों का हुजूम यहां चला आया था. सभी लड़के क्रिकेट खेलने में मस्त दिखे.

फिलहाल इस ग्राउंड में किसी तरह की कोई चुनावी चर्चा नहीं दिख रही थी. लेकिन, लगभग 2 साल पहले 25 अगस्त, 2015 को इस ग्राउंड में पाटीदार आंदोलन के वक्त जो कुछ भी हुआ, पूरे गुजरात में चर्चा के केंद्र में वही है. उस दिन आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे पाटीदार आंदोलनकारियों के खिलाफ जिस तरह से पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, उसके बाद ही पाटीदार आंदोलन काफी उग्र हो गया था. पुलिस की फायरिंग में कई पाटीदारों की जान भी चली गई थी.

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अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड पर साल 2015 में पाटीदार आंदोलन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था

पाटीदार आंदोलन का असर चुनाव में बीजेपी की हार के लिए नाकाफी 

साणंद के एल जे इंस्टीट्यूट से एमबीए की पढ़ाई कर रहे दो दोस्त सुबह-सुबह क्रिकेट खेलने जीएमडीसी ग्राउंड पहुंचे हुए थे. विनय भाई कोष्ठी और उजैफा दोनों से जब पाटीदार आंदोलन और इस ग्राउंड में उस वक्त के माहौल को लेकर बात होने लगी तो इनका कहना था कि अब इस आंदोलन का कोई असर नहीं है.

विनय भाई कोष्ठी का कहना था कि ‘चाहे कुछ भी हो जाए यहां से तो बीजेपी ही जीतेगी’. उजैफा ने भी इस वक्त आंदोलन के असर को बीजेपी की हार के लिए नाकाफी बता दिया.

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विनय भाई कोष्ठी और उजैफा

भले ही अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड पर आज पाटीदार आंदोलन को लेकर कोई चर्चा नहीं दिख रही हो, लेकिन, चुनाव के वक्त जिस तरह से बीजेपी को कई जगहों पर पटेलों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, उसकी शुरूआत इसी जीएमडीसी ग्राउंड से हुई थी. जीएमडीसी ग्राउंड पर ही क्रांति रैली में हुए हंगामे ने हार्दिक के कद को बड़ा कर दिया था.

आंदोलन के वक्त पहली बार लगा था कि सरकार की पकड़ थोड़ी ढीली लग रही है. मुद्दे को उस वक्त ठीक से संभाला नहीं जा सका. धीरे-धीरे नाराजगी इस कदर बढ़ गई कि उस वक्त की मुख्यमंत्री आनंदी बेन को इस्तीफा देना पड़ गया.

आनंदी बेन पटेल की कुर्सी तो गई लेकिन, यह पहली बार हुआ कि किसी राज्य की मुख्यमंत्री ने फेसबुक पर पहले अपना इस्तीफा पोस्ट किया था. शायद यह आनंदी बेन की नाराजगी भी थी, जिसके चलते उन्होंने इस अंदाज में अपना इस्तीफा दे दिया.

बीजेपी ने विजय रुपाणी को प्रदेश की कमान सौंप दी. लेकिन, अब हार्दिक पटेल अपनी सभी सभाओं में इस बात को लेकर हमला करते दिख रहे हैं. हार्दिक और उनके साथियों के निशाने पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ही दिख रहे हैं. हार्दिक अपने संबोधन में आरोप लगा रहे हैं कि क्रांति रैली के दौरान अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में हुई लाठीचार्ज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के इशारे पर ही हुआ था.

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हार्दिक पटेल अपनी जनसभाओं और रैलियों में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर जमकर निशाना साध रहे हैं

कोशिश है हार्दिक के कांग्रेस को समर्थन की धार कमजोर की जाए

कांग्रेस और हार्दिक के बीच हुए समझौते को दो मूर्खों के बीच का समझौता बताने वाली बीजेपी, कांग्रेस को पटेल विरोधी बता रही है. कोशिश है हार्दिक के कांग्रेस को समर्थन की धार कमजोर की जाए. लेकिन, पलटवार हार्दिक की तरफ से भी हो रहा है. आनंदी बेन पटेल के मुख्यमंत्री के पद से हटने के पीछे भी हार्दिक पटेल की तरफ से बीजेपी अध्यक्ष को ही निशाने पर लिया जा रहा है. हार्दिक पटेल लगातार अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में पुलिस के लाठीचार्ज के मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन, अहमदाबाद शहर के इलाकों में हार्दिक की बात का कोई असर नहीं दिख रहा.

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अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके के रहने वाले आकाश पटेल का कहना है कि ‘इधर हार्दिक पटेल के आंदोलन का कोई असर नहीं है’. आकाश के दोस्त सावन पटेल भी ऐसा ही मानते हैं. अहमदाबाद के के के नगर के रहने वाले विकास और आकाश जीएमडीसी ग्रांउड में उस आंदोलन के गवाह भी हैं लेकिन, हार्दिक का कांग्रेस का साथ जाना उन्हें रास नहीं आया. वो फिर से बीजेपी को वोट करने की बात कर रहे हैं.

के के नगर में ही थोड़ी ही दूरी पर हमारी मुलाकात अमरीश पटेल से हुई जो कि आंदोलन के दौरान हार्दिक पटेल की कोर टीम के हिस्सा थे. लेकिन, उन्होंने भी हार्दिक का साथ छोड़कर अब बीजेपी का दामन पकड़ लिया है.

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गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके से आती हैं

घाटलोडिया इलाका पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल का चुनाव क्षेत्र रहा है. लेकिन, इस बार आनंदी बेन पटेल चुनाव मैदान में नहीं हैं. हार्दिक पटेल के गुजरात में असर को कम करने के मकसद से बीजेपी ने आनंदी बेन पटेल को चुनाव लड़ाने की पूरी कोशिश भी की. लेकिन, बेन नहीं मानीं.

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओम माथुर को आनंदी बेन पटेल को मनाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन, यह सारी कोशिश फेल हो गई. आनंदी बेन ने चुनाव लडने से मना कर दिया. हांलांकि उन्हें खुश करने के लिए बीजेपी ने उनके बेहद करीबी भूपेंद्र पटेल को घाटलोडिया से चुनाव मैदान में उतारा है.

क्षेत्र की मुख्यमंत्री ना होने से इलाके के लोगों में थोड़ी कसक 

फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में भूपेंद्र पटेल कहते हैं, ‘क्षेत्र की मुख्यमंत्री ना होने से इलाके के लोगों में थोड़ी कसक तो जरूर रहती है. फिर भी बेन की सक्रियता उतनी ही है. हमारे क्षेत्र में पटेल के आंदोलन का कोई असर नहीं है’. भूपेंद्र पटेल के दावे की हकीकत जानने के लिए हम आनंदी बेन पटेल के गांव शिकंज पहुंचे तो वहां भी माहौल बीजेपी के पक्ष में ही लगा. गांव में चाय पर चर्चा कर रहे कुछ लोग मिल गए.

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शैलेश भाई पटेल का कहना था कि ‘पाटीदारों की समझ में आ गया है कि अनामत तो होगा ही नहीं, लिहाजा कांग्रेस में जाने का कोई मतलब नहीं है’. कौशिक पंचाल का कहना था ‘हमें तो बीजेपी का ही साथ देना है.’

घाटलोडिया के बाद हमने बगल की सीट नारनपुरा का भी हाल जानने की कोशिश की. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की परंपरागत सीट मानी जाने वाली नारनपुरा पर इस बार बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता और कई बार विधायक रह चुके कौशिक पटेल चुनाव मैदान में हैं. अमित शाह हार्दिक पटेल के निशाने पर लगातार हैं, लेकिन, अमित शाह के पुराने क्षेत्र नारनपुरा में बीजेपी को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं दिख रही है.

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नारनपुरा इलाके में रहने वाले रमेश भाई पटेल का कहना था कि ‘हार्दिक पटेल भटक गया है. पहले अनामत का मामला था तो ठीक था, लेकिन, अब वो भटक कर कांग्रेस के साथ चला गया है.’

बीजेपी के लिए अहमदाबाद शहर में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं दिख रही है. लेकिन, अहमदाबाद में दो साल पहले जीएमडीसी ग्राउंड में जो कुछ हुआ था उसको मुद्दा बनाकर हार्दिक पटेल राजकोट से लेकर सूरत तक का चक्कर लगा रहे हैं.

इस चुनाव में चर्चा युवा और बुजुर्ग पटेलों की हो रही है 

अक्सर लेउवा और कड़वा पटेल के बीच बंटे पटेल समुदाय को लेकर हर बार चर्चा होती है. लेकिन, इस चुनाव में चर्चा युवा और बुजुर्ग पटेलों की हो रही है. हार्दिक की रैली में जुट रही भीड़ को हार्दिक पटेल खुद युवाओं के समर्थन और हुजूम के तौर पर देख रहे हैं. लेकिन, बीजेपी इसे कांग्रेस प्रायोजित भीड़ कहकर हार्दिक के दावे की हवा निकालने की कोशिश कर रही है.

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पहले राजकोट की रैली और फिर सूरत का रोड शो, हार्दिक पटेल की सभाओं में भीड़ दिख रही है. यह भीड़ वोटों में तब्दील होगी या नहीं यह एक बड़ा सवाल है. लेकिन, जीएमडीसी ग्राउंड और अहमदाबाद के इलाके में हार्दिक पटेल को समर्थन नहीं दिख रहा है.

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