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गुजरात चुनाव 2017: पीएम मोदी ने नहीं तोड़ी आचार संहिता, कांग्रेस की रणनीति कमजोर

चुनाव आयोग को पता है कि चुनाव हारने जा रही पार्टी अपने विरोधी और आयोग के खिलाफ ज्यादा शोर मचाती है. अभी तक कांग्रेस कह रही थी कि वह गुजरात का चुनाव जीतने जा रही है लेकिन अब उसके सुर बदल गए हैं

Sanjay Singh Updated On: Dec 15, 2017 09:54 AM IST

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गुजरात चुनाव 2017: पीएम मोदी ने नहीं तोड़ी आचार संहिता, कांग्रेस की रणनीति कमजोर

चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल में शायद कांग्रेस कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गई है. रणदीप सुरजेवाला ने चुनाव आयोग को बीजेपी का अग्रणी संगठन, बंधक, कठपुतली आदि करार देकर अपनी गरिमा गंवाई है और केंद्र की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की भी.

चुनाव आयोग स्वतंत्र, स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और प्रधानमंत्री के अहमदाबाद के मतदान केंद्र पर पहुंचने पर किसी रोड शो के जैसा समां बंध गया तो कांग्रेस को लग रहा है कि चुनाव आयोग ने इसके खिलाफ कार्रवाई ना करके मानो महापाप कर दिया हो. कांग्रेस को लग रहा है कि प्रधानमंत्री ने जानते-बूझते और खुलेआम चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किया और चुनाव आयोग ने कार्रवाई नहीं की तो इसलिए कि वह सत्ताधारी पार्टी और कार्यपालिका के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति (प्रधानमंत्री) के आगे एकदम नतमस्तक हो गया है.

असल में क्या हुआ था?

आइए, पहले यही समझ लें कि प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग पर लगाए कांग्रेस के आरोपों में कोई तुक की बात है भी या नहीं. भारतीय नौसेना के एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद मोदी मुंबई से अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से रनीप के अपने निर्धारित मतदान-केंद्र तक कार से गए. प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोग खड़े थे और कार की अगली सीट पर बैठे प्रधानमंत्री ने लोगों की तरफ देखकर स्वागत-भाव से हाथ हिलाया.

इसके बाद प्रधानमंत्री बाकी आम मतदाताओं के साथ कतार में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतजार करने लगे. वोट डालने के बाद मोदी बाहर निकले, कुछ दूरी पर पार्क की गई अपनी कार तक पैदल चलकर गए और उन्हें देखने के लिए जो बड़ी तादाद में लोग खड़े थे उनकी तरफ स्वागत भाव से हाथ हिलाया. भीड़ बड़े उत्साह और जोश में थी. मोदी ने उसकी तरफ हाथ हिलाते हुए मतदान करने की निशानी के तौर पर स्याही लगी अंगुली दिखाई. इसके बाद वे कार पर सवार हुए और एक बार फिर से हाथ हिलाया. मतदान-केंद्र के बाहर का नजारा सचमुच किसी रोड शो ही की तरह था लेकिन दरअसल वह रोड शो था नहीं.

अब चुनाव आयोग मोदी पर इस बात के लिए तो कार्रवाई नहीं ही कर सकता ना कि वे कुछ दूर चलते हुए गए और किसी का पांव दब गया या फिर इस बात के लिए कि वे कतार में लगे, अपनी बुलेटप्रूफ एसयूवी कार के फुटरेस्ट पर खड़े हो गए और लोगों की तरफ देखकर हाथ हिलाया, स्याही लगी अंगुली दिखाई. इस पूरे वाकए के दौरान मोदी ने एक शब्द नहीं कहा, यह भी नहीं कि लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में आएं और वोट डालें.

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चुनाव आयोग सड़क के दोनों तरफ खड़े होने वाले लोगों या फिर मतदान केंद्र पर आ जुटने वाले उन लोगों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं कर सकता जो एक ऐसे व्यक्ति की झलक पाना चाहते थे जिसने गुजरात पर 13 सालों तक शासन किया और अब प्रधानमंत्री है. इस भीड़ ने किसी नियम को नहीं तोड़ा. वह बस उत्साह में थी और उसने अपने नेता का स्वागत किया.

PM Modi casts his vote in Gujarat

कोई रोड शो नहीं हुआ. देश के बाकी नागरिकों की तरह प्रधानमंत्री को भी हक है कि वे अपने मतदान केंद्र में जाएं और अपना वोट डालें. अब बात ये है कि मोदी गुजरात के मतदाता हैं. चुनाव आयोग मोदी को वोट डालने से कैसे मना कर सकता है.

मोदी ने इस मौके पर सही रणनीति का फायदा उठाया

मोदी ने स्मार्ट (पैने) सोच का परिचय दिया. वे जानते हैं कि अपने सूबे में अब भी वे बहुत ज्यादा लोकप्रिय हैं सो अगर वे सड़क के रास्ते सफर करें और कुछ दूरी तक पैदल चलें तो ऐसा करने से लोग बड़ी संख्या में जुटेंगे ही. उनकी पार्टी ने ये किया कि उनके मतदान का वक्त और जिस रास्ते से वे आने वाले थे उसके बारे में जानकारी लीक कर दी. ऐसा करना भी किसी कानून का उल्लंघन नहीं है.

मतदान के दूसरे और अंतिम चरण के लिए प्रचार के बंद होने के एक दिन पहले राहुल गांधी की तरह मोदी को भी अहमदाबाद में रोड शो करने की अनुमति नहीं दी गई. कांग्रेस को मुश्किल ये सता रही है कि जमाना चौबीसों घंटे जारी रहने वाले लाइव टीवी का है, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय, डिजिटल और सोशल मीडिया ने अपनी सारी ऊर्जा गुजरात के चुनावों पर लगा रखी है, सो ऐसे में अहमदाबाद में मोदी को मिलते लोगों के भारी समर्थन की तस्वीरें उन सभी 93 चुनाव-क्षेत्रों में पहुंचीं जहां मतदान होने जा रहा था और इसका मतदाताओं पर असर पड़ सकता था. लेकिन कांग्रेस और चुनाव आयोग इसके खिलाफ कुछ कर भी नहीं सकते थे.

मोदी की चाल ने कांग्रेस को एकदम से हक्का-बक्का कर दिया और पार्टी जबतक वोटों के संभावित स्विंग (घुमाव) के संभावित असर को भांप पाती तबतक मोदी अपना काम करके निकल चुके थे. कांग्रेस के पास बस यही विकल्प बचा था कि वह चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराए और चुनाव आयोग के खिलाफ शिकायत करे.

IYC protest at EC office

पहले भी हो चुका है ऐसा

ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ जब कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर एक ही सांस में निशाना साधा है. साल 2014 के 24 अप्रैल के दिन जब यूपी समेत देश के कई हिस्सों में लोकसभा के लिए मतदान की प्रक्रिया जारी थी, नरेंद्र मोदी नामांकन का परचा भरने के लिए पवित्र नगरी बनारस पहुंचे. सड़कों पर लोगों का हुजूम लग गया. बीएचयू से लेकर जिला कलेक्टर के ऑफिस तक लोगों का जमघट था. मोदी एक खुली ट्रक पर सवार थे. वे लोगों की तरफ हाथ हिलाते हुए आगे बढ़ रहे थे लेकिन उन्होंने अपने मुंह से एक भी शब्द नहीं कहा.

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लोकसभा के चुनावों के दौरान मोदी को उनके ही निर्वाचन-क्षेत्र में एक चुनावी रैली करने की अनुमति नहीं दी गई थी. शायद देश की मीडिया और लोगों के लिए वह अब तक सबसे भड़कीला दृश्य था. कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ तीखा हमला बोला और चुनाव आयोग से लगातार शिकायत की. इसके बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग की शिकायत करनी शुरू की. मोदी के लिए वह दिन मन की मुराद पूरी करने वाला साबित हुआ. चुनाव चूंकि पांच-छह चरण में हो रहे थे तो निर्धारित अवधि में किसी भी समय कोई उम्मीदवार आकर नामांकन का परचा दाखिल कर सकता था. इसपर कोई मनाही नहीं थी सो ऐसा दृश्य तो उठ खड़ा होना ही था. रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभा रहे जिला मजिस्ट्रेट ने मोदी से कुछ देर का इंतजार करवाया, फिर वे नामांकन का परचा भरने के लिए ऑफिस में दाखिल हुए.

हालात के रुख को अपने पक्ष में मोड़ा

मोदी को अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में रैली करने की अनुमति नहीं मिली लेकिन उन्होंने एक बार फिर से लोगों से मिलने का रास्ता निकाल लिया. उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के दौरान वाराणसी के संकटमोचन मंदिर की यात्रा की. एक हफ्ते बाद मोदी फिर से विवाद के घेरे में आए और कांग्रेस ने उनपर हमला बोला जब उन्होंने अपना वोट डालने के बाद एक श्वेत-श्याम कमल (बीजेपी का चुनाव चिह्न) के साथ सेल्फी ली और एक छोटा सा बाइट दिया. जांच के बाद इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं दिखा.

NarendraModi_VoteSelfie

मोदी को अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में रैली करने की अनुमति नहीं मिली लेकिन उन्होंने एक बार फिर से लोगों से मिलने का रास्ता निकाल लिया.

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इस बार कांग्रेस मोदी और चुनाव आयोग के खिलाफ कुछ ज्यादा ही आक्रामक है. पार्टी के कार्यकर्ता विरोध जताने के लिए बड़ी संख्या में चुनाव आयोग के कार्यालय जा पहुंचे. पिछले वक्त के उदाहरण से चुनाव आयोग को पता है कि चुनाव हारने जा रही पार्टी अपने विरोधी और आयोग के खिलाफ ज्यादा शोर मचाती है. अभी तक कांग्रेस कह रही थी कि वह गुजरात का चुनाव जीतने जा रही है लेकिन अब उसके सुर बदल गए हैं.

Gujarat Election Results 2017

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