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गुजरात के नतीजे तय करेंगे कौन जीतेगा राजस्थान का रण

गुजरात में गहलोत का बेहतर प्रदर्शन न केवल राष्ट्रीय राजनीति में उनके कद को और मजबूत करेगा बल्कि अपने गृह राज्य राजस्थान में भी वो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए कड़ी चुनौती के तौर पर उभरेंगे

Updated On: Dec 17, 2017 10:30 PM IST

FP Staff

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गुजरात के नतीजे तय करेंगे कौन जीतेगा राजस्थान का रण

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों में बस कुछ वक्‍त बचा है.  इस चुनाव के नतीजों पर पड़ोसी राज्य राजस्थान की भी निगाहें हैं. इस बार कांग्रेस और बीजेपी ने नेतृत्व के लिए दो राजस्थानियों पर भरोसा जताया है.

कांग्रेस ने जोधपुर से आने वाले अनुभवी पॉलिटिशियन और दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत को प्रचार अभियान सौंपा है जबकि बीजेपी ने प्रचार अभियान की जिम्मेदारी राज्‍य  सभा सांसद भूपेंद्र यादव को दी.

गहलोत को कांग्रेस में काफी प्रभावी नेता माना जाता है. इसके अलावा उन्हें अहमद पटेल का भी करीबी माना जाता है. जबकि यादव को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का भरोसेमंद कहा जाता है.

दोनों ही संगठनात्मक कौशल, जातीय समीकरण और पार्टी के नेताओं का विश्वास जगाने में माहिर हैं

गहलोत और यादव दोनों ने कई संसदीय समितियों के सदस्य के तौर पर काम किया है. दोनों अपने दलों के केंद्रीय नेतृत्व के राष्ट्रीय सचिव जैसे मुख्य पदों पर हैं. दोनों ही संगठनात्मक कौशल, जातीय समीकरण और पार्टी के नेताओं का विश्वास जगाने में माहिर हैं.

2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में यादव ने अपनी योग्यता साबित की थी. इस दौरान वो पार्टी के संयुक्त प्रभारी थे. उनके नेतृत्व में राज्य के गठन के बाद से बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई थी. इसके बाद उन्होंने बिहार में लगभग मिश्रित परिणाम दिए. लेकिन इस साल उत्तर प्रदेश के चुनाव में पार्टी की बड़ी जीत में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

दूसरी तरफ गहलोत ने राजस्थान में दो बार अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित की. हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का नेतृत्व किया, जहां कांग्रेस बहुमत से जीती. इन समानताओं के अलावा दोनों एक-दूसरे के राजनीति करियर पर कई बार भारी पड़ते हैं.

कहा जाता है कि सचित पायलट के साथ लड़ाई की वजह से गहलोत को आंशिक रूप से गुजरात प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है. ये भी कहा जाता रहा है कि राजस्थान में सचिन पायलट का रास्ता साफ करने के लिए ही गहलोत को गुजरात में उलझाया गया.

गुजरात में गहलोत का प्रदर्शन राजस्थान में पहुंचाएगा फायदा

गुजरात में गहलोत का बेहतर प्रदर्शन न केवल राष्ट्रीय राजनीति में उनके कद को और मजबूत करेगा बल्कि अपने गृह राज्य राजस्थान में भी वो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए कड़ी चुनौती के तौर पर उभरेंगे.

दूसरी ओर भूपेंद्र यादव जिन्होंने पार्टी में काफी कम समय में ऊंचे मुकाम को हासिल किया. अगर गुजरात में बीजेपी फिर से जीतती है तो इससे केंद्रीय नेतृत्व में उनकी स्थिति भी काफी मजबूत होगी. बीजेपी हिन्दीभाषी राज्यों में यादव को ओबीसी चेहरे के तौर पर भी स्थापित करने की कोशिश कर रही है.

सोमवार के चुनाव परिणाम से गुजरात के 4.35 करोड़ मतदाता इन दो राजस्थानियों के भविष्य फैसला भी करेंगे.

(न्यूज-18 के लिए सुहास मुंशी की रिपोर्ट)

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