S M L

नरेंद्र मोदी अपने दम पर कब तक 'गोवर्धन पर्वत' उठाते रहेंगे?

पीएम मोदी अकेले दम पर गोवर्धन पर्वत का भार संभाल रखा है. मोदी ने पार्टी की डूबती कश्ती को ही नहीं बचाया बल्कि बीजेपी को एक बार फिर से पांच सालों के लिए सत्ता में वापसी करा दी

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Dec 18, 2017 09:20 PM IST

0
नरेंद्र मोदी अपने दम पर कब तक 'गोवर्धन पर्वत' उठाते रहेंगे?

पीएम नरेंद्र मोदी की करिश्माई छवि एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के 'जुझारू' छवि पर भारी पड़ा. गुजरात में बीजेपी की यह लगातार छठवीं जीत है. गुजरात की इस जीत ने निश्चित तौर पर पीएम मोदी के लिए 2019 लोकसभा चुनाव की राह आसान कर दी है.

एक बार फिर से गुजरात चुनाव में बीजेपी की बेहतर रणनीति के सामने कांग्रेस पस्त हो गई. कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के रणनीतिकारों की सारी रणनीति को पीएम मोदी ने बेकार साबित कर दिया. कांग्रेस की हर रणनीति पीएम मोदी के सामने बौनी साबित हुई है.

राहुल के हर सवाल का मिला जवाब!

सोशल साइट्स पर राहुल गांधी ने हर दिन पीएम मोदी से एक सवाल पूछकर मोदी को घेरने का प्रयास किया, लेकिन यह कोशिश भी काम नहीं आ पाई. दिलचस्प है कि राहुल गांधी हर रोज चुनाव प्रचार में जाने से पहले ट्वीट करके पीएम मोदी से एक सवाल का जवाब मांगते थे. शायद राहुल गांधी का सीधे-सीधे पीएम मोदी से सवाल पूछना भी गुजरात की जनता को अच्छा नहीं लगा.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार गुजरात चुनाव में पीएम मोदी की सभा में बेशक पहले वाला करंट नहीं दिखता हो लेकिन गुजराती अस्मिता का दाव खेलकर मोदी ने कांग्रेस को पटखनी दे दी. पीएम मोदी ने सिर्फ अपने दम पर बीजेपी की डूबती नैया पार लगा दी है. साथ ही इस जीत के जरिए देश को एक संदेश भी दिया कि मोदी का जलवा अभी बरकरार है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की बेहतर रणनीति को मोदी अंजाम तक पहुंचाने में माहिर हैं.

मोदी का विकल्प नहीं

देखा जाए तो पिछले 22 सालों से गुजरात में नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प तैयार नहीं हुआ है. पिछले चार साल से मोदी केंद्र में हैं. इसके बावजूद गुजरात की राजनीति और गुजराती नब्ज को मोदी से बेहतर कोई नहीं समझ सकता, इस बात की तस्दीक इस चुनाव ने भी कर दिया है.

पिछले दो दशक से गुजरात में पीएम मोदी के सामने कोई दूसरा चेहरा उभर कर सामने नहीं आया. इस दौरान पीएम मोदी ने गुजरात में अकेले दम पर गोवर्धन पर्वत संभाल रखा है. मोदी ने इस चुनाव में पार्टी की डूबती कश्ती को ही नहीं बचाया बल्कि बीजेपी को एक बार फिर से पांच सालों के लिए सत्ता में वापसी भी करा दी.

कांग्रेस मुक्त गुजरात का पोस्टर बनाकर जश्न मनाते बीजेपी समर्थक (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस मुक्त गुजरात का पोस्टर बनाकर जश्न मनाते बीजेपी समर्थक (फोटो: पीटीआई)

गौरतलब है कि पिछले दो महीनों में नरेंद्र मोदी ने गुजरात में दर्जनों बार यात्राएं की. इस चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने 28 हजार किलोमीटर नापा तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी 20 हजार किलोमीटर के साथ कुछ ही पीछे रहे.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां गुजरात चुनाव जीत कर 2019 की राह आसान करना चाह रही थीं. गुजरात चुनाव की यह जीत साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी के लिए काफी काम आएगा.

इज्जत का सवाल बन चुका था गुजरात चुनाव?

देखा जाए तो नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात विधानसभा चुनाव उनके लिए सबसे मुश्किल रहा. लेकिन मोदी ने इसे अपने ही अंदाज से जीत लिया. बीजेपी की इस जीत में वैसे तो कई नेता पर्दे के पीछे से अहम रोल अदा कर रहे थे. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हों या फिर राज्य के सीएम विजय रूपानी, उप मुख्यमंत्री नीतिन पटेल हों या फिर बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव...सभी ने जबरदस्त रणनीति बनाई. इसके बावजूद सबकी नजरें मोदी पर टिकी हुई थीं.

गुजरात में जिस तरह से पिछले कुछ सालों से पाटीदार आंदोलन, दलितों के साथ मारपीट, नोटबंदी और जीसटी को लेकर लोग सड़कों पर उतर आए थे. इससे बीजेपी के लिए मैदान जीतना मुश्किल नजर आ रहा था. कहीं न कहीं इन आंदोलनों ने बीजेपी की राह मुश्किल बना दी थी. लेकिन बीजेपी शुरू से ही जीत को लेकर आश्वस्त थी क्योंकि उसके पास 'मोदी' नाम का तुरूप का इक्का है.

इस बार भी चला मोदी का जादू

नरेंद्र मोदी ने जब से चुनाव की कमान संभाली, तब से ही राजनीति का चुनावी समीकरण बदलने लगा था. गुजरात की इस जीत का असर न केवल 2019 के लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा बल्कि, अगले साल छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों पर भी पडे़गा.

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह बीजेपी की जीत नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी की जीत है. ऐसे में मोदी अपने करिश्माई छवि के बल पर कब तक बीजेपी की चुनावी नैया पार लगाते रहेंगे. बीजेपी में भी देखा जाए तो मोदी के अलावा कोई भी ऐसा नेता नहीं है जो हार को जीत में बदलने का माद्दा रखता हो.

नरेंद्र मोदी के गुजरात विकास मॉडल पर जिन-जिन लोगों ने सवाल उठाया था, उनको भी इस जीत से काफी सबक मिल गई है. गुजरात में बीजेपी के विकास मॉडल पर राहुल गांधी की हर रैली में जोरदार हमला होता था. गुजरात में ‘विकास पागल हो गया’ का नारा भी एक तरह से बेकार साबित हुआ.

Gujarat Election Results 2017

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
गोल्डन गर्ल मनिका बत्रा और उनके कोच संदीप से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi