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गुजरात नतीजों पर बधाई के साथ नीतीश ने पीएम मोदी को दी सलाह

बिहार के सीएम ने नरेंद्र मोदी सरकार को किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर ध्‍यान केंद्रित करने की सलाह दी है

Updated On: Dec 19, 2017 10:19 PM IST

Alok Kumar

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गुजरात नतीजों पर बधाई के साथ नीतीश ने पीएम मोदी को दी सलाह

गुजरात चुनाव के नतीजे भले ही बीजेपी के हक में रहे हों लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह से चुनाव में प्रदर्शन किया है उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. कांग्रेस के इस प्रदर्शन पर बीजेपी के सहयोगी दल जेडीयू के मुखिया और बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने इशारों ही इशारों में मोदी को चेताया है कि अगर उनके नेताओं ने गांव की ओर ध्‍यान केंद्रित नहीं किया तो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की राह आसान नहीं होगी.

गुजरात में इस बार का चुनाव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए कड़ी मेहनत वाला साबित हुआ. गुजरात से हजारों किलोमीटर दूर बिहार में भी इसकी बेचैनी साफ देखी जा सकती थी. बिहार के सीएम ने नरेंद्र मोदी सरकार को किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर ध्‍यान केंद्रित करने की सलाह दी है.

नीतीश का बयान बहुत कुछ कहता है

महाराष्‍ट्र में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने जिस तरह का रुख अपनाया है और 2019 का चुनाव अकेले दम पर लड़ने की बात कही है उससे बीजेपी की राह मुश्‍किल में पड़ती दिख रही है. अब जेडीयू ने भी इशारों ही इशारों में बीजेपी को समझाने का प्रयास किया है कि गुजरात के ग्रामीण इलाकों में जिस तरह से बीजेपी ने खराब प्रदर्शन किया है उससे गांव के किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है जो आगे आने वाले चुनावों के लिए ठीक नहीं है.

गांव से होगा 2019 के आम चुनावों का फैसला

जेडीयू के महासचिव और नीतीश कुमार से सहयोगी संजय झा के मुताबिक 2019 के आम चुनावों के भाग्‍य का फैसला ग्रामीण क्षेत्रों से होकर ही गुजरेगा. हमारे प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की कसम खाई थी. हालांकि जमीनी हकीकत में ऐसा अभी दिखाई नहीं दे रहा है. यह वह क्षेत्र है जहां पर केंद्र सरकार को ध्‍यान देना चाहिए. इससे पहले जेडीयू नेता केसी त्‍यागी ने अगले बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में रियायतों को बढ़ाने की मांग की है.

जेडीयू कैंप कभी भी नहीं चाहता था कि गुजरात चुनावों में बीजेपी क्‍लीन स्‍वीप कर जाए, क्‍योंकि ऐसा होने पर भगवा दल की ताकत बढ़ जाती. इसके उलट अगर बीजेपी की करारी शिकस्‍त होती तो भी नीतीश को मुश्किल हो जाती. ऐसे में छोटे बहुमत वाली जीत ने जेडीयू की राह आसान कर दी. वर्तमान नतीजों के बाद बीजेपी अपने सहयोगियों के प्रति थोड़ी शालीन रहेगी.

2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी नीत एनडीए ने बिहार के 40 में से 31 सीटें जीती थी. उस समय जेडीयू अकेले लड़ी थी. इन नतीजों के आधार पर माना जा रहा था कि जेडीयू को बीजेपी से कम सीटें चुनाव लड़ने को मिलेगी. लेकिन अब पलड़ा थोड़ा सा जेडीयू की ओर झुका है.

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