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बीजेपी पूरे मन से, कांग्रेस अनमने ढंग से गठबंधन करती है: शरद यादव

कहा 'बीजेपी हर चुनाव वजूद का सवाल बना कर लड़ती है, किसी भी दल के साथ सहजता से गठबंधन करती है, जबकि कांग्रेस अनमने मन से गठजोड़ करती है

Bhasha Updated On: Nov 19, 2017 04:36 PM IST

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बीजेपी पूरे मन से, कांग्रेस अनमने ढंग से गठबंधन करती है: शरद यादव

गुजरात में सीटों के बंटवारे को लेकर मतभेद की खबरें आ रही है. शरद यादव ने कहा है कि चुनाव में ‘कांग्रेस को जिम्मेदारी से अपनी भूमिका का निर्वाह करना होगा.’ तभी बीजेपी को हराया जा सकता है.

गुजरात में चूंकि विपक्ष की ओर से कांग्रेस ड्राईविंग सीट पर बैठी है, लिहाजा उसकी ये जिम्मेदारी है कि वो राज्य में राजनीतिक कौशल और उदारता के साथ अलग-अलग सामाजिक ताकतों को एकजुट करे.

यादव ने कहा कि चूंकि कांग्रेस लंबे समय तक अकेले सत्ता में रही है इसलिए पहले वो गठबंधन की राजनीति में ज्यादा माहिर नहीं थी. अब वो गठबंधन राजनीति के तकाजों और उसकी संवेदनशीलता को समझने लगी है.

बीजेपी पूरे मन से जबकि कांग्रेस अनमने ढंग से गठबंधन करती है 

उन्होंने हालांकि कहा 'बीजेपी हर चुनाव वजूद का सवाल बना कर लड़ती है और इसके लिए किसी भी तरह के उपायों से परहेज नहीं करती. बीजेपी किसी भी दल के साथ सहजता से गठबंधन करती है, जबकि कांग्रेस अनमने मन से गठजोड़ करती है.

यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बाद देश में आम आदमी की सोच में बदलाव आया है. वरिष्ठ नेता से पूछा गया था कि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार चुनाव जीत रही है और लोगों का भरोसा उन पर कायम है.

यादव ने कहा, चार बड़ी घटनाओं- 'नोटबंदी, जीएसटी, बिहार में महागठबंधन की टूट और गुजरात में राज्यसभा की एक सीट के लिए मची अफरा-तफरी' ने आमजन को सोचने पर मजबूर किया है.

दुनिया कभी विकल्पहीन नहीं हो सकती, मोदी का भी विकल्प है  

पिछले तीन वर्ष से देश में घूम फिर कर हिंदू-मुसलमान के इर्द गिर्द ही चर्चा होती रही है. लोग अब सोच रहे हैं कि 2014 में क्या इसलिए ही उन्होंने बदलाव किया था.

यादव ने कहा, लोगों में बेचैनी हिमाचल में भी थी और गुजरात में भी है. ये बेचैनी स्थानीय परिस्थतियों के कारण नहीं बल्कि समूचे देश में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर मची अफरा तफरी की वजह से है.

विपक्ष के पास मोदी के मुकाबले का कोई चेहरा नहीं होने के प्रश्न पर यादव ने कहा कि दुनिया कभी विकल्पहीन नहीं होती. पिछले लोकसभा चुनाव में 67 प्रतिशत मतदाताओं ने बीजेपी को नकारा था.

इसमें 15 फीसदी अल्पसंख्यक वोट हटा दें तो भी 52 प्रतिशत हिंदू मतदाता बीजेपी के विरोध में थे. इसलिए यह कहना गलत होगा कि कांग्रेस अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की वजह से हारी थी.

Gujarat Election Results 2017

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