S M L

गुजरात चुनाव 2017: नेतृत्व के दिवालियेपन के कारण ‘आउटसोर्सिंग’ कांग्रेस को उल्टा पड़ेगा: अमित शाह

प्रधानमंत्री खुद जीएसटी की समस्याओं को बड़ी संवेदनशीलता के साथ देख रहे हैं, संवाद के जरिए समस्याओं का हल निकाला जाएगा

Updated On: Dec 03, 2017 01:02 PM IST

Amitesh Amitesh

0
गुजरात चुनाव 2017: नेतृत्व के दिवालियेपन के कारण ‘आउटसोर्सिंग’ कांग्रेस को उल्टा पड़ेगा: अमित शाह

 

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिए इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव काफी अहम है. वो खुद चुनाव मैदान में नहीं हैं. अहमदाबाद की नारनपुरा से विधायक रहे अमित शाह अब राज्यसभा सांसद हैं. लेकिन, उनके लिए इस बार का चुनाव करो या मरो का सवाल बन गया है.

उत्तर प्रदेश से लेकर कई राज्यों में अपनी सांगठनिक क्षमता की बदौलत बीजेपी की जीत के सूत्रधार बन चुके शाह की गुजरात में इस बार अग्निपरीक्षा है. खासतौर से पाटीदार आंदोलन और उसके बाद पैदा हुए हालात को लेकर कांग्रेस को बीजेपी पर हमला करने का एक मौका भी मिल गया है. गुजरात में चुनावी रैलियों को संबोधित करने के साथ-साथ पार्टी की रणनीति और समीक्षा में लगातार जुटे  अमित शाह ने इस चुनाव में बीजेपी की संभावनाओं पर चर्चा की.

अमित शाह ने फर्स्टपोस्ट और कुछ दूसरे मीडिया समूहों के साथ बातचीत में हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी के कांग्रेस के लिए प्रचार करने को कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व का दिवालियापन बताया. उनका कहना था कि ‘कांग्रेस के पास कोई नेता नहीं है जिसके चलते वो हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी जैसे लोगों को आउटसोर्स कर रही है. उनका दावा है कि कांग्रेस का यही दांव उनपर उल्टा पड़ेगा.’

हार्दिक पटेल की पिछली रैली में आई भीड़ चर्चा का विषय रही थी

हार्दिक पटेल की पिछली रैली में आई भीड़ चर्चा का विषय रही थी

हालांकि, हार्दिक की रैलियों में आ रही भीड़ को लेकर बीजेपी अध्यक्ष ज्यादा चिंतित नहीं दिख रहे हैं. उनका मानना है, ‘अब तो हार्दिक पूरी तरह से कांग्रेस के साथ आ गए हैं, लिहाजा हार्दिक की सारी रैलियां अब कांग्रेस की रैलियां हो रही हैं.’ शाह का दावा है कि हार्दिक की रैली में जमा भीड़ तो कांग्रेस जुटा रही है और कांग्रेस तो इतना कर ही सकती है.

जाति की राजनीति कर रही है कांग्रेस

हार्दिक पटेल के मुद्दे को अमित शाह कांग्रेस की जातिवादी राजनीति से जोड़ कर देख रहे हैं. उनका मानना है कि गुजरात की जनता कांग्रेस की जातिवादी राजनीति से बहुत उब चूकी है.

बातचीत के दौरान अमित शाह ने एक बार फिर से कांग्रेस की उस खाम थेओरी की याद दिलाई. KHAM  मतलब, क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम को मिलाकर जिस तरह से जातिवादी समीकरण  बना था वो कांग्रेस की ही देन थी. शाह ने उस वक्त को याद करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ‘इसी थेओरी के चलते गांव-गांव तक जातियों में विद्वेष भर गया था. शाह का दावा है कि इस बार कांग्रेस की जातिवादी राजनीति की कोशिश विफल साबित होगी.’

हार्दिक पटेल अपनी रैलियों में बार-बार यही कह रहे हैं कि कांग्रेस ने उन्हें सत्ता में आने के बाद पाटीदारों के लिए आरक्षण का वादा किया है. इस सवाल के जवाब में अमित शाह इस पूरे दावे की कलई खोलने में लगे हैं. अमित शाह का दावा है कि पाटीदार समाज इस बात को समझ रहा है कि 50 फीसदी से उपर आरक्षण संभव नहीं है.

कांग्रेस की तरफ से पाटीदारों के लिए आरक्षण का फॉर्मूला सुझाने वाले कपिल सिब्बल को अमित शाह कठघरे में खड़ा करते हुए उन्हें 1998 की याद दिला रहे हैं. जब कपिल सिब्बल ने खुद ही उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि 50 फीसदी से अधिक आरक्षण संभव ही नहीं है.

हार्दिक पटेल की तरफ से भी बीजेपी को लगातार पटेल विरोधी दिखाने की कोशिश भी की जा रही है. अपनी रैलियों में हार्दिक पटेल आनंदीबेन पटेल से लेकर केशुभाई पटेल तक का जिक्र कर रहे हैं. लेकिन, अमित शाह इन आरोपों को बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. शाह मानते हैं कि ‘हरएक का जाने का  अलग–अलग कारण होता है. आनंदीबेन पटेल ने स्वयं इस्तीफा दिया था. जहां तक कांग्रेस का सवाल है सबको मालूम है कि कांग्रेस के शासन काल में क्या-क्या हुआ था.’

चुनावी मौसम में राहुल गांधी लगातार मंदिर-मंदिर जा रहे हैं. राहुल के मंदिर जाने से उनके नरम हिंदुत्व के एजेंडे पर दिखने की कोशिश के तौर पर ही देखा जा रहा है. अभी कुछ दिन पहले सोमनाथ मंदिर में रजिस्टर में उनके दस्तखत और उसमें हुई इंट्री को लेकर  काफी बवाल मचा था. परंपरा के मुताबिक केवल गैर-हिंदूओं के लिए ही उस मंदिर में प्रवेश से पहले रजिस्टर में इंट्री की जरूरत होती है. ऐसे में राहुल के दस्तखत के बाद बीजेपी उनके हिंदू होने को लेकर ही हमलावर थी.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर सवाल खड़ा किया है. बातचीत के दौरान शाह का कहना था कि ‘एसपीजी का प्रोटेक्शन था, इतने सारे नेता उनके साथ थे तो क्या उनसे जोर-जबरदस्ती दस्तखत कराएंगे. उनकी टीम के पार्ट थे लोग उन्होंने नाम लिखा. उन्होंने दस्तखत किया, हम क्या कर सकते हैं.’

गुजरात में विकास के मुद्दे पर बीजेपी की धार को कुंद करने के लिए कांग्रेस की तरफ से विकास पागल हो गया है का नारा कांग्रेस ने दिया था. लेकिन, अमित शाह का दावा विकास के मुद्दे पर चुनाव लडने को लेकर है. अमित शाह का कहना है कि नरेंद्र मोदी जी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते और फिर प्रधानमंत्री बनने के बाद भी लगातार गुजरात में विकास हुआ है.

खूब हुआ है गुजरात का विकास 

राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर में कथित तौर पर गैर हिंदु रजिस्टर पर साइन करने पर काफी विवाद हुआ

राहुल गांधी के सोमनाथ मंदिर में कथित तौर पर गैर हिंदु रजिस्टर पर साइन करने पर काफी विवाद हुआ

बातचीत के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कहते हैं ‘पहले हमारी सरकार आने से पहले सौराष्ट्र में पानी की भयंकर किल्लत थी. लेकिन, अब नर्मदा का पानी पूरे सौराष्ट्र इलाके में पहुंचे इस प्रकार की व्यवस्था की गई है. टैंकर माफिया मुक्त गुजरात के साथ-साथ हर घर में चौबीस घंटे बिजली की व्यवस्था की गई है.’

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से लगातार किसानों को फसल के सही दाम नहीं मिलने की बात को मुद्दा उठाया जा रहा है. लेकिन, बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल गांधी की इस बात को लेकर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस शासित कर्नाटक से तो बेहतर ही है. बकौल अमित शाह, कपास की बात करें तो पहले 20 लाख हेक्टेयर में फसल उत्पादन था आज एक लाख 23 हजार हेक्टेयर में  कपास के फसल का उत्पादन हो रहा है.

इस पूरे चुनाव के दौरान अमित शाह के बेटे जय शाह के उपर भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया था. अमित शाह ने इस पर भी अपनी सफाई देते हुए कहा कि ‘अगर मान लीजिए कोई भी कंपनी सौ रूपए से बनी है अगर पांच लाख टर्न  ओवर हो गया तो कितना गुना हो गया. इतनी भी मालूमात राहुल गांधी को नहीं है. राहल गांधी इसे  मुनाफा कहते हैं. ये मुनाफा नहीं है, टर्न ओवर है.’

अमित शाह कहते हैं ‘क्या कोई सरकारी ठेका लिया है, कोई सरकारी फेवर लिया है क्या, कोई सरकारी डील में दलाली ली है क्या. किस चीज में सार्वजनिक जीवन के मूल्यों को नुकसान हुआ है. शुद्ध रूप से चेक से किया हुआ बिजनेस है जिसमें डेढ़ करोड का लॉस हुआ है.’ अमित शाह का कहना है कि इसमें कोई गलत नहीं है.

अंतर है राफेल और बोफोर्स में

इन दिनों कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. लेकिन, अमित शाह ने इस मुद्दे पर भी खुलकर राहुल को जवाब दिया. बातचीत के दौरान शाह ने कहा ‘राफेल डील और बोफोर्स डील के बीच अंतर है. ये सरकार से सरकार के स्तर पर डील है ना कि किसी कंपनी के साथ डील है. उनके पास कोई और मुद्दा नहीं है, तो ऐसे ही मुद्दे उठाने हैं तो फिर उठाए उसमें कोई क्या कर सकता है.’

नोटंबदी और जीएसटी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस बीजेपी पर काफी हमला कर रही है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी को नोटबंदी को लेकर भी कहते थे कि यूपी में इसका असर दिखेगा. लेकिन जो नतीजा आया वो सामने था. हालाकि अमित शाह कहते हैं कि जीएसटी एक कर सुधार है. इसमें जो समस्या है उसको लेकर हर महीने जीएसटी काउंसिल लगातार बैठ रही है. बहुत सारे मुद्दों को हल कर लिया गया है और जो बचे हैं उसे भी हल कर लिया जाएगा.

उनका कहना है कि इस मुद्दे को खुद प्रधानमंत्री बड़ी संवेदनशीलता के साथ देख रहे हैं. हमारी सरकार के मंत्री, अधिकारी और नेता और बाकी सब भी व्यापारी मंडलों से चर्चा कर रहे हैं, संवाद भी कर रहे हैं. उसमें से जो  दिक्कत आती है, उसको हल करने के लिए जीएसटी काउंसिल हर महीने बैठती है और उसे हम हल भी करते हैं.

यूपी में स्थानीय निकाय के चुनाव में जिस तरह से कांग्रेस का सफाया हुआ  उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष ने एक बार फिर से राहुल गांधी पर पलटवार किया है. शाह ने राहुल के गुजरात दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि ‘यूपी चुनाव में अगर अमेठी में राहुल गांधी जाते तो शायद वहां बचा पाते, अब वो भी उनके हाथों से निकल गई है.’

अमित शाह बातचीत के दौरान गुजरात की जनता को एक संदेश भी देना चाहते हैं. उनका कहना है ‘बहुत लंबे समय के बाद भी केंद्र में बीजेपी सरकार और गुजरात में बीजेपी सरकार आई है. गुजरात के लिए यह फायदा उठाने का समय है. और गुजरात की जनता इसे उठाएगी.’

उनका दावा है हम 150 से ज्यादा सीटों के साथ सरकार बनाएंगे, हमें पूरा विश्वास है कि गुजरात की जनता इस बार फिर से जातिवादी राजनीति से उपर उठकर विकास के मुद्दे पर हमें वोट करेगी. हम फिर सरकार बनाएंगे.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi