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गुजरात चुनाव में आखिर तक राहुल गांधी दबाव बनाने की कोशिश में हैं

चुनाव का नतीजा जो भी हो, समीकरण जिसके पक्ष में जाए लेकिन, गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी की तरफ से हर कदम पर वो चाल चली गई जिससे बीजेपी को जवाब दिया जा सके

Updated On: Dec 13, 2017 08:15 PM IST

Amitesh Amitesh

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गुजरात चुनाव में आखिर तक राहुल गांधी दबाव बनाने की कोशिश में हैं

कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी का गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले साक्षात्कार विवादों में आ गया है. बीजेपी ने चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद उनकी तरफ से दिए गए साक्षात्कार को मुद्दा बना दिया है. शिकायत चुनाव आयोग में भी की गई है. लेकिन, राहुल के साक्षात्कार को आखिर-आखिर तक बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर ही देखा जा रहा है.

दूसरे चरण के मतदान के ठीक एक दिन पहले भी राहुल ने फिर से उन सभी मुद्दों को ही उठा दिया जिसको लेकर अबतक वो चुनावों के दौरान बीजेपी को घेरते रहे हैं. राहुल गांधी का दावा गुजरात में एकतरफा जीत को लेकर है. शायद राहुल गांधी को चुनावों के दौरान हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश के आंदोलन और उनमें सरकार के खिलाफ दिख रहे आक्रोश को लेकर है.

लेकिन, हकीकत यही है कि न तो अल्पेश का फैक्टर दिख रहा है और न ही जिग्नेश का करिश्मा. हार्दिक पटेल की रैलियों में दिख रही भीड़ ही महज राहुल गांधी को बीजेपी को पटखनी देने के लिए सबसे बड़ी उम्मीद की किरण के तौर पर दिख रही है. गुजरात में अलग-अलग इलाकों के दौरे के बाद यह दिख भी रहा है.

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लेकिन, चुनाव से ठीक पहले अपने साक्षात्कार में राहुल गांधी किसी नए मुद्दे को सामने रखने के बजाए उन्हीं मुद्दों को फिर से दोहराते नजर आए जो कि चुनाव प्रचार के दौरान वो लगातार कहते आ रहे हैं. एक बार फिर से नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक को राहुल गांधी सबसे बड़ी असफलता के तौर पर सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं.

हालांकि राहुल गांधी ने अपने साक्षात्कार के लिए केवल गुजराती मीडिया को ही चुना. राहुल ने गुजराती समाचार चैनल को ही अपना साक्षात्कार देकर चुनाव से ठीक एक दिन पहले अपना संदेश पूरे गुजरात के लोगों तक पहुंचाने की कोशिश ही की है.

उनके साक्षात्कार के दौरान फिर से जीएसटी में बदलाव की बात, जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताना और तमाम दावे पुरानी बातों को ही दोहराने वाले हैं.

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राहुल गांधी लगातार इस बात को उठा रहे हैं कि बीजेपी मौजूदा चुनाव को लेकर डरी हुई है. कांग्रेस की एकतरफा जीत का दावा करने वाले राहुल गांधी की तरफ से बीजेपी को आगाह किया जा रहा है. लेकिन, इस पूरी कवायद को राहुल गांधी के माइंड गेम से जोड़ कर ही देखा जा रहा है.

दरअसल, 22 साल से सत्ता में काबिज बीजेपी के शासन के बाद कांग्रेस को अब ऐसा लग रहा है कि एंटीइंकंबेंसी का फायदा उठाने का इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता है. बीजेपी के साथ लगातार जुड़े रहे पटेलों की नाराजगी और पटेल मतों में हो रहे बंटवारे ने कांग्रेस के भीतर एक बड़ी आस जगा दी है.

कांग्रेस के रणनीतिकारों को लग रहा है कि इस बार पटेलों की नाराजगी के साथ-साथ किसानों के भीतर की नाराजगी भी है, जो एक साथ बीजेपी के खिलाफ बड़ी ताकत के तौर पर सामने आ रही है. खासतौर से गांवों में कांग्रेस को ज्यादा उम्मीद की किरण दिख रही है.

राहुल गांधी अपने साक्षात्कार में भी एक बार फिर से किसानों के हितों का जिक्र कर अपने-आप को किसानों का हितैषी दिखाने की पूरी कोशिश की. हालांकि राहुल गांधी पूरे साक्षात्कार के दौरान कुछ भी ऐसा नया नहीं कहते दिखे जो कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान न कहा हो. लेकिन, उनकी कोशिश को आखिरी मिनट में फिर से अपने एजेंडे को गुजरात की जनता के बीच रखने की एक कोशिश के तौर पर ही देखा जा रहा है.

हालांकि चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 12 दिसंबर को भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब राहुल गांधी अहमदाबाद के भगवान जगन्नाथ मंदिर में दिख गए. राहुल गांधी पिछले दिनों गुजरात के अलग-अलग मंदिरों में माथा टेकते नजर आ रहे हैं. लेकिन, उनकी कोशिश प्रचार के आखिरी दिन भी मंदिर जाकर अपने सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे को ही आगे बरकरार रहने को लेकर दिखी.

Rahul Gandhi at Ranchhod ji temple Kheda

अपने साक्षात्कार में भी उन्होंने मंदिर मुद्दे को उठाकर इसे बीजेपी की घबराहट का कारण बता दिया. हालांकि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सी प्लेन से अहमदाबाद से अंबाजी मंदिर के दर्शन करने गए थे. प्रचार के आखिरी दिन मोदी की कोशिश गुजरात के विकास को जनता को दिखाने की थी जिसके लिए उन्होने साबरमती नदी से प्लेन में उड़ान  भरकर एक संदेश दिया था.

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लेकिन, उनके अंबाजी मंदिर पहुंचने से पहले ही राहुल गांधी ने जगन्नाथ मंदिर का दर्शन कर एक बार फिर से मोदी के हिंदुत्व की काट के तौर पर अपने सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे को ही आगे कर दिया.

चुनाव का नतीजा जो भी हो, समीकरण जिसके पक्ष में जाए लेकिन, गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी की तरफ से हर कदम पर वो चाल चली गई जिससे बीजेपी को जवाब दिया जा सके. राहुल का साक्षात्कार आखिरी वार के तौर पर ही देखा जा रहा है.

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