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गुजरात चुनाव 2017: वो 'शेरनियां' जिनपर जंगल का राजा है निर्भर

गुजरात में फिर चाहे किसी की भी सरकार बने. लेकिन इन 'शेरनियों' को सुविधाएं मिलती रहनी चाहिए, ताकि ये इसी हिम्मत से अपना काम जारी रखें

Updated On: Dec 04, 2017 03:34 PM IST

Subhesh Sharma

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गुजरात चुनाव 2017: वो 'शेरनियां' जिनपर जंगल का राजा है निर्भर

गुजरात विधानसभा चुनाव का मतदान होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अमित शाह और पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल सभी बड़े नेता चुनाव प्रचार में जुट चुके हैं. विकास की बातें हो रही हैं. बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं. लेकिन इस सब के बीच 'शेरों की धरती' गिर को मानो सभी नेता भूल से गए हैं. किसी भी नेता को अबतक अपने चुनाव प्रचार में पर्यावरण से जुड़ी बात करते हुए नहीं देखा गया.

ये बात सभी जानते हैं कि दुनिया के मुट्ठी भर एशियाई शेर सिर्फ गुजरात के गिर में ही बचे हैं. पर फिर भी गिर फॉरेस्ट नेशनल पार्क के बारे में कोई बात नहीं कर रहा. गिर को जूनागढ़ के नवाबों की शिकारगाह के तौर पर जाना जाता था. 1965 में इसे वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित किया गया और दस साल बाद नेशनल पार्क का दर्जा मिला.

इस चुनाव में भले ही गिर के विकास को लेकर बात न हो रही हो. लेकिन 2007 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. तब उन्होंने देश को पहली 'लॉयन क्वींस' दी थी. वन विभाग में महिलाओं की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई. गुजरात सरकार ने वन विभाग में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया. और इसी तरह भारत की पहली और इकलौती महिला फॉरेस्ट गार्ड्स की टीम तैयार हो सकी.

गिर फॉरेस्ट की ये महिला गार्ड्स जो काम कर रही हैं. उसे करने में बड़े-बड़े वीरों के पसीने छूट जाएंगे. रोजाना अपनी जान हथेली पर रख, ये महिलाएं कभी बाइक और कभी पैदल ही जंगल की पेट्रोलिंग किया करती हैं. यहां उन्हें सिर्फ जंगली जानवरों से ही नहीं बल्कि शिकारियों से भी बड़ा खतरा रहता है. कई बार जिस शेर को बचाने के लिए वो जाती हैं, वो ही उनपर हमला कर देते हैं. इन जांबाज महिलाओं के जीवन को लेकर डिस्कवरी चैनल पर 'Lion Queens of India' नाम से एक सिरीज भी चलाई जा चुकी है.

गिर की पूरी वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू टीम में सबसे सीनियर हैं रसीला वधेर. रसीला को ग्रुप की सबसे मजबूत सदस्य माना जाता है और वो सबसे पहले नियुक्त हुईं महिलाओं में से एक हैं. रसीला और उनकी टीम हजार से ज्यादा जानवरों की जान बचा चुकी हैं. जिसमें 300 शेर, 515 तेंदुए और मगरमच्छ व अजगर शामिल हैं. ये निडर महिला ब्रिगेड हर साल 600 से ज्यादा जानवरों को बचाने का काम करती हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए इंटरव्यू में रसीला ने कहा था कि उन्होंने अपने पति को शादी से पहले ही ये बात बता दी थी कि वो जंगलों में देर तक दूसरे लोगों के साथ काम करेंगी. वो एक बार को शादी तोड़ सकती हैं लेकिन जंगल और जानवरों की सुरक्षा का काम नहीं छोड़ सकती.

photo source: girnationalpark.in

photo source: girnationalpark.in

गिर ने कई महिलाओं को रोजगार और सम्मान दिया है. यहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर का हक दिया गया है. वहीं गिर की इन 'शेरनियों' ने भी अपने काम से ये साबित किया है कि वो किसी से कम नहीं है. कुछ साल पहले तक गिर में सिर्फ 100 एशियाई शेर बचे थे. लेकिन आज सरकार और महिला फॉरेस्ट गार्ड्स द्वारा पिछले कुछ सालों में किए गए बेहतरीन प्रयासों की मदद से ये संख्या 500 के पार पहुंच चुकी है. गिर ने महिलाओं को उस फील्ड में करियर बनाने का मौका दिया है. जहां अभी तक जाने के बारे में किसी महिला ने नहीं सोचा होगा. हर साल महिलाएं और लड़कियां गिर में फॉरेस्ट गार्ड्स का पद पाने के लिए कड़ी ट्रेनिंग ले रही हैं.

ऐसे में गुजरात में फिर चाहे किसी की भी सरकार बने. लेकिन इन 'शेरनियों' को सुविधाएं मिलती रहनी चाहिए, ताकि ये इसी हिम्मत से अपना काम जारी रखें. और दुनिया के इकलौते एशियाई शेरों को बचाकर हमारे देश की शान भी बनाएं रखें.

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