S M L

गुजरात चुनाव 2017: चाहे पसंद हो या नापसंद, हार्दिक एक मजबूत फैक्टर बन चुके हैं

अभी जरूर ये लगे कि हार्दिक की कोई भी कोशिश कांग्रेस की झोली भरेगी लेकिन हार्दिक मुख्य विपक्षी नेता बनने वाले हैं जो आने वाले समय में कांग्रेस के लिए भी मुश्किल भरा होगा

Afsar Ahmed Updated On: Dec 11, 2017 04:40 PM IST

0
गुजरात चुनाव 2017: चाहे पसंद हो या नापसंद, हार्दिक एक मजबूत फैक्टर बन चुके हैं

रात को 9 बजे का वक्त है, सूरत के ठीक बीच मौजूद ग्राउंड में मंच सजा है. सामने भारी भीड़ है जिन्हें नीचे खड़े होने की जगह नहीं मिली वो आसपास मौजूद इमारतों पर चढ़े हुए हैं. तभी साधारण कपड़े पहने कमीज बाहर निकली हुई एक साढ़े पांच फीट लंबा श्यामले रंग का एक 24 साल का लड़का मंच पर आता है और पूरे मैदान में जय सरदार जय सरदार के जोरदार नारे गूंजने लगते हैं. वो जनता का हाथ जोड़कर अभिवादन करता है. जी हां, ये हार्दिक पटेल हैं.

वो चेहरे पर गंभीरता ओढ़े बड़े ही सधे अंदाज में अपनी बात कहना शुरू करते हैं. इस बीच उत्साही भीड़ बार-बार होय-होय कह रही है. शुरुआती बात के बाद हार्दिक जनता से कहते हैं कि जय सरदार का नारा लगाएंगे और आवाज इतनी तेज हो कि दिल्ली तक आवाज पहुंचे. जनता जय सरदार के जोरदार नारे लगा रही है...इस बीच फिर हार्दिक चिल्लाते हैं कि ऊपर से भी जय सरदार की आवाज उतनी जोर से आनी चाहिए क्योंकि सरदार हमारा ही नहीं तुम्हारा भी बाप था. अगले नारे में चारों ओर से जोरदार आवाज आती है.

हार्दिक की रैलियां और भाषण हैं प्रमाण

हार्दिक जहां भी रैली करने जाते हैं लगभग ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है. हार्दिक चाहे रैली करें, नुक्कड़ सभा करें या फिर बाइक रैली- एक चीज उनकी सभा के लिए गारंटी बन चुका है वो है उत्साही भीड़. सूरत की रैली में एक वक्त हार्दिक के फेसबुक पेज से रिकॉर्ड 33 हजार से ज्यादा लोग लाइव स्ट्रीमिंग देख रहे थे. हार्दिक के सारे भाषण गुजराती में होते हैं जिससे वो जनता से सीधे जुड़ते हैं. भाषण में निशाना युवा होते हैं... हार्दिक गुजराती में पूछते हैं कि एक युवान हाथ ऊंचो करे कि हूं सरकारी नौकरी करूं छूं...एक युवान हाथ ऊंचो करे कि हूं सरकारी स्कूल-कॉलेज में पढ़ूं छूं...एक युवान हाथ ऊंचो करे कि हूं जे कमाऊं छूं... कोई न... जनता भी ना कहकर जवाब देती है.

ये भी पढ़ें: गुजरात चुनाव: पहले दौर की वोटिंग के बाद क्या है बीजेपी की रणनीति

सवाल उठता है कि हार्दिक की रैलियों में जुट रही भारी भीड़ के मायने क्या हैं – क्या ये पटेल युवाओं का आईकन भर है, क्या ग्रामीणों को पटेल की आरक्षण वाली बात ज्यादा भा रही है, कौन हैं वो जो हार्दिक की रैली में आ रहे हैं?

एएमयू में प्रोफेसर मुहीब-उल-हक के मुताबिक दर्जनों युवा पटेल आज भी जेल में बंद हैं, इसके अलावा पटेल युवकों की हत्या हो या फिर हार्दिक पटेल को जेल में डालने का मामला सभी को लेकर भी पटेलों में गुस्सा है. आजादी के बाद से ये पहली बार हुआ है कि पटेलों के दोनों वर्ग एक हो गए हैं. जिनके कि कभी मंदिर भी अलग-अलग हुआ करते थे. हार्दिक के युवा होने के चलते भी लोग उससे जुड़ रहे हैं. पटेलों की वजह से दलित और मुस्लिमों को भी ताकत मिली है. वो भी हार्दिक की रैली में पटेलों संग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं.

hardik patel 5

दरअसल विवादों ने उनकी लोकप्रियता को बढ़ाया है, घटाया नहीं. पाटीदार युवाओं को उनमें अपना हीरो नजर आता है, ऐसा होने की वजह भी है, हार्दिक का अंदाज. उदाहरण के लिए हार्दिक का भाषण राजनीतिक से ज्यादा भावनाओं से ओतप्रोत होता है. वो भाषण के दौरान जनता से लगातार इंटरेक्ट करते हैं. भाषण की शुरुआत में युवाओं में जोश भरने के लिए 11 बार जय सरदार के नारे लगवाते हैं. पटेल बहुल इलाके से जब वो ग्रामीण इलाकों में रैलियां करते हैं तो जय किसान जय जवान का नारा उसके भाषण की शुरुआत में लगाया जाता है. भीड़ उनका अनुसरण कर ऐसा ही करती है. वो भाषण की समाप्ति के वक्त बूम-बूम-बूम बोलते हैं और जनता उत्साह से भर उनका अनुसरण करती है. तकरबीन हर रैली में वह उन्हें एक पार्टी को वोट न देने की शपथ दिलाते हैं. ये शपथ दिलाने का तरीका भी अनोखा होता है. कहीं वो इसके लिए मोबाइल की लाइट जलवाता है तो कहीं-कहीं हाथ उठाकर ऐसा करने को कहता है.

ये भी पढ़ें: गुजरात चुनाव: पटेल-पटेल की रट के बीच क्या है बाकी जातियों का गणित

इन सबके बीच फिर ये सवाल उठता है कि जनता क्या सिर्फ उनके ये अलग-अलग स्टाइल के लिए उनकी सभा में जा रही है या बात कुछ और है?

बात सिर्फ इतनी नहीं है. दरअसल, हार्दिक ने पाटीदार आदोलन चलाकर पाटीदारों की सरकारी नौकरियों में उनकी कम संख्या की टीस को पकड़ा है. पाटीदार समृद्ध हैं लेकिन सरकारी नौकरी में उनका दबदबा उतना नहीं है. पाटीदार ये हालात बदलना चाहते हैं. पाटीदार अनामत आंदोलन (पास) के तहत हार्दिक की 2015 की विशाल रैलियां इसका बड़ा संकेत थी और अब 2017 में इतने विवादों के बीच उनका फिर से भारी भीड़ जुटाना इस बात का संकेत है कि पटेल समुदाय अभी अपनी इस मांग पर अडिग है.

मोदी बनाम हार्दिक

भीड़ आने के पीछे एक कारण और माना जा रहा है वो है हार्दिक का अपने आंदोलन से आगे जाकर सारे समाज को साथ लेकर मुहिम चलाना. हार्दिक की रैलियों को देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि हार्दिक सिर्फ पटेलों पर ही निर्भर नहीं कर रहे हैं. उनकी रैलियों में मुस्लिम, क्षत्रिय और ठाकोर समाज के लोग भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं. दरअसल पास ने एक रणनीति के तहत हार्दिक को सिर्फ पाटीदर नेता नहीं बल्कि गुजरात का नेता बनाकर आगे पेश करना शुरू कर दिया है. इस तरह उनकी रणनीति दरअसल गुजरात चुनाव को मोदी बनाम हार्दिक करने की प्रतीत होती नजर आ रही है. पास ऐसा करने में सफल भी होती नजर आ रही है.

ये भी पढ़ें: गुजरात चुनाव 2017: हार्दिक पटेल का कोटा 'डील' एक भयानक मजाक है

उदाहरण के लिए हार्दिक की कोई भी रैली जब शुरू होती है तो उसमें अलग-अलग समाज के लोग हार्दिक का सम्मान करते हैं चाहे वो पाटन की रैली हो या मेहसाणा की रैली हो या फिर वडोदरा की. क्षत्रिय, मुस्लिम और पिछड़ा समाज के लोग बारी-बारी आकर रैली में न सिर्फ हार्दिक का सम्मान कर रहे हैं बल्कि मंच से वो हार्दिक की बात पर जनता को गौर करने की अपील भी कर रहे हैं. यह तथ्य चौंकाना वाला है क्योंकि पास का आंदोलन सिर्फ और सिर्फ पटेलों तक ही सीमित था लेकिन रैलियों का प्लानिंग कुछ और कह रही है. खास बात ये है कि हार्दिक ने अपने रैलियों में बाकी समुदायों पर भी खूब बोला है. मसलन वो रैली में कहते हैं कि ये लड़ाई सिर्फ पटेलों की नहीं है, गैस का सिलेंडर की कीमत हो या सरकारी नौकरी में रिश्वत की बात या फिर किसानों को फिसलों का उचित मूल्य मिलना, ये किसी एक समाज का मुद्दा नहीं है, इससे सभी समाज परेशान हैं.

hardik_Hindi

राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदोरिया के मुताबिक, हार्दिक के उभार की बड़ी वजह मेरी नजर में लोगों का राजनीतिक दलों से मोहभंग होना है. लोगों को लगता है कि हार्दिक उनके लिए कुछ कर सकते हैं. हार्दिक का उदय केजरीवाल की तरह ही है. जनता दरअसल नए चेहरों को मौका देना चाहती है.

ये भी पढ़ें: गुजरात चुनाव 2017: असली मोर्चेबंदी बीजेपी और पाटीदारों के बीच, छींका टूटने के इंतजार में 

पूरी चुनावी मुहिम एक बात और हार्दिक के पक्ष में जा रही है कि बीजेपी और कांग्रेस की बीच आरोपों के शब्द बाण लगातार छोड़े जा रहे हैं लेकिन हार्दिक की चर्चा कहीं नहीं हो रही है. ऐसे में हार्दिक और उनकी टीम का सारा फोकस रैली करने पर है. अभी जरूर ये लगे कि हार्दिक की कोई भी कोशिश कांग्रेस की झोली भरेगी लेकिन जिस तरह से पास ने हार्दिक को पटेलों का नेता न बनाकर गुजरात के मुख्य विपक्षी नेता के रूप में पेश कर रही है ये आने वाले समय में कांग्रेस के लिए भी मुश्किल भरा होगा क्योंकि गुजरात में बीजेपी के मुकाबले हार्दिक मुख्य विपक्षी नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi