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गुजरात चुनाव 2017: कच्छ के 'गढ़' में कांग्रेस कैसे तोड़ेगी अंजार का किला?

अंजार सीट का चुनाव इसलिए दिलचस्प है क्योंकि मुकाबला फिर वासणभाई और हमबाल में है. साथ ही कच्छ में बीजेपी एक भी सीट खोकर अपना रिकॉर्ड खराब नहीं करना चाहेगी

Updated On: Nov 30, 2017 06:39 PM IST

FP Staff

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गुजरात चुनाव 2017: कच्छ के 'गढ़' में कांग्रेस कैसे तोड़ेगी अंजार का किला?

गुजरात में चुनावों के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है. पहले चरण की वोटिंग में बस 10 दिन बचे हैं. ऐसे में चुनावी प्रचार भी जोर-शोर से जारी है. गुजरात में 182 विधानसभा सीटों पर वोटिंग होने वाली है. यहां पहले चरण के चुनाव 9 दिसंबर और दूसरे चरण की वोटिंग 14 दिसंबर को होगी. नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे.

राज्य के कच्छ जिला दोनों ही पार्टियों के लिए बड़ी चुनौती और संभावनाएं लेकर आ सकता है. कच्छ जिला बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए ही काफी मायने रखता है. बीजेपी के लिए इसलिए क्योंकि यहां बीजेपी की अच्छी पकड़ है. कांग्रेस के लिए इसलिए क्योंकि  कच्छ में 6 विधानसभा सीटें हैं- अबडासा, भुज, अंजार, मांडवी, रापर और गांधीधाम, इनमें अबडासा को छोड़कर सभी बीजेपी के पास हैं.

अबडासा पर पिछले विधासभा चुनावों में कांग्रेस के उम्मीदवार छबीलभाई नरनभाई पटेल जीतकर विधायक बने थे. इन 6 सीटों में 5 बीजेपी की सुरक्षित सीट हैं. ऐसे में बीजेपी इसे बचाकर रखना चाहेगी. वहीं, कांग्रेस के लिए बीजेपी के इस गढ़ में घुसना एक चुनौती होगी.

यहां बात अंजार विधानसभा सीट की. अंजार में फिलहाल बीजेपी के वासनभाई गोपाल भाई सिटिंग एमएलए हैं. वासनभाई को पिछले विधानसभा चुनावों में कुल 64, 789 यानी 47.16 प्रतिशत वोट मिले थे. उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार वी.के. हमबाल को हराया था. हमबाल को 60,061 (43.72%) वोट मिले थे.

वासणभाई गोपालभाई.

वासणभाई गोपालभाई.

इस बार भी मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच है. बीजेपी ने फिर वासणभाई में अपना भरोसा जताया है और कांग्रेस ने फिर मुकाबले में वीके हमबाल को ही उतारा है. वासणभाई चार बार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल कर चुके हैं. साथ ही वो गुजरात सरकार में सामाजिक व पिछड़ा वर्ग मंत्री भी रह चुके हैं.

इसके पहले ये सीट 2007 और 1998 में भी बीजेपी के पास रह चुकी है. बीच में ये सीट कांग्रेस के पास आई 2003 में.

अंजार सीट का चुनाव इसलिए दिलचस्प है क्योंकि मुकाबला फिर वासणभाई और हमबाल में है. साथ ही कच्छ में बीजेपी एक भी सीट खोकर अपना रिकॉर्ड खराब नहीं करना चाहेगी.

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