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गुजरात के वो सीएम जिनकी पाकिस्तान ने ले ली थी जान

पूर्व गुजरात सीएम के साथ हवाई जहाज में मौजूद उनकी पत्नी सरोजबेन, स्टाफ के तीन मेंबर्स, दो क्रू मेंबर्स और एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी

FP Staff Updated On: Dec 07, 2017 04:33 PM IST

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गुजरात के वो सीएम जिनकी पाकिस्तान ने ले ली थी जान

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ट्विटर पर एक सर्वे चला रही है. ये सर्वे #KnowYourLegacy series नाम से चलाया जा रहा है. हाल ही में इस सर्वे में एक सवाल पूछा गया कि भारत में गुजरात के किस पूर्व मुख्यमंत्री को 'आर्किटेक्ट ऑफ पंचायती राज' माना जाता है. इसके लिए चार ऑप्शंस (आनंदी बेन, केशूभाई पटेल, बलवंतराय मेहता, नरेंद्र मोदी) दिए गए. ज्यादातर लोगों ने इस सवाल का 43 फीसदी लोगों ने सही जवाब दिया. वो बलवंतराय मेहता ही थे, जिन्हें आर्किटेक्ट ऑफ पंचायती राज कहा जाता था. बलवंतराय मेहता गुजरात के दूसरे मुख्य मंत्री थे.

लेकिन बलवंतराय मेहता से जुड़ा एक मामला और भी है. वो देश के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री भी थे, जिनकी मौत के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार था. 19 सितंबर, 1965 में जिस बीचक्राफ्ट चॉपर से बलवंतराय कच्छ के रण में भारत-पाक सीमा के पास उड़ान भर रहे थे. उसे पाकिस्तान के वायु सेना के पायलट ने उड़ा दिया था. पूर्व गुजरात सीएम के साथ हवाई जहाज में मौजूद उनकी पत्नी सरोजबेन, स्टाफ के तीन मेंबर्स, दो क्रू मेंबर्स और एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी. जिस वक्त ये घटना हुई उस वक्त पर भारत-पाकिस्तान के बीच जंग चरम पर थी.

वहीं इस घटना के 46 साल बाद पाकिस्तान के उस पायलट ने बीचक्राफ्ट के चीफ पायलट की बेटी को खत लिखकर माफी मांगी है. चीफ पायलट की बेटी ने भी बड़ा दिल रखा और अपने पिता के कातिल को माफ कर दिया.

क्या हुआ था उस वक्त

कहते हैं मेहता को अहमदाबाद से 400 किलोमीटर की दूरी पर मीठापुर में रोका गया था. लेकिन वो फिर भी कच्छ बॉर्डर की ओर निकल गए. मीठापुर से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही उनके बीचक्राफ्ट को पाकिस्तानी लड़ाकू विमान के पायलट ने इंटरसेप्ट कर लिया. पायलट ने पाकिस्तान ग्राउंड-कंट्रोल इंटरसेप्शन का आदेश आने तक बीचक्राफ्ट को घेर लिया और उसके चारों-ओर चक्कर काटे. पाकिस्तान के लड़ाकू विमान को देख बीचक्राफ्ट ने अपने पंखे हिलाने शुरू कर दिए. ये दया भाव दिखाने और छोड़ देने का इशारा था. लेकिन पाकिस्तान सरकार की ओर से बीचक्राफ्ट को उड़ा देने का आदेश दिया गया.

19 फरवरी 1900 को बलवंतराय गोपालजी मेहता का जन्म भावनगर के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था. वो बारडोली सत्याग्रह का भी हिस्सा बने. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन में भी बढ़कर हिस्सा लिया था. और इस कारण उन्हें 1942 में तीन साल जेल की सजा सुनाई गई थी. मेहता ब्रिटिश रूल के दौरान सात सालों तक जेल में रहे. महात्मा गांधी के सुझाव बाद वो कांग्रेस कार्यकारी समिति से जुड़े. तब पंडित जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे.

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