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गुजरात चुनाव नतीजे 2017: राहुल की कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण दिखाने वाला है चुनाव परिणाम

गुजरात चुनाव के नतीजों ने राहुल गांधी को बीजेपी के सामने ज्यादा मजबूती से खड़ा कर दिया है. विपक्ष के नेता के बतौर उन्हें हल्के में लेने की कोशिश अब बीजेपी भी नहीं करेगी

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Dec 19, 2017 08:23 PM IST

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गुजरात चुनाव नतीजे 2017: राहुल की कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण दिखाने वाला है चुनाव परिणाम

गुजरात चुनाव के नतीजों में दो बड़े स्पष्ट संदेश छिपे हैं. पहला- बीजेपी की जितनी हवा बनाई जा रही थी, उतना दम दिखा नहीं और दूसरी- कांग्रेस को जितना पिद्दी बताया जा रहा था उतनी कमजोर वो निकली नहीं. हां! एक बात है कि सरकार बनाने लायक सीटें बीजेपी ने जुगाड़ कर ली.

इस बात का जश्न मनाना बनता है क्योंकि ये बीजेपी की लगातार छठवीं जीत है. 22 साल से लगातार बीजेपी जीतती आ रही है तो इस जीत को यूं ही हवा हवाई बताना भी ठीक नहीं है. ऐसी सिलसिलेवार जीत के बंगाल और सिक्किम जैसे उदाहरण कम ही मिलते हैं.

इस बात में कोई दो राय नहीं कि पूरा जोर और जी-जान लगा देने के बावजूद कांग्रेस जीत की सीमा रेखा छूते-छूते रह गई. यूं कहें कि इस रेस में आखिर में जाकर कांग्रेस की सांस उखड़ गई. बीजेपी जीत गई. ये कैसे क्यों और किसके बूते हुआ? इस पर पहले से ही बहस चल रही है, इसके कुछ वाजिब जवाब भी हैं और कुछ अकाट्य तर्क भी. लेकिन सवाल ये उठता है कि कांग्रेस को इन नतीजों से क्या सबक लेना चाहिए. ये नतीजे कांग्रेस के लिए क्या नजरिया पेश करते हैं. इस बात को समझने के लिए कांग्रेस के नहीं बीजेपी के कुछ बेहद बड़े नेताओं के बयान सुनने चाहिए.

गुजरात चुनाव के नतीजों पर उत्साहित कुछ बीजेपी नेताओं के बयान पर जरा ध्यान दीजिए. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- ‘अभी तो कुछ नहीं बोलूंगा क्योंकि वो हाल ही में अध्यक्ष बने हैं लेकिन सिर मुंडवाते ही ओले पड़े.’ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- ‘मैंने तो पहले ही कहा था कि कांग्रेस का नेतृत्व बदलना बीजेपी के लिए शुभ संकेत होगा.’ गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर ने कहा- ‘वो पहली पारी में ही शून्य पर आउट हो गए.’ मशहूर फिल्म अभिनेता और बीजेपी सांसद परेश राव ने कहा- ‘गुजरात और हिमाचल के चुनाव में बीजेपी की जीत राहुल के उनके अध्यक्ष पर दिया बीजेपी का तोहफा है.’

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इन बयानों से क्या समझा जाए? ऐसा नहीं लगता कि बीजेपी नेताओं की अपनी जीत की खुशी तो थी ही लेकिन वो उससे भी ज्यादा नए नवेले अध्यक्ष बने राहुल गांधी की हार से खुश दिखाई दे रहे थे. ये बयान बताने के लिए काफी हैं कि गुजरात चुनाव के नतीजों ने राहुल गांधी को बीजेपी के सामने ज्यादा मजबूती से खड़ा कर दिया है. विपक्ष के नेता के बतौर उन्हें हल्के में लेने की कोशिश अब बीजेपी भी नहीं करेगी. गुजरात चुनाव के नतीजों में कांग्रेस भले ही बहुमत से पीछे रह गई हो लेकिन इस चुनाव के केंद्र में राहुल गांधी ही दिखे. तभी चुनावों के दौरान से लेकर नतीजों के ऐलान तक बीजेपी नेताओं को वो सबसे ज्यादा याद आए.

राहुल गांधी पिछले तीन महीने से लगातार गुजरात का दौरा कर पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं

राहुल गांधी तीन महीनों तक लगातार गुजरात का दौरा कर पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किए

चुनाव परिणाम में कांग्रेस के लिए खुश होने की कई वजहें हैं

साफतौर पर गुजरात की चुनावी जंग पीएम मोदी और राहुल गांधी के बीच थी. जिसमें पीएम मोदी अपने बूते गुजरात में बीजेपी सरकार बचाने में कामयाब रहे. जबकि कांग्रेस ने अपने पिछले प्रदर्शन के लिहाज से सुधार किया. बीजेपी ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की और कांग्रेस 77 सीटों पर कब्जा जमा पाई. पिछली बार बीजेपी को 115 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस को 61 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. इस चुनाव में बीजेपी को 16 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा जबकि कांग्रेस को इतने ही सीटों का फायदा हुआ. लेकिन इसके बीच बड़ी बात ये है कि बीजेपी को पिछले 25 साल में पहली बार 100 से कम सीटें मिलीं.

Assembly Election Results in Gujarat

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कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने चुनावी नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस अगर थोड़ी सावधानी से काम लेती तो हम सात से आठ सीटें ज्यादा जीत सकते थे. उनका मानना है कि बीजेपी से उकताई गुजरात की जनता का अगर थोड़ा ख्याल और रखा जाता तो वो बीजेपी विरोध को अपने फायदे में भुनाने में कामयाब होते. अहमद पटेल कहते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने अच्छा खासा माहौल बना दिया था. जनता पीएम मोदी से ज्यादा राहुल गांधी को रिस्पॉन्स दे रही थी लेकिन कांग्रेस के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता इसे वोट में तब्दील नहीं कर पाए.

अहमद पटेल के इस बयान को नतीजों से मिलाकर देखें तो उनकी बात में दम दिखता है. इस चुनाव में बीजेपी को 13 सीटों पर 5000 से कम के अंतर से जीत हासिल हुई. इन सीटों पर अगर कांग्रेस अपनी पकड़ थोड़ा बढ़ाती तो मामला सीधे उलटा हो सकता था.

ये कांग्रेस के दिन बदलने की शुरुआत मानी जा सकती है

चुनाव के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी की तुलना में कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा है. कांग्रेस को इस चुनाव में 41.8 फीसदी वोट शेयर मिले हैं, जबकि 2012 के चुनाव में उसे 38.93 फीसदी वोट शेयर हासिल था. यानी पिछले बार की तुलना में कांग्रेस के कुल वोट शेयर में 7.37 फीसदी का इजाफा हुआ है. वहीं बीजेपी को इस चुनाव में 48.5 फीसदी वोट शेयर मिला है, जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 47.85 फीसदी था. यानी बीजेपी के वोट शेयर में 1.3 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन इसके साथ ही उसे 16 सीटों का नुकसान भी हुआ है.

The Cong v BJP vote Share Gujarat

1995 के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर भी कम हुआ है. बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर 2012 में 9 फीसदी था जबकि इस चुनाव में वो घटकर 7.7 फीसदी रह गया है. कांग्रेस के बढ़े हुए वोट शेयर से ये संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है.

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इस बाजी में कांग्रेस खेल पलटते-पलटते कहां चूक गई. राहुल को इसके लिए जिम्मेदार मानने वाले लोगों को जवाब देते हुए अहमद पटेल का कहना है कि ‘राहुल को जो करना था, उन्होंने कर दिया. अब क्या राहुल गांधी लोगों को वोट देने के लिए बूथ सेंटर तक लेकर जाते? ये काम कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का है और चूक वहीं हुई है.’ अहमद पटेल के इस बयान के मर्म को समझा जा सकता है. एक तो वो खुले तौर पर राहुल गांधी का बचाव करने को बाध्य हैं और वो ऐसा करें भी क्यों न? दूसरी उनके इस बयान में कुछ हद तक सच्चाई भी दिखती है.

इस बात में कोई शक नहीं है कि कांग्रेस एक संगठन के तौर पर पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है. इन वर्षों में बीजेपी ने अपने मुखिया अमित शाह की बदौलत गांव-कस्बों तक में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, वहीं कांग्रेस की पकड़ इन इलाकों में लगातार कमजोर हुई है. एक बात ये भी है कि इस नए दौर में पुराने कांग्रेसियों की एक पूरी पीढ़ी फेज आउट हुई है. इस गैप को कांग्रेसियों की नई पीढ़ी अब तक नहीं भर पाई है.

कांग्रेस को सोचना चाहिए कि आखिर युवा पीढ़ी किन मुद्दों के आधार पर उसके प्रति आकर्षित होगी? एक बात ये भी है कि गुजरात चुनाव के नतीजे कांग्रेस के प्रति लोगों के झुकाव से ज्यादा सरकार विरोधी माहौल का परिणाम प्रतीत होते हैं. राहुल और उनकी कांग्रेस को एंटी इंकम्बेंसी से ज्यादा खुद, अपनी विचारधारा और अपने विज़न पर यकीन करना होगा और यही यकीन जनता को भी दिलाना होगा.

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