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गुजरात चुनाव 2017: BJP की जीत में इस शख्स का होगा अहम योगदान

भूपेंद्र यादव अमित शाह की तरह ही चुनावी रैली में वार रूम के दायरे में ही रहकर काम करना पसंद करते हैं

FP Staff Updated On: Dec 18, 2017 08:44 AM IST

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गुजरात चुनाव 2017: BJP की जीत में इस शख्स का होगा अहम योगदान

भूपेंद्र यादव, अमित शाह की ही तरह काम करने पर विश्वास करते हैं. शाह की तरह ही वह चुनावी रैली में वार रूम के दायरे में ही रहकर काम करना पसंद करते हैं. वह बीजेपी महासचिव हैं. गुजरात चुनाव के प्रभारी के तौर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका में सामने आए हैं.

यूपी में मिली जीत के बाद अमित शाह की नजर अपने गृह प्रदेश गुजरात पर गई. यूपी विधानसभा चुनाव के ठीक बाद अप्रैल में यूपी के ओबीसी नेता और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव को गुजरात में चुनाव प्रभारी बनाया गया. 8 महीने में ही उन्होंने गुजरात की जटिलता और वहां के जातिगत समीकरणों को समझते हुए रणनीति बनानी शुरू कर दी.

कैसे बने शाह की पसंद?

भूपेंद्र यादव ऐसे ही अमित शाह की पसंद नहीं बने. वह साल 2013 में राजस्थान में बीजेपी के चुनाव प्रभारी थे. साल 2014 में झारखंड और साल 2015 में बिहार के प्रभारी बने. हालांकि, बिहार चुनाव में बीजेपी जैसा चाहती थी वैसा नहीं हुआ, लेकिन राजस्थान और झारखंड में भूपेंद्र ने शाह को रिजल्ट दिया. राजस्थान की 200 विधानसभा सीट में बीजेपी को 163 सीटों पर जीत मिली. वहीं, झारखंड में बीजेपी को गठबंधन को 82 में से 47 सीट मिली. पार्टी के अंदरूनी लोग भूपेंद्र को वसुंधरा राजे की 'सुराज संकल्प यात्रा' का भी क्रेडिट देते हैं. इसमें राजे ने 33 जिले में 13,000 किमी की यात्रा की थी.

जब ये पूछा जाता है कि भूपेंद्र यादव का गुजरात में क्या रोल था, गुजरात के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'मैं आपका मतलब नहीं समझ रहा. आप मुझसे पूछ रहे हैं कि क्या उन्होंने किया? उन्होंने सबकुछ किया. उन्होंने टिकट बंटवारे से लेकर बूथ लेवल तक के मैनेजमेंट का काम देखा. अमित शाह ने प्लान तैयार किया और भूपेंद्र यादव ने उसे जमीन पर उतारा.'

नेता ने कहा, 'यादव अक्सर सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करने से दूर रहते हैं. वह अक्सर कहते हैं, केवल रैली करने से कुछ नहीं होगा. उनकी रणनीति लोकल फैक्टर की होती है. वह सीएम सहित राज्य के दूसरे नेताओं के साथ बैठते हैं और विधानसभा सीट के हिसाब से कैंडिडेट और फैक्टर पर बात करते हैं. जब ये नेता रैलियों में जाते हैं तो वह क्षेत्रीय नेताओं के साथ मिलकर वहां की रणनीति बनाते हैं.'

उन्होंने कहा, 'यादव अमित शाह के 'पन्ना प्रमुख' के क्रियान्वयन के प्रभारी हैं. आप देख सकते हैं कि हर विधानसभा सीट में कई बूथ हैं और हर पोलिंग स्टेशन पर उसका वोटर लिस्ट होता है. ये वोटर लिस्ट कई पन्नों में होता है और हर पेज पर 20-30 वोटर के नाम होते हैं. इसमें उन्होंने हर पेज के लिए पन्ना प्रमुख बनाया है.'

ये थी बीजेपी की रणनीति

एक सूत्र के मुताबिक, इसके लिए एक पिरामिड संरचना बनाई गई है. गुजरात में 50 हजार पोलिंग स्टेशन हैं और 182 विधानसभा सीटें. बीजेपी ने एक 'शक्ति केंद्र' बनाया है, जो कि 5-6 पोलिंग बूथ की निगरानी करता है. हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 पोलिंग बूथ हैं. पेज प्रमुख बूथ इंचार्ज को जवाब देता है, जो कि शक्ति केंद्र को जवाब देता है. वहीं, शक्ति केंद्र क्षेत्रीय विधायक, विधानसभा प्रभारी को जवाब देता है, जो कि राज्य नेतृत्व को जवाब देता है.

एक नेता ने कहा, भूपेंद्र यादव एक निश्चित समयावधि में हर पिरामिड को चेक करते हैं. अमित शाह और भूपेंद्र यादव का मानना है कि पन्ना प्रमुख जीत के प्रमुख बिंदू होते हैं. यह निश्चित करता है कि पार्टी के लोग हर वोटर तक पहुंचते हैं और व्यक्तिगत कॉन्टेंक्ट बनाते हैं. यह जमीनी काम कांग्रेस नहीं कर पाती. लेकिन यादव इस बखूबी अंजाम देते हैं.

साभारः न्यूज18 हिंदी

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