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गुजरात चुनाव 2017: सौराष्ट्र में नाराज पाटीदारों को मना पाएगी बीजेपी?

बीजेपी नेता अंदर ही अंदर डरे हुए दिख रहे हैं. उनका आत्मविश्वास डगमगाया हुआ है. लेकिन, सबकी काट के तौर पर उनको अभी भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर भरोसा है

Amitesh Amitesh Updated On: Nov 20, 2017 10:32 AM IST

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गुजरात चुनाव 2017: सौराष्ट्र में नाराज पाटीदारों को मना पाएगी बीजेपी?

राजकोट से सटे मोरवी जिले की टंकारा विधानसभा क्षेत्र में कल्याणपुर गांव के लोग गुस्से में हैं. जैसे ही गुजरात चुनाव और वोट देने की बात सामने आती है, इनके चेहरे पर गुस्सा साफ झलक जाता है. कल्याणपुर के युवा पटेल प्रकाश भाई सवसाणी मोरवी में टाइल्स का कारोबार करते हैं. लेकिन, पाटीदार आंदोलन के वक्त इनका हार्दिक का साथ देना महंगा पड़ गया.

हार्दिक पटेल के साथ आने के बाद पुलिस की पिटाई के साथ-साथ इन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी. लगभग दो साल बाद भी प्रकाश भाई सवसाणी इस बात को नहीं भुला पा रहे हैं. इस बार चुनाव में वो बीजेपी को सबक सिखाने की बात कर रहे हैं. इनकी नाराजगी का एहसास इस बात से लगाया जा सकता है कि अब वो कहने लगे हैं कि ‘आरक्षण मिले या ना मिले बीजेपी को हराना है.’

कमोबेश यही हाल कल्याणपुर के पास सटे जबलपुर का है. टंकारा विधानसभा में ही आने वाले जबलपुर में लगभग दो हजार से ज्यादा पाटीदार वोटर हैं. जबलपुर में लोग हार्दिक पटेल के साथ खड़े दिख रहे हैं. जबलपुर के पाटीदार समाज के रमेश भाई बालोडिया का कहते हैं ‘पाटीदार आंदोलन मा पाटीदार ने मारो वाती नाराज छे’. मतलब आंदोलन के वक्त पाटीदारों को जिस तरह से पुलिस द्वारा पीटा गया, उसको लेकर उनमें नाराजगी है.

जबलपुर गांव में बुजुर्ग पाटीदार किसान भी इस बार हार्दिक के साथ खड़े दिख रहे हैं. गांव के चौराहे पर दोपहर की धूप का आनंद ले रहे जब कुछ पुराने पाटीदार किसानों से बात हुई, तो उनका भी सुर कुछ ऐसा ही लगा. खोड़ाभाई कालवड़िया ने कहा, ‘हवे हमारा लोकोने आ सरकार नथी जोती, हवे थी हमें कांग्रेस ने मत आपसू’. खोड़ाभाई ने इस बार खुलकर कांग्रेस को वोट देने की बात भी कह दी.

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जबलपुर गांव में चौपाल पर जुटे पाटीदार समाज के लोग

बीजेपी को समर्थन देने वाले कई पाटीदार हार्दिक और कांग्रेस का गुण गाने लगे हैं

दरअसल, टंकारा का जबलपुर और कल्याणपुर का पाटीदारों का गांव हार्दिक पटेल के आंदोलन के वक्त इस इलाके में केंद्र बिंदु बनकर उभरा था. उस वक्त पटेलों पर की गई कारवाई के बाद नाराजगी का असर आज विधानसभा चुनाव में भी दिख रहा है. जो पटेल अभी तक खुलकर बीजेपी का साथ देते थे अब उनमें से कई पाटीदार हार्दिक के साथ कांग्रेस का गुण गाने लगे हैं.

हालाकि टंकारा क्षेत्र के पाटीदार बहुल मोटा खिंझड़िया में हालात थोड़े अलग दिख रहे हैं. इस गांव में भी युवा पाटीदार हार्दिक की तारीफ तो करते हैं. लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी कर रहे हैं. गांव में ही खेती का काम करने वाले युवा पाटीदार हितेश भाई छतरोला बातचीत के दौरान कहते हैं, ‘शिक्षण-क्षेत्रे जो हार्दिक पटेल अनामत की मांग करेछे, ते योग्य छे. हमें पाटीदार, हार्दिक पटेल नी आंदोलन वक्त साथे जाता. हम मोदी साहब का फैन छू, बाकी उसके धारासमय से नाराज छू.’

यानी हार्दिक के आंदोलन का हम समर्थन करते हैं, आरक्षण की मांग जायज है. हम मोदी साहब के फैन हैं, लेकिन, उनके विधायक से नाराज हैं.

मोटा खिझड़िया में बात करते-करते थोड़ी देर में पान की दुकान पर ही महफिल जम जाती है. धीरे-धीरे और भी कुछ लोग आ जाते हैं. सभी अपनी-अपनी बातों को लेकर बहस भी करने लगते हैं. लेकिन, बीजेपी के खिलाफ बोलने और हार्दिक के समर्थन में दिखने के बावजूद पाटीदारों के इस गांव में अभी भी प्रधानमंत्री मोदी को लेकर नाराजगी नहीं है.

बहस के बीच गांव के सरपंच वल्लभ भाई जगोदरा मानते हैं ‘यह युवा लोगों ने तो कांग्रेस का राज कहां देखा है. जब पैदा हुए तबसे बीजेपी ही है. बातों-बातों में तमतमाए हुए चेहरे के साथ सरपंच कहते हैं, ‘इन लोगों ने तो पैदा होते ही नल से पानी निकलते देखा है, पहले तो एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता था.’

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हितेश भाई-मोटा खिंडाडिया

पटेल समुदाय दोनों तरफ बंटा हुआ नजर आ रहा है

इस पूरे इलाके के दौरा करने के बाद लगा कि जिन गांव के लोगों पर पाटीदार आंदोलन के वक्त पुलिस की कारवाई हुई थी, उन गांवों में पाटीदार बीजेपी से ज्यादा खफा हैं. लेकिन, बाकी गांवों में अभी पटेल दोनों तरफ बंटे दिख रहे हैं. लेकिन, पहले की तुलना में बीजेपी के लिए यही चिंता का विषय है क्योंकि पिछले कई वर्षों से अब तक पटेल बीजेपी के साथ ही रहे हैं.

मोरवी जिले की टंकारा विधानसभा में लगभग 2 लाख 20 हजार वोटर हैं. इनमें से आधे वोटर पाटीदार समाज से हैं. इस इलाके में अब तक जीत और हार का फैसला पाटीदार ही करते आए हैं. पिछले 22 वर्षों से इस सीट पर बीजेपी हारी नहीं है. मोहनभाई कुंदाड़िया 1995 से यहां से लगातार जीतते आ रहे हैं. लेकिन, 2014 में राजकोट से सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में भी यहां बीजेपी के बावनजी मेहतलिया चुनाव जीत गए थे.

इस बार बीजेपी ने पाटीदारों की नाराजगी खत्म करने के लिए बावनजी का टिकट काटकर मोरवी जिलाध्यक्ष राघवजी भाई गडारा को टिकट थमाया है. इस सीट से टिकट के दूसरे दावेदार रहे किरीट भाई अंदरपा का दावा है कि ‘बीजेपी इस बार भी यहां से जीत दर्ज करेगी. किरीट भाई कहते हैं कि आज से 6 महीने पहले तो यह पूरा इलाका बीजेपी के लिए डार्क जोन था. लेकिन, अब हालात बदल रहे हैं.’

दरअसल, बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में तालुका और जिला पंचायत चुनाव में बीजेपी का सफाया हो गया था. करीब दो साल पहले हुए चुनाव में हार्दिक पटेल के आंदोलन का इतना असर था कि तालुका पंचायत की 16 और जिला पंचायत की 3 सीटों में सभी सीटों पर बीजेपी हार गई थी और कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया था.

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गुजरात बीजेपी के कार्यकर्ता किरीट भाई

बीजेपी नेताओं को नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर उम्मीद

बीजेपी नेता अंदर ही अंदर डरे हुए दिख रहे हैं. उनका आत्मविश्वास डगमगाया हुआ है. लेकिन, सबकी काट के तौर पर उनको अभी भी उम्मीद है. यह उम्मीद टिकी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर. पार्टी को लगता है कि स्थानीय निकाय के चुनाव की तुलना में इस बार हालात अलग होंगे.

बातचीत के दौरान बीजेपी नेता मान रहे हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी केशुभाई पटेल ने अलग पार्टी जीपीपी बनाकर चुनाव लड़ा फिर भी बीजेपी सौराष्ट्र की 54 में से 35 सीटें जीत गई. अब इस बार भी हालात कुछ वैसे ही होंगे.

लेकिन, बीजेपी नेताओं को समझना होगा पिछली बार केशुभाई पटेल की अलग पार्टी में नाराज पाटीदारों का वोट चला गया था. इस बार हार्दिक पटेल के कांग्रेस को समर्थन देने के बाद नाराज पाटीदार अगर बीजेपी से कांग्रेस की तरफ चले गए तो फिर बीजेपी के लिए मुश्किलें ज्यादा बढ़ सकती हैं.

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