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अपने ‘वाडा प्रधान’ नरेंद्र मोदी को लेकर गुजरात में लोगों का प्यार बरकरार है

मोरबी की रैली में नरेंद्र मोदी ने अपने पूरे भाषण के दौरान एक बार भी हार्दिक पटेल का नाम नहीं लिया. लेकिन, राहुल और उनके परिवार को गुजरात-विरोधी बताने से नहीं चूके

Updated On: Nov 30, 2017 04:29 PM IST

Amitesh Amitesh

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अपने ‘वाडा प्रधान’ नरेंद्र मोदी को लेकर गुजरात में लोगों का प्यार बरकरार है

सौराष्ट्र के मोरबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में लोगों का हुजूम भी था, जोश भी. मोदी को सुनने को लेकर मोरबी और आस-पास के इलाकों से आए लोगों ने बार-बार यही कहा कुछ भी हो जाए हमारे वाडा प्रधान की ही जीत होगी.

मोरबी के वाघपर गांव के सरपंच केशुभाई कड़िवार और उपसरपंच जयंती भाई कड़िवार दोनों एक साथ मोदी की रैली में पहुंचे थे. पटेल समुदाय के सरपंच और उपसरपंच में एक बार फिर से मोदी को देखने की ललक थी और उनके भीतर वही जोश-जुनून दिखा, जो अबतक था. रैली से पहले बातचीत के दौरान केशुभाई ने कहा कि ‘कोई समस्या नहीं है. पहले की तरह फिर से सभी पटेल हमारे साथ आ रहे हैं.’

उपसरपंच जयंती भाई का कहना था ‘हमारे वाडा प्रधान ने यहां गुजरात में रहते हुए बहुत कुछ किया है. पहले हमारे यहां पानी नहीं आता था, हमें पानी भरने के लिए दूर जाना पड़ता था, लेकिन, अब तो घर-घर में पानी पहुंचा दिया है. ये सब वाडा प्रधान के चलते ही हुआ है. इसलिए कांग्रेस के साथ जाने का कोई सवाल ही नहीं है.’

पटेल समुदाय के बड़े बुजुर्गों से बात करने के बाद हमने कुछ युवा पटेलों से भी बात करने की कोशिश की. ‘अनामत आंदोलन’ के वक्त हार्दिक पटेल के साथ गए युवा पटेलों और इस वक्त उन युवाओं के मन में चल रहे कौतूहल को जानने के लिए हमने रैली में आए कुछ युवा पटेलों से बात की. कई युवाओं से बात करने के बाद ऐसा लगा कि पहले से हालात में बदलाव हो रहा है.

मोरबी के ही रहने वाले उदय भाई सिताबरा का कहना था ‘हम पहले बीजेपी में थे, लेकिन, बाद में हार्दिक पटेल के साथ अनामत आंदोलन में चले गए थे, अब फिर बीजेपी में आ गए हैं. हम वोट तो बीजेपी को ही करेंगे.’

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उदय भाई की ही तरह चंद्रेश पटेल ने भी कुछ इसी तरह का जवाब दिया. मोदी की रैली का बेसब्री का इंतजार करते हुए चंद्रेश ने साफ-साफ लब्जों में कहा कि ‘पहले हम अनामत आंदोलन में थे लेकिन, हार्दिक पटेल तो कांग्रेस के हाथ खेल रहा है. इसलिए हम कांग्रेस के साथ नहीं जा सकते. हम बीजेपी को ही वोट करेंगे.’

रैली के दौरान हमने कई और युवा पटेलों से बात की तो ऐसा लगा कि हार्दिक पटेल और आरक्षण को लेकर हार्दिक की तरफ से चलाए जा रहे आंदोलन को लेकर इन युवाओं के मन में एक सॉफ्ट कार्नर है, लेकिन, कांग्रेस के साथ हार्दिक पटेल का हाथ मिलाना इन्हें रास नहीं आ रहा.

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बीजेपी को यहीं उम्मीद की किरण भी दिख रही है. बीजेपी के रणनीतिकार इस बात को मान रहे हैं कि हार्दिक के साथ खड़े अधिकतर युवा बीजेपी के ही साथ आ जाएंगे. हार्दिक के साथ सिर्फ वही बच जाएंगे जो परंपरागत रूप से कांग्रेस का साथ देते रहे हैं.

मोदी का है जादू बरकरार

प्रधानमंत्री की मोरबी की रैली में मौजूद लोगों से बात कर ऐसा लगा कि बीजेपी जो उम्मीद पाल रही थी उसे काफी मशक्कत के बाद ही सही कामयाबी जरूर मिल रही है. बीजेपी बार-बार मोदी के चेहरे को ही सामने रखकर सीधे गुजराती अस्मिता की बात कर रही है.

गुजरात में 13 सालों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद अब देश के वाडा प्रधान बन चुके नरेंद्र मोदी के लिए इस बार चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो गया है. लगातार तीन विधानसभा चुनाव में बीजेपी को गुजरात में जीत दिलाने वाले मोदी अब देश का नेतृत्व कर रहे हैं लेकिन, उन्हें भी पता है कि गुजरात में बीजेपी को जीत दिलाने के लिए एक बार फिर से उनकी जरूरत है. इस बार साख का सवाल है क्योंकि देश के ‘वाडा प्रधान’ बनने के बाद गुजरात चुनाव उनकी साख का सवाल बन गया है.

मोरबी की रैली में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पूरे भाषण के दौरान एक बार भी हार्दिक पटेल का नाम नहीं लिया. मोदी जानबूझकर रणनीति के तहत ही ऐसा कर रहे हैं, लेकिन, राहुल गांधी और उनके परिवार को एक बार फिर गुजरात-विरोधी बताने से नहीं चूक रहे.

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नेहरू-गांधी परिवार को गुजरात विरोधी बताने की रणनीति

नर्मदा पर डैम बनाने को लेकर हो रही परेशानी को लेकर नरेंद्र मोदी ने उस वक्त की यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए सोनिया गांधी को गुजरात विरोधी मानसकिता वाला बताया. मोदी गुजरात दौरे के पहले दिन अमरेली की रैली के दौरान नर्मदा डैम के मसले को उठाकर गुजरात के लोगों को ये बताने का प्रयास करते दिखे कि गुजरात में घूम-घूम कर प्रचार करते राहुल गांधी की ही सरकार ने पानी रोकने की कोशिश की.

सौराष्ट्र इलाके में पानी की मार झेल रहे लोग इस बात को मानते भी हैं कि नर्मदा का पानी आने से पहले कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता था. लेकिन, अब ये बीते जमाने की बात हो गई अब तो घर में ही नलों से पानी आ जाता है.

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इस दुखती रग को उठाकर मोदी की तरफ से कोशिश गुजरात के लोगों को अपने साथ जोड़ने की हो रही है. लेकिन, उन्हें भी इस बात का एहसास है कि नए युवाओं को इस बात की जानकारी नहीं है, जिन्होंने 1995 से पहले कांग्रेस के राज में पानी को लेकर हो रही परेशानी को देखा ही नहीं है.

अमरेली की अपनी रैली के दौरान मोदी ने इस बात का जिक्र भी किया जिसमें उन्होंने गुजरात के युवाओं के लिए भी संदेश था. मोदी ने रैली के दौरान कहा कि नए लड़कों को पता नहीं कि गुजरात में उनके माता-पिता और दादा को कैसे रात को अंधेरे में रहना पड़ता था.

गुजराती अस्मिता से जोड़ने की कोशिश

छह करोड़ गुजरातियों की बात करने वाले मोदी पिछले 14 साल से गुजरात के दिलों पर राज करते आए हैं. देश भर में गुजरात की पहचान और गुजरात मॉडल को लेकर जो भी चर्चा होती रही है, उसके केंद्र में मोदी ही रहे हैं.

एक बार फिर से मोदी ने मंच से इस बात का संकेत भी दिया. मोदी ने गुजरात के लोगों को ये दिखाने की कोशिश की इस बार आपकी पांचों उंगलियां घी में है. इसे बेजा जाने न दें.

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मोदी की इस अपील में साफ झलक रहा था कि इस बार आपका वाडा प्रधान दिल्ली में बैठा है और अगर दूसरा गांधीनगर में भी अगर कोई अपना बैठेगा तो फिर गुजरात का विकास और भी ज्यादा होगा.

मोरबी की रैली में आए सुरेश भाई ठाकोर ने रैली के बाद कहा ‘हम अल्पेश ठाकोर के साथ नहीं, हम अपने वाडा प्रधान के साथ हैं. उसने हमारे सौराष्ट्र के लिए बहुत कुछ किया है. हमें पानी दिया है, बिजली दिया है, उसे हम कैसे भूल सकते हैं.’

अपने दो दिनों की चुनावी रैलियों के दौरान मोदी अपने चाय वाले होने की बात कहकर कांग्रेस को घेरने की पूरी कोशिश भी कर रहे हैं. कांग्रेस की तरफ से चाय वाला कहकर मोदी का मजाक उड़ाने वाले ट्वीट ने मोदी को अपनी गुजराती अस्मिता वाली पहचान को नई धार देने का मौका मिल गया है. मोदी कहते हैं कि हमने चाय बेची है, देश नहीं. निशाने पर राहुल गांधी-सोनिया गांधी और पूरी कांग्रेस है.

फिलहाल रैली और रैली के बाद अलग-अलग लोगों से बात कर ऐसा लग रहा है कि गुजराती समुदाय में अभी भी मोदी का जादू बरकरार है. आम गुजराती को अपने वाडा प्रधान से कोई गिला-शिकवा नहीं है. बीजेपी को मोदी का यही जादू नईशक्ति दे रहा है. पार्टी को लग रहा है कि जो थोड़ी –बहुत नाराजगी होगी, वो मोदी के नाम पर दूर कर ली जाएगी.

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