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गुजरात चुनाव 2017: पटेलों की नाराजगी में बीजेपी को कोली समुदाय का सहारा!

राज्य में बीजेपी के लिए पटेल समुदाय में नाराजगी तो कोली अभी काफी हद तक पार्टी के साथ दिखाई दे रहे हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Nov 29, 2017 08:41 AM IST

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गुजरात चुनाव 2017: पटेलों की नाराजगी में बीजेपी को कोली समुदाय का सहारा!

सोमनाथ मंदिर और उसके आस-पास के इलाके में चुनावी सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. नेताओं के दौरे के बाद वोटों का गणित भी बदलने की उम्मीद लग रही है.

सोमनाथ मंदिर से सटे बिरावल के कोलीवाड़ इलाके में हनुमान मंदिर के सामने इन दिनों चाय की दुकान पर बस यही बात छिड़ी है कि इस बार वोट किसे देना है. कोलीवाड़ के रहने वाले कोली समाज के मोहन भाई वायलो कहते हैं ‘मोदी नू भगवान छे, पर इहां नी सोमनाथ सीट ऊपर जसां बांड़ भाजप ने प्रमुख धारासबय होता, अवे हमार गमता नथीं हवे कांग्रेस या हमारे विमल चूडासमा सारा मा सारा मानस छे.’ मतलब ‘मोदी तो भगवान हैं, लेकिन, इस सीट पर बीजेपी का उम्मीदवार हमें रास नहीं आ रहा. दूसरी तरफ कांग्रेस के विमल चूडासमा कोली समुदाय से ही हैं तो सभी लोग उन्हीं के बारे में सोच रहे हैं.’

कोली समाज के मोहन भाई वायलो के बयान में ही उनके भीतर चल रहे विरोधाभास और अंतरद्वन्द की झलक मिल जाती है. मोहन भाई पिछले कई सालों से लगातार चुनावों में बीजेपी को वोट देते आए हैं. उनके दिल में मोदी के लिए भगवान का दर्जा है, लेकिन, बीजेपी के स्थानीय उम्मीदवार से वो खफा हैं. अब तो कांग्रेस ने कोली समाज के विमल चूडासमा को मैदान में उतार दिया है तो ‘अपने भाई’ को वोट देने की बात होने लगी है.

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पर्वत भाई कराड़िया का कहना है ‘कोली समाज को मोदी पर भरोसा है, बीजेपी पर नहीं. लेकिन, इतनी बात तो हमारे समझ में आती है कि अगर दिल्ली और गांधीनगर दोनों जगह एक ही व्यक्ति होगा तो फिर गुजरात का विकास होगा.’ आगे जब कुछ और लोगों से मुलाकात होती है तो उनके भी दिल और दिमाग में चल रही खींचतान की झलक दिख जाती है. कोली समाज के अर्जन भाई थारेचा ने बातचीत के दौरान कहा ‘ऊपर ने सरकार ने भाजप नी सरकार ने बनसे ,बेरावल ना हमारे कांग्रेस ने सीट मडसे.’ यानी ‘ऊपर गुजरात में बीजेपी की सरकार बने लेकिन, सोमनाथ-बिरावल की सीट पर कांग्रेस की जीत हो.’

पूरे सोमनाथ-बेरावल सीट पर कोली समुदाय के बीच ऐसा ही माहौल है. दरअसल, कोली समुदाय के लोग परंपरागत बीजेपी के समर्थक रहे हैं. लेकिन, इस बार इस सीट पर वो बीजेपी के जशाभाई बराड से नाराज हैं. पिछली बार जशाभाई वराड ने कांग्रेस के टिकट पर यहां चुनाव जीता था, लेकिन, इस बार वो पाला बदलकर भगवा खेमे में पहुंच गए हैं. फिलहाल यह बात कोली समाज के लोगों को रास नहीं आ रही है.

मोदी की रैली के बाद बदल जाएगा सबकुछ !

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मोदी को लेकर अपनेपन के बावजूद इस सीट पर बीजेपी के विरोध की तहकीकात जानने के लिए हमने मोटा कोलीवाड के कुछ और इलाकों में जाकर लोगों से बातचीत की तो लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद यहां का नजारा बदल भी सकता है.

कोली समुदाय के जयेश भाई ने कहा ‘जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां का दौरा करेंगे तो काफी बदलाव होगा. यह तो अभी तात्कालिक नाराजगी है जो टिकट बंटवारे के बाद हुई है.’ बीजेपी के प्रदेश संगठन और मीडिया सेल से जुड़े प्रशांत वाला से जब हमने इस बाबत बात की तो उनका मानना था कि ‘इस इलाके के सांसद भी कोली समुदाय से हैं और भी कई स्थानीय नेता इस काम में लगे हैं. थोड़ी-बहुत नाराजगी है तो उन्हें दूर कर लिया जाएगा.’

कोली समुदाय के लोगों ने इसके पहले हर चुनाव में बीजेपी को ही वोट दिया था. लोकसभा चुनाव में कोली समुदाय के ही राजेश चूडासमा की यहां बड़ी जीत हुई थी. अब बीजेपी इन लोगों के माध्यम से अपने परंपरागत वोटर को अपने साथ जोड़े रखने की कोशिश कर रही है.

गिर सोमनाथ जिले में कोली समुदाय का है दबदबा

जूनागढ़ से अलग होकर बने गिर सोमनाथ जिले में चार विधानसभा सीटें हैं, जहां हर सीट पर कोली समुदाय का दबदबा है. सोमनाथ सीट पर 2 लाख के आस पास वोटर हैं जिनमें कोली समाज की तादाद 36,500 के करीब है. कोडिनार सीट पर भी करीब 2 लाख वोटर हैं जिनमें पचास हजार से ज्यादा सिर्फ कोली समुदाय से ही हैं.

इसके अलावा तलाला विधानसभा में कोली वोटर 34000 के करीब हैं. जिले की उना विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा कोली मतदाता हैं. उना के 2 लाख पांच हजार वोटर में से 67,000 से ज्यादा मतदाता अकेले कोली समुदाय से ही आते हैं. मतलब इस सीट पर कोली मतदाता जिसकी तरफ जाते हैं, जीत उसी की होती है.

कोडिनार सुरक्षित सीट पर बीजेपी ने जेठाभाई सोलंकी का टिकट काटकर रामभाई वाढ़ेल को मैदान में उतार दिया है. इस सीट पर बीजेपी के जेठाभाई सोलंकी की ही जीत हुई थी.

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जिले की चारों विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने उना से कोली समुदाय के हरिभाई सोलंकी को मैदान में उतारा है. जबकि कांग्रेस ने उना से मौजूदा विधायक पूजा भाई वंश और सोमनाथ से विमल चूडासामा को टिकट देकर कोली समुदाय को खुश करने की कोशिश की है.

सोमनाथ जिले में कोली बीजेपी के साथ !

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सोमनाथ विधानसभा क्षेत्र में भले ही कोली समुदाय के लोगों में असमंजस दिख रहा हो. लेकिन, उना समेत बाकी विधानसभा क्षेत्रों में कोली समुदाय का झुकाव बीजेपी की तरफ ही लग रहा है. उना ताल्लुका में पिछले बीस सालों से पान की दुकान चला रहे सामंत भाई डाबी कहते हैं, 'यहां से तो दोनों ने ही कोली जाति को ही टिकट दिया है. लेकिन, इस बार बीजेपी की तरफ लोग ज्यादा दिख रहे हैं.'

थोड़ी ही दूरी पर चाय की दुकान पर बैठे कोली समुदाय के लोगों से बात होने लगी तो उनका भी रुझान कुछ ऐसा ही दिखा. विजय भाई डाबी का कहना था ‘हम तो शूरू से ही भाजप को वोट देते आ रहे हैं, इस बार भी कुछ अलग नहीं होगा. जबकि वेला भाई कहते हैं कि मोदी को ही हमलोग वोट देंगे. वो हमारे यहां का वाडा प्रधान है.’

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली की शुरुआत हो गई है. मोदी की रैली के बाद मोदी को ‘भगवान’ मानने वाले सोमनाथ के कोली समाज में कितना बदलाव होगा इस पर सबकुछ निर्भर करेगा. क्या सोमनाथ के कोली अपने ‘भगवान’के साथ जाएंगे या फिर अपने भाई ‘कांग्रेस उम्मीदवार विमल चूडासामा’ का साथ निभाएंगे?

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