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राधनपुर सीट: क्या अल्पेश ठाकोर की मदद से कांग्रेस को मिल पाएगी उसकी 20 सालों से खोई हुई साख

राधनपुर सीट पर सभी की नजरें गड़ी हुईं हैं. इस सीट पर कांग्रेस के टिकट से युवा ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर मैदान में हैं

Updated On: Nov 30, 2017 05:22 PM IST

FP Editors

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राधनपुर सीट: क्या अल्पेश ठाकोर की मदद से कांग्रेस को मिल पाएगी उसकी 20 सालों से खोई हुई साख

गुजरात विधानसभा चुनाव का आगाज हो चुका है. हर एक सीट के लिए राजनीतिक दल जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. लेकिन राधनपुर सीट पर सभी की नजरें गड़ी हुईं हैं. इस सीट पर कांग्रेस के टिकट से युवा ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर मैदान में हैं. हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी के साथ-साथ अल्पेश ठाकोर का भी एक मजबूत ओबीसी नेता के तौर पर खूब नाम हुआ है. उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण ही कांग्रेस ने उन्हें अपने साथ जोड़ा है. इसके अलावा उनके पिता खोड़ाभाई पटेल भी पूर्व कांग्रेसी नेता हैं.

अल्पेश की इस सीट पर दावेदारी बेहद मजबूत है. यहां करीब दो-तिहाई आबादी ओबीसी की है और इस साल वोटर काउंट 2.59 लाख है. पाटण जिले में चार विधानसभा सीट हैं और राधनपुर उसमें से ही एक है. चारों सीटों पर जन्संख्या के मामले में ओबीसी सबसे आगे हैं. जिसमें सबसे ज्यादा 67 फीसदी ओबीसी काउंट राधनपुर में है. फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है. लेकिन अल्पेश ठाकोर की मजबूत दावेदारी को देखते हुए लग रहा है कि इस बार बीजेपी को इस सीट से हाथ धोना पड़ सकता है.

alpesh thakor rally

जनसभा को संबोधित करते अल्पेश ठाकोर

गुजरात की राजनीति में अल्पेश ठाकोर का नाम करीब तीन साल पहले उठना शुरू हुआ, जब उन्होंने अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला. उन्होंने ठाकोर सेना का गठन किया और उनके कार्यकर्ताओं ने देशी शराब के अड्डों पर छापे मारने शुरू किए. देखते-देखते लगभग 70 फीसदी ठाकोर समाज अल्पेश के साथ जुड़ गया. और इसी के साथ गुजरात को एक मजबूत ओबीसी नेता भी मिला.

जब कांग्रेस सत्ता में थी तो ओबीसी का पूरा साथ मिला था. लेकिन बाद में हिंदुत्व की लहर में ओबीसी बीजेपी के साथ हो लिए. ऐसे में 2017 के चुनाव में ये देखना दिलचस्प होगा कि गुजरात की सत्ता से पिछले 20 सालों से बाहर चल रही कांग्रेस अल्पेश का साथ पाकर अपनी खोई साख वापस पा सकेगी या नहीं.

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