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GST Impact: सीए की चांदी, कॉमर्स स्टूडेंट्स की लगी लॉटरी

कंपनियों का मानना है कि जीएसटी लागू होने से काम बढ़ेगा और ज्यादा लोगों की जरूरत होगी

Updated On: Jul 01, 2017 06:42 PM IST

FP Staff

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GST Impact: सीए की चांदी, कॉमर्स स्टूडेंट्स की लगी लॉटरी

मितुल रक्षित कैफे इंडिका की को-फाउंडर हैं. यह एक लाइफस्टाइल ब्रांड है जो इंटीरियर डिजाइनिंग का काम करता है. लेकिन जीएसटी लॉन्च के बाद मितुल और उनकी टीम ने अपना मुख्य काम किनारे कर बीकॉम ग्रेजुएट की खोज शुरू कर दी है. इसकी वजह है गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST).

जीएसटी लॉन्च होते ही बीकॉम ग्रेजुएट्स की मांग अचानक बढ़ गई है. अकाउंटिंग और फाइनेंस से जुड़ी जॉब्स के लिए बीकॉम को एंट्री लेवल डिग्री माना जाता है. अब तक ऐसा था कि बीकॉम पढ़ने वाले टॉप 5-10 प्रतिशत छात्रों को ही अच्छी जॉब मिल पाती थी और बाकियों को सीए और एमबीए जैसे स्पेशलाइज्ड कोर्स करने की जरूरत पड़ती थी.

जीएसटी कॉमर्स ग्रेजुएट्स के लिए एक वरदान बनकर आया है. जीएसटी नेटवर्क सॉफ्टवेयर में शुरुआती स्तर की एंट्री के लिए कई बिजनेस ओनर्स उनकी तलाश में जुट गए हैं. रक्षित ने न्यूज 18 को बताया, 'इस दौर में बीकॉम ग्रेजुएट्स की काफी जरूरत है.'

इन दिनों अलग-अलग टैक्स स्लैब को समझने, जीएसटीएन सॉफ्टवेयर को समझने और उसके क्रियान्वयन और समय पर रिटर्न फाइल करने जैसी चीजों के लिए बिजनेस ओनर्स बीकॉम ग्रेजुएट्स पर भरोसा कर रहे हैं.

चार्टर्ड अकाउंटेंड वरुण गोयल ने बताया, 'छह महीने पहले तक 15000 की सैलरी पर फ्रैश कॉमर्स ग्रेजुएट हायर करना आसान था. अब फ्रेश ग्रेजुएट की मिनिमम सैलरी 20,000 रुपये प्रति माह है.' उन्होंने कहा कि यदि आप तेज हैं और जीएसटी के बारे में अच्छा ज्ञान रखते हैं तो आपको 30,000 प्रतिमाह की नौकरी मिल सकती है.'

गुड़गांव के फिटनेस सॉल्यूशन प्रोवाइडर कंपनी फिट्सो के को-फाउंडर सौरभ अग्रवाल कहते हैं, 'आप हर छोटी चीज के लिए सीए के पास नहीं जा सकते हैं. सीए बड़ी चीजों को हैंडल करता है पर उसे बेसिक काम के लिए बीकॉम ग्रेजुएट्स की एक पूरी टीम की जरुरत होती है. या तो कंपनियां बीकॉम ग्रेजुएट्स को अपने पेरोल पर हायर कर रही हैं या फिर सीए उन्हें यह मैनपॉवर फ्री में उपलब्ध करा रहे हैं.'

कंपनियों का मानना है कि जीएसटी के क्रियान्‍वयन से अकाउंटिंग से जुड़ा काम बढ़ जाएगा. ऐसे में वे अपने पेरोल पर लोगों को हायर करना प्रिफर कर रहे हैं. पिछली व्यवस्था में साल में एक बार रिटर्न फाइल करना होता था लेकिन जीएसटी के तहत हर क्वार्टर में 9 रिटर्न फाइल करने होंगे.

(न्यूज 18 से साभार)

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