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नोटबंदी: अपने ही सेट किए पेपर में सरकार फेल!

सरकार के रोज रोज के ऐलान का सबसे बुरा असर गरीबों पर पड़ा है

Updated On: Dec 12, 2016 11:48 AM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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नोटबंदी: अपने ही सेट किए पेपर में सरकार फेल!

'ब्रेड नहीं है… तो केक खाने दो'  ये अठारहवीं सदी में फ्रांस की क्रांति के दौरान लुई 16वें की महारानी मैरी एंटॉयनेट ने कहा था. कहते हैं कि जब महारानी को यह पता चला कि अकाल के कारण गरीबों के पास ब्रेड तक नहीं है तो उन्होंने कहा था कि ब्रेड नहीं है तो केक खाने दो ना.

आज ठीक यही अंदाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हैं. प्रधानमंत्री और फायनेंस मिनिस्टर देश की जनता को यह सुझाव देते हैं कि कैश लेनदेन के बजाय आॅनलाइन ट्रांजैक्शन कीजिए.

बाकायदा उन्होंने आॅनलाइन ट्रांजैक्शन पर सर्विस टैक्स से छूट दे दी. यानी आबादी का वो तबका जो कार्ड का इस्तेमाल करता है, उसे नकदी लेनदेन करने वालों के मुकाबले 15 फीसदी कम खर्च करना होगा. इस ऐलान पर सरकार अपनी पीठ भी थपथपा रही है.

जनता का भरोसा खो रही है सरकार 

इस पर जाने माने पत्रकार प्रमोद जोशी ने कहा, 'शुरुआत में सरकार का यह फैसला सही लग रहा था. लेकिन अब जैसे हालात बन रहे हैं, उसे देखकर यही लगता है कि सरकार की कोई प्लानिंग नहीं थी.'

उन्होंने कहा, 'सरकार अगर जल्द ही हालात पर काबू नहीं पाती है तो जनता का सरकार पर से भरोसा उठ जाएगा. अभी तक जनता ने बहुत धैर्य दिखाया है.'

Patna: AAP workers protest against demonetisation of Rs 1000 and Rs 500 notes, in Patna on Monday. PTI Photo(PTI11_28_2016_000071B)

तस्वीर: पटना में आम आदमी पार्टी का नोटबंदी पर विरोध

8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले के बाद देश की जनता कैश के लिए मारी-मारी फिर रही है. शहरों में लोग जैसे-तैसे करके पैसे का जुगाड़ कर ले रहे हैं लेकिन गांवों में किसानों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 28 फीसदी जनता गरीबी रेखा के नीचे है. यह तबका बमुश्किल अपना पेट भर पाता है. ऐसे में ये कहां खाता खुलवाएं और कहां स्वैप करें, इसका जवाब सिर्फ सरकार ही दे सकती है.

गांवों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोग (फीसदी में)

कैटेगरी  1993–94  1999–2000  2004–05
 टोटल 37.27 27.09 28.30
अनुसूचित जनजाति 51.94 45.86 47.30
अंतर 14.67 18.77 19.00
 

ऐसे में हर दिन नए-नए फैसले लेने वाली सरकार कहती है कि कैश का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए. कार्ड और आॅनलाइन ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल करना चाहिए. एक फैसले के तहत सरकार ने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से 2000 रुपए तक के आॅनलाइन ट्रांजैक्शन पर सर्विस टैक्स से छूट दे दी है.

लेकिन आबादी का वह तबका जो मजदूरी के लिए दर-दर भटकता है वह कैसे आॅनलाइन लेनदेन करेगा. वह तबका जिसके लिए काला अक्षर भैंस बराबर है, वह कैसे सर्विस टैक्स की छूट ले पाएगा.

हर रोज कमाने खाने वाले लोग जिनकी पूरी कमाई पेट पालने में निकल जाती है, वह कैसे सरकार के डिजिटल इंडिया का हिस्सा बनेंगे.

ऐसा लगता है सरकार गरीबी नहीं, गरीब को ही जड़ से मिटा देना चाहती है. गांवों में किसान अपनी पैदावार लेकर खरीदार की तलाश में बैठे हैं. वह कहां अपनी फसल बेचें.

पिछले हफ्ते छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में किसानों ने टमाटर सड़कों पर फेंक दिया.

Bhopal: National Service Scheme volunteers during an awareness rally flagged off by Chief Minister Shivraj Singh Chouhan from his residence for the promotion of cashless banking transactions under Digital India Drive launched in collaboration with State Bank of India, in Bhopal on Saturday. PTI Photo(PTI11_26_2016_000131B)

तस्वीर: PTI

सरकार की 'रिवर्स इंजीनियरिंग'

ब्लैकमनी के खिलाफ सरकार का आगाज तो बेहतर था, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहे हैं हालात बिगड़ रहे हैं. ऐसे लग रहा है कि सरकार ने अंत्योदय का फॉर्मूला कुछ ज्यादा ही सीरियस ले लिया है.

ब्लैकमनी पर लगाम लगाने और कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ऐसी पॉलिसी बनाई, जिसका सबसे ज्यादा असर पिरामिड के सबसे निचले तबके के लोगों पर पड़ा है.

प्रधानमंत्री ने देश की जनता से 50 दिनों की मोहलत मांगी थी, जिसमें अब सिर्फ 21 दिन बाकी है.

नोटबंदी के फैसले से जनता परेशान तो है लेकिन नाराज नहीं है. अब देखना है कि जनता कब तक मूक दर्शक बनकर सरकार की रिवर्स इंजीनियरिंग झेल पाती है.

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