S M L

हजार रुपए के नोट पर अपनी ही बात से पलटी सरकार

नोटबंदी का ऐलान करते हुए सरकार ने कहा था कि वह नए डिजाइन वाले 1000 रुपए के नोट लाएगी

Dinesh Unnikrishnan Updated On: Feb 23, 2017 11:07 PM IST

0
हजार रुपए के नोट पर अपनी ही बात से पलटी सरकार

एक हजार रुपए का नया नोट उतारने का सरकार का कोई इरादा नहीं है. सरकार की कोशिश है कि पांच सौ और उससे छोटे नोट ज्यादा से ज्यादा बाजार में उतारे जाएं.

बुधवार को आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने ट्वीट करके ये जानकारी दी. शक्तिकांत दास के ट्वीट से ये बात साफ नहीं हुई कि हजार का नया नोट छापने का सरकार का हाल फिलहाल कोई इरादा नहीं. या फिर सरकार ऐसा करेगी ही नहीं.

क्योंकि हाल ही में ये अफवाह जोरों पर थी कि सरकार जल्द ही हजार का नया नोट बाजार में उतार सकती है.

नहीं आ रहा है 1000 रुपए का नोट 

मगर अब अगर शक्तिकांत दास ये कह रहे हैं कि हजार के नए नोट नहीं छापे जाएंगे. अगर ऐसा है तो वो अपनी ही बात से पीछे हट रहे हैं, जो उन्होंने नोटबंदी के एलान के कुछ दिनों बाद दिया था.

तब दास ने कहा था, 'अगले कुछ महीनों में नए रंग-रूप और नई डिजाइन के साथ हम हजार के नए नोट बाजार में उतारेंगे'.

इसके बाद मीडिया में हजार रुपए के नए नोट को लेकर तरह तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं.

यहां तक कि सोशल मीडिया में तो नए नोट की तस्वीरें भी वायरल हो गईं. शायद इन्हीं अफवाहों के चलते शक्तिकांत दास को ट्विटर पर सफाई देनी पड़ी और अपने पुराने बयान से पीछे हटना पड़ा.

क्या सरकार लाने वाली थी 1000 रुपए का नोट

शायद एक हजार रुपए के नए नोट छापने की सरकार की योजना थी, मगर किसी वजह से उसे रद्द कर दिया गया.

मगर बड़ा सवाल ये है कि अगर 500 और उससे छोटे नोट छापने पर ही सरकार का जोर है तो, रिजर्व बैंक ने बाजार में दो हजार के नोट क्यों उतारे?

जब नोटबंदी से जनता परेशान थी तो रिजर्व बैंक ने सबसे ज्यादा जिन नोटों की सप्लाई की वो दो हजार के नोट थे.

इन नोटों से आम लोगों की परेशानी नहीं कम हुई. वजह ये कि बाजार में दो हजार के नोट के छुट्टे नहीं मौजूद थे.

सरकार को परेशानियों का अंदाजा नहीं!

हमारे देश की अर्थव्यवस्था नकदी पर चलती है. ऐसे में सरकार को ये तो अंदाजा होना चाहिए था कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों के पास छोटे नोट होने चाहिए.

क्योंकि बड़े लेन-देन आम तौर पर चेक के जरिए होते हैं. नोटबंदी के बाद छोटे नोटों की डिमांड ज्यादा थी, लेकिन सरकार ने पहले पांच सौ के नोटों की सप्लाई पर जोर देने के बजाय दो हजार के नोट ज्यादा मात्रा में बाजार में उतारे.

क्या सरकार दो हजार के नोटों की भरमार करने के बजाय पांच सौ के नोटों की सप्लाई नहीं कर सकती थी?

या फिर आम लोगों के लिए छोटे नोटों की अहमियत अधिकारियों को बाद में समझ में आई.

बुधवार को शक्तिकांत दास का ये कहना समझ से परे है कि कि अब सरकार का जोर पांच सौ रुपए और उससे छोटे नोटों की उपलब्धता बढ़ाने पर है.

अगर यही था तो दो हजार से पहले बाजार में पांच सौ के नए नोट उतारे जाने चाहिए थे. साफ है कि सरकार ने नोटबंदी के बाद के हालात का सही-सही अंदाजा नहीं लगाया.

नोटबंदी के शुरुआती दिनों में दो हजार के नोटों की सप्लाई पर जोर की एक ही वजह हो सकती है.

सरकार कम नोट छापकर भी ज्यादा मुद्रा बाजार में सप्लाई कर सकी. ताकि आंकड़ों में दिखाया जा सके कि अब तक इतनी करेंसी उतार दी गई है.

देश में नोट छपाई के सिर्फ चार प्रेस

अगर छोटे नोटों की सप्लाई ज्यादा होती, तो नए नोटों की मात्रा आंकड़ों में कम होती. इसकी वजह ये भी है कि देश में नोट छापने के चार ही प्रेस हैं.

अचानक 86 फीसद करेंसी को हटाए जाने के बाद उतनी मात्रा में नए नोट कम समय में छापना बड़ी चुनौती थी.

दो हजार के नए नोटों को हड़बड़ी में उतारकर सरकार ने जमाखोरों को एक सुनहरा मौका मुहैया करा दिया.

दो हजार के नोटों की मदद से कम नोटों में ज्यादा करेंसी की जमाखोरी की जा सकती है. वहीं दो हजार के नोट लेकर आम आदमी छुट्टे के लिए परेशान हुआ.

एक हजार के नए नोट नहीं छापे जाने से दो हजार और उससे कम के नोटों का फासला अभी भी बरकरार है.

आम लोग खुले पैसे के लिए परेशान हैं. शायद सरकार ये उम्मीद कर रही है कि नकदी की किल्लत से जूझते लोग कैशलेस लेन-देन शुरू करेंगे.

जबकि सरकार अभी इसके लिए बुनियादी ढांचा और कानूनी सुरक्षा नहीं मुहैया करा सकी है.

देर से ही सही सरकार को ये तो समझ में आया है कि नकदी का संकट दूर करने के लिए छोटे नोटों की ज्यादा जरूरत है.

लेकिन अगर सरकार ने नोटबंदी के बाद के हालात से निपटने की सही तरीके से योजना बनाई होती तो लोगों को इतनी मुसीबत नहीं उठानी पड़ती.

इसका सबसे अच्छा तरीका यही होता कि पहले पांच सौ और सौ रुपए के नोटों की सप्लाई बढ़ाई जाती.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
गोल्डन गर्ल मनिका बत्रा और उनके कोच संदीप से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi